रायपुर। Raipur News : छत्तीसगढ़ जिले के राजनांदगांव स्थित दिग्विजय कालेज के प्रोफेसर डा. चंद्रकुमार जैन ने अंतरराष्ट्रीय आर्थिक विकास और संभावनाएं विषय पर केंद्रित अंतरराष्ट्रीय वेबिनार में सामजिक और शैक्षणिक मुद्दों के मद्देनजर कहा कि गरीब परिवारों को सुरक्षा प्रदान करना, रोजगार के अवसर बढ़ाना, लोगों के मनोबल को बचाना वर्तमान समय की सबसे बड़ी चुनौतियां हैं। राजीव गांधी शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय अंबिकापुर द्वारा आयोजित वेबिनार में डा. जैन ने कहा दबाव मुक्त रखकर भी शिक्षा गुणवत्ता बनी रहे, ताकि वे आधे-अधूरे नागरिक की तरह तैयार न होकर समाज और देश के काम आ सकें।

डा. जैन ने कहा कि इसके अलावा जलवायु परिवर्तन सबसे बड़ा खतरा होगा। आर्थिक मंदी के नाम पर भोले भाले लोग ज्यादा छले जा सकते हैं। बाजार की माली हालत का रोना रोकर आम लोगों और माध्यम वर्ग को दिग्भ्रमित भी किया जा सकता है। इन तमाम बातों के अलावा मनोवैज्ञानिक धरातल पर लोगों को संभलकर चलने का आधार यदि नहीं मिला, तो समाज के नवनर्माण में उनकी भूमिका बेमानी हो जाएगी।

लगातार सातवीं बार की सहभागिता

लगातार सातवें अंतरराष्ट्रीय वेबिनार के वक्ता डा. जैन ने कहा कि चुनौती से निपटने के लिए भारत को इस महामारी को फैलने से रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाना होगा। स्थानीय स्तर पर अस्थायी रोजगार सृजन पर बहुत काम करना होगा। रोजगार देने वाली कंपनियों को ज्यादा सपोर्ट की जरुरत है।

कोरोना की जंग में ईमानदार साथ देने वालों को भरपूर सुरक्षा और प्रोत्साहन देना होगा। गौरतलब है हमारे देश में छोटे-छोटे कारखाने और लघु उद्योगों की बहुत बड़ी संख्या है। उन्हें नगदी की समस्या हो जाएगी क्योंकि उनकी कमाई नहीं होगी। ये लोग बैंक के पास भी नहीं जा पाते हैं इसलिए ऊंचे ब्याज पर कर्ज ले लेते हैं और फिर उलझ जाते हैं। इन्हें बचाने की जरुरत होगी।

डिजिटल समाधान का रास्ता चुनना पड़ा

डा. जैन ने कहा कि इन दिनों महामारी की वजह से लोगों को घर से काम करने, घर में रहते हुए बैठकें करने के आलावा शिक्षा हासिल करने के लिए डिजिटल समाधान का रास्ता चुनना पड़ा है। कोविड-19 के बाद की दुनिया में इन तौर-तरीकों में से कुछ के जारी रहने की संभावनाएं दिख रही हैं। आने वाला समय कोरोना के साथ हो या कोरोना के बाद का वक्त हो, समाज को बदलना ही होगा। कृत्रिम बौद्धिकता के बगैर काम नहीं चल पाएगा।

डा. जैन ने ने कहा कि कोरोना की वजह से भविष्य में खुदरा खरीददारी आनलाइन होगी और संवाद आभासी होगा। सामाजिक दूरी के चलते इलेक्ट्रानिक संवाद बढ़ेगा। नई आदतें विकसित होंगी और महामारी के बाद की दुनिया महामारी के पहले की दुनिया से अलग होगी। कम खर्चीले संवाद का माहौल बनेगा।

शिक्षा प्रणाली ज्यादा से ज्यादा लचीली होगी। डा. जैन ने कहा अधिकांश संस्थानों ने दूरसंचार, स्काइप काल, जूम काल और अन्य आभासी विकल्पों को चुना है, ताकि शिक्षण जारी रहे। छात्रों और शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया रहा है। शिक्षा शिक्षा क्षेत्र के लिए यह बहुत ही महत्वपूर्ण समय है।

Posted By: Shashank.bajpai

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