रायपुर। छत्तीसगढ़ में अपराध कर देश के किसी भी कोने में छिपकर रह रहे आदतन अपराधियों के लिए अब पहचान छिपाकर कहीं भी छिपना आसान नहीं होगा। ऐसे अपराधियों की पहचान करने के लिए राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) चेहरा पहचानने वाली तकनीक का सहारा लेगी। दरअसल एनसीआरबी ने 'नेशनल ऑटोमेटेड फिंगर प्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम' (नेफीस) को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग में जल्द ही लांच करने की तैयारी की है। इसके लिए संबंधित कंपनियों से साफ्टवेयर और हार्डवेयर उपलब्ध कराने के लिए पत्र लिखा गया है।

रायपुर, दुर्ग रेंज के फिंगर प्रिंट एक्सपर्ट राकेश नरवरे ने नईदुनिया को बताया कि राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो द्वारा देश भर में नेफीस सिस्टम लगाया जा रहा है। इसके तहत प्रथम चरण में छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर को स्कैनर, कंप्यूटर, इंटरनेट समेत अन्य हाइटेक सुविधाओं से लैस किया जाएगा। इसके बाद सभी जिला मुख्यालयों को नेफीस सिस्टम से जोड़ा जाएगा।

इसके लिए पर्याप्त संसाधन की व्यवस्था की जा रही है। फिंगर प्रिंट और चेहरे से व्यक्ति की पहचान बताने वाला नेफीस सिस्टम कई तरीके से अपराध की जांच और अपराधियों पर शिकंजा कसने में मददगार साबित होगा। इस सिस्टम के स्थापित होने के बाद क्राइम ऑफ सीन में कोई भी अपराधी अपनी पहचान बदलकर और किसी दूसरे नाम से कहीं भी नहीं छिपकर बच नहीं सकेगा। फिंगर प्रिंट सिस्टम में मैच होते ही वह पकड़ा जाएगा। यहां तक कि भगोड़े आतंकियों की भी इससे आसानी से पहचान हो सकेगी। वर्तमान में राज्य में एफीस सिस्टम संचालित है। इस सिस्टम में राज्य में दंडित 40 हजार से अधिक अपराधियों की दसों अंगुलियों के प्रिंट डिजिटल फार्म में सेव हैं।

गुमशुदा बच्चों की खोज, लावारिस लाशों की पहचान में मिलेगी मदद

नेफीस सिस्टम गुमशुदा बच्चों की खोज और लावारिस लाशों की पहचान करने में भी मददगार साबित होगा। देश के किसी भी हिस्से से ऐसे बच्चों की आसानी से पहचान कर उसके असली माता-पिता के पास पहुंचाया जा सकेगा। इसके अलावा प्राकृतिक व अन्य दुघर्टना में मारे जाने वाले लोगों की पहचान भी इस सिस्टम के माध्यम से आसानी से हो सकेगी। पुलिस इस सिस्टम के माध्यम से लावारिस लाश मिलने के मामले की जांच आसानी से कर सकेगी।

एएफआइ सिस्टम में होगा डाटा बैंक

पुलिस डाटा बैंक बनाने के लिए अत्याधुनिक ऑटोमेटेड फिंगर प्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम खरीदेगी। फिंगर प्रिंट जैसे-जैसे तैयार होंगे, उन्हें एएफआइ में फीड किया जाएगा। इससे पुलिस के पास सजायाफ्ता और चार्जशीटेड अपराधियों का डाटा बैंक तैयार हो जाएगा। फिंगर प्रिंट का डाटा बैंक बनाने से पुलिस को कई फायदे होंगे। ऐसा कोई शख्स, जिसका फिंगर प्रिंट पुलिस के पास मौजूद है, वह किसी दूसरे अपराध में शामिल रहता है तो उसकी पहचान आसानी से हो जाएगी। घटनास्थल से मिले उसकी अंगुलियों के निशान का मिलान डाटा बैंक में मौजूद फिंगर प्रिंट किया जाएगा। यदि निशान मिल जाता है तो उसके घटना में शामिल होने की पुष्टि के साथ ही पुलिस को साक्ष्य भी मिल जाएगा।

Posted By: Nai Dunia News Network