रायपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

भारत सरकार के स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट की गाइड-लाइन में पब्लिक साइकिल शेयरिंग प्रोजेक्ट शामिल है। चड़ीगढ़, बेंगलुरू, इंदौर जैसे शहरों ने इसे प्रमुखता से लिया। सभी जगह यह प्रोजेक्ट चल रहा है। रायपुर ने भी इस पर काम किया। केंद्रीय शहरी मंत्रालय ने दो कंपनी जूम कार और ओफो का नाम सुझाया। जूम कार से अनुबंध हुआ। कंपनी ने 50 साइकिल सड़क पर उतारीं, लेकिन कंपनी अप्रैल में पूरा सेटअप समेटकर भाग गई। स्मार्ट सिटी की रैंकिंग में पिछड़ने की वजह, साइकिल शेयरिंग समेत स्मार्ट रोड समेत अन्य प्रोजेक्ट का धरातल पर आना है। यही वजह है कि अब दोबारा इस प्रोजेक्ट में संशोधन कर टेंडर जारी किया। इस बार 50 साइकिल स्टेशन के साथ 550 साइकिल सड़क पर होंगी।

इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य सड़कों से ट्रैफिक जाम को कम करना. पर्यावरण प्रदूषण में कमी लाना, साइकिल के प्रति जागरूकता लाना, फिटनेस के लिए अवेयर करना शामिल है। जानकारी के मुताबिक पूरा प्रोजेक्ट पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मोड पर संचालित होगा, जो पांच साल के लिए होगा। परफार्मेंस को देखते हुए पांच साल अनुबंध आगे बढ़ाया जा सकता है।

इन क्षेत्र में बनेंगे डोक स्टेशन- डोक स्टेशन यानी साइकिल स्टैंड आयुर्वेद कॉलेज, एनआइटी, नालंदा परिसर, पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय परिसर, जयस्तंभ चौक, शास्त्री समेत शहर के सभी प्रमुख चौकों शामिल होंगे। इस पर टेंडर के जरिए होने वाली अनुबंधित कंपनी, स्मार्ट सिटी अन्य स्थानों पर डोक स्टेशन तय करेगी।

साइकिल लें, दूसरे स्टेशन में छोड़ें और ऑन-लाइन करें भुगतान

साइकिल में बारकोड होगा, जो मोबाइल में एप डाउनलोड करने और फिर स्कैन करने पर काम करेगा। साइकिल जिस डोक स्टेशन से लेंगे, जरूरी नहीं कि उसे वहीं छोड़ा जाए। आप अपना काम पूरा कर, नजदीक के डोक स्टेशन में छोड़ सकते हैं।

आखिर किस काम का करोड़ रुपये का साइकिल ट्रैक

गौरव-पथ में दो साल पहले राज्य का पहले साइकिल ट्रैक बना, जिसकी लागत 1.20 करोड़ रुपये थी। 2.5 किमी लंबे इस ट्रैक का उद्देश्य आज तक सार्थक नहीं हो सका है। ट्रैक पर साइकिल तो कभी-कभार ही चलती हैं, कार पार्किंग और इस पर दुकानें लगती हैं। अतिक्रमण न हो, तो बोलार्ड (लोहे के खंभे) भी लगवाए गए थे। मगर इन्हें भी चोर, चुराकर ले गए। इसका उपयोगिता साबित ही नहीं हो रही है।

पब्लिक बाइसिकल शेयरिंग प्रोजेक्ट भी बना, लेकिन रद हुआ

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पुराने प्रोजेक्ट के बारे में ज्यादा कुछ नहीं बता नहीं पाऊंगा, लेकिन इस नए प्रोजेक्ट में बेहतर ढंग से पूरा करेंगे। कुछ बदलाव भी किए गए हैं। इसका मकसद लोगों को साइकिल की आदत डलवाना, फिटनेस और साइकिल चलेंगी तो प्रदूषण कम होगा।

एसके सुंदरानी, महाप्रबंधक, रायपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड

Posted By: Nai Dunia News Network