रायपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। हिंदू संवत्सर के माघ महीने की पूर्णिमा तिथि पर पवित्र नदियों में स्नान करने की मान्यता के चलते खारुन नदी में पुण्य की डुबकी लगाने श्रद्धालु पहुंचेंगे। महादेवघाट में ब्रह्म मुहूर्त से ही स्नान करने का सिलसिला शुरू हो जाएगा। इसके बाद भक्तगण हटकेश्वर महादेव की पूजा-अर्चना करेंगे। इस साल यहां नदी के उपर बना लक्ष्मण झूला और नदी के उस पार बना गार्डन आकर्षण का केंद्र रहेगा।

इसके अलावा राजधानी से महज 45 किलोमीटर दूर राजिम में होने वाले प्रदेश के सबसे बड़े पुन्नी मेला घूमने का आनंद लेने हजारों लोग आएंगे। भाजपा के शासनकाल में कुछ सालों से राजिम मेला अर्ध्य कुंभ के नाम से देशभर में प्रसिद्ध हो चुका है। पिछले साल कांग्रेस शासित राज्य सरकार ने राजिम अर्ध्य कुंभ का नाम पुन्नी मेला कर दिया है, हालांकि यही नाम पुरातन काल में प्रचलित था।

महाशिवरात्रि तक चलेगा मेला

इस साल नौ फरवरी माघ पूर्णिमा से शुरू होकर यह मेला महाशिवरात्रि 21 फरवरी तक चलेगा। पवित्र त्रिवेणी संगम के तट पर लगने वाले मेला की तैयारियां पूरी कर ली गई है। नदी पर रेत की अस्थायी सड़कों का निर्माण, स्नान के लिए कुण्ड बनाया गया है। पेयजल, अस्थायी शौचालय, स्वास्थ्य सुविधाएं, 50 दाल-भात सेंटरों की व्यवस्था भी की गई है। खासकर मेला क्षेत्र में कपड़ा एवं कागज के थैलों का ही उपयोग किए जाने का आदेश दिया गया है।

रंगारंग कार्यक्रम

मुख्य मंच पर प्रतिदिन शाम 6 से 10 बजे तक छत्तीसगढ़ी सांस्कृतिक एवं लोक परंपराओं पर आधारित कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाएंगे। इसमें नाचा, पंडवानी, रामधुनी, सुआ नृत्य, भोजली, डंडा नृत्य, राउत नाचा, गेड़ी आकर्षण के केन्द्र होंगे।

पारंपरिक खेलकूद

इस बार छत्तीसगढ़ी पारंपरिक खेलकूद भी आकर्षण के केन्द्र रहेंगे। भौंरा, बाटी, बिल्लस, फुगड़ी, तिरी-पासा, पौसम पा, लंगड़ी, गोंटा, पित्तुल, फल्ली और नून जैसे खेलों की खनक गुजेंगी। दोपहर 3 से 4 बजे तक खेलकूद का प्रदर्शन किया जाएगा।

राजिम का मेला इसलिए है खास

गरियाबंद जिले के राजिम में तीन नदियों का संगम है इसलिए इसे त्रिवेणी संगम भी कहा जाता है। तीन नदियां महानदी, पैरी नदी सोंढुर नदी का संगम स्थल है। संगम स्थल पर कुलेश्वर महादेव विराजमान हैं। 2001 से राजिम मेले को राजीव लोचन महोत्सव के रूप में मनाया जाता था। 2005 में इसे राजिम अर्ध्य कुंभ नाम दिया गया। पिछले साल 2019 से राजिम पुन्नी मेला महोत्सव नाम से मनाया जा रहा है।

राजीव लोचन के दर्शन बिना जगन्नाथपुरी की यात्रा अधूरी

ग्रामीणों में मान्यता है कि भगवान जगन्नाथपुरी की यात्रा तब तक पूरी नहीं मानी जाती जब तक भगवान राजीव लोचन तथा कुलेश्वरनाथ के दर्शन नहीं कर लिए जाते। राजिम का यह मंदिर आठवीं शताब्दी का है, जो संगम स्थल पर विराजमान हैं। मेला की शुरुआत कल्पवास से होती है। पखवाड़े भर पहले से श्रद्घालु पंचकोशी यात्रा प्रारंभ कर देते हैं। पंचकोशी यात्रा में श्रद्घालु पटेश्वर, फिंगेश्वर, ब्रम्हनेश्वर, कोपेश्वर तथा चम्पेश्वर नाथ के पैदल भ्रमण कर दर्शन करते हैं। 101 किलोमीटर की यात्रा के समापन के बाद माघ पूर्णिमा से मेला का आगाज होता है, जो महाशिवरात्रि तक चलता है।

Posted By: Nai Dunia News Network

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

NaiDunia Local
NaiDunia Local
 
Show More Tags