रायपुर। Raipur Local Edit: लंबित मुकदमों का बोझ कम करने और आपसी सुलह-समझौते से छोटे मामलों को निपटाने के लिए राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन राहत भरा कदम है। आम जनता की समस्याओं का समाधान करने के लिए न्यायालय की यह व्यवस्था काबिले तारीफ है। राज्य में शनिवार को 55 हजार मामले सुनवाई के लिए रखे गए। इनमें से जो मामले आपसी समझौते से निपटे, उनसे जुड़े लोगों के लिए आज का दिन शुभ रहा। बता दें कि उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठतम न्यायाधीश की अध्यक्षता में राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) देशभर में लोक अदालतों का आयोजन करता है।

लोक अदालत विवादों को समझौते के माध्यम से सुलझाने का एक वैकल्पिक मंच है। न्याय की इस चौखट पर सालों से लंबित वाद (ऐसे अपराधों को छोड़, जिनमें समझौता वर्जित है) का निराकरण किया गया। नालसा द्वारा जारी एक बयान के अनुसार संबंधित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कोविड प्रोटोकाल का पालन करते हुए आनलाइन और प्रत्यक्ष दोनों ही माध्यम से राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। इस दौरान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (सालसा) और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डालसा) द्वारा व्यापक श्रेणी के आपराधिक और दीवानी मामलों के सौहार्दपूर्ण समझौते और निपटारे के लिए विभिन्न पीठ को भेजे गए।

कोरोना की विकरालता कम होने के बाद 11 सितंबर को आयोजित लोक अदालत की वजह से न्यायालयों में मेले जैसा माहौल रहा। जिन मामलों की सुनवाई हुई, उनके पक्षकारों से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा सहमति ली गई। जिला एवं सत्र न्यायाधीशों के जरिए सहमति फार्म भराया गया। गरीबों को त्वरित न्याय दिलाने के लिए हाई कोर्ट ने नेशनल लोक अदालत के स्वरूप में बदलाव भी किया है।

स्मरण करा दें कि हाई कोर्ट के लिए 11 जुलाई का दिन भी बहुत खास था। यहां देश के पहले ई-नेशनल लोक अदालत में तीन हजार 133 मामलों की सुनवाई हुई थी। विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष व जस्टिस प्रशांत मिश्रा के नेतृत्व में 195 खंडपीठों का गठन किया गया था। ई-नेशनल लोक अदालत की खास बात यह रही कि राज्य के हाई कोर्ट में दो खंडपीठ के अलावा देश के सभी जिला एवं सत्र न्यायालयों में गठित खंडपीठों के जरिए सुनवाई हुई थी।

11 जुलाई को राज्य के हाई कोर्ट ने देश की पहली ई-नेशनल लोक अदालत का आयोजन कर इतिहास भी रचा है। इस लोक अदालत का शुभारंभ चीफ जस्टिस पीआर रामचंद्र मेनन ने किया था। लोक अदालतों का आयोजन होते रहने से छोटे-मोटे मुकदमों में फंसे लोगों को राहत मिलेगी। मुकदमेबाजी के कारण कितनी दिक्कत होती है। सालों धन और समय की बर्बादी होती है। इसे अगर लोग समझें तो अपराध में कमी आएगी। इससे न तो अदालतों पर मुकदमों का बोझ होगा और न ही आम लोग ही परेशान होंगे।

Posted By: Shashank.bajpai

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