रायपुर। कहते हैं कि जान है तो जहान है, लेकिन उन लोगों ने इस कहावत को झुठला दिया, जिन्होंने स्वास्थ्य विभाग में मात्र छह महीने की नौकरी के लिए जान की कतई परवाह नहीं की। आवेदन जमा करने वालों की राजधानी रायपुर में भारी भीड़ उमड़ी। आलम यह था कि सीएमएचओ कार्यालय परिसर में कदम रखने की जगह नहीं थी। जमकर धक्का-मुक्की, न मास्क और न ही सैनिटाइजर।

कोरोना से बचाव के लिए गाइडलाइन का पालन नहीं किया गया। यह चिंताजनक स्थिति है कि छत्‍तीसगढ़ में बड़ी बेरोजगारी है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि जान की परवाह ही न की जाए। रोजगार के लिए युवा कोशिश करते रहें, मेहनत करें, सफलता जरूर मिलेगी, लेकिन खुद को सुरक्षित भी रखें। इस संकट की घड़ी में विवेक से काम लेना बहुत जरूरी है। भीड़ को नियंत्रित करना बड़ा कठिन कार्य होता है। ऐसे में खुद ही धैर्य बनाए रखना ही बुद्धिमानी है।

भाग्य में डौकी हवै कि नहीं?

इन दिनों कोरोना और उसकी औलाद ओमिक्रोन ने अधिकतर लोगों का सुख-चैन छीन रखा है। ऐसी संकटपूर्ण स्थिति के बावजूद कुछ लोग ऐसे भी हैं, जिनकी मस्ती देखकर लगता है कि कोई समस्या ही नहीं है। उनकी हास-परिहास की बातें मन को इस संकट की घड़ी में गुदगुदा देती हैं। रायपुर के घड़ी चौक के पास दो भिखारी हंसी-ठिठोली कर रहे थे।

उनमें से एक युवा भिखारी ने दूसरे से पूछा, 'हाथ देख के बता कका कि मोर बिहाव कब होही? भाग्य में डौकी हवै कि नहीं?" यह संवाद आसपास मौजूद जितने भी लोगों ने सुना, उनके चेहरे पर मुस्कान आ गई। एक सवाल के जवाब में उस भिखारी ने कहा कि जितना लोग कोरोना का नाम लेते हैं, उतना अगर भगवान का सुमिरन करें, साफ-सफाई रखें, भीड़भाड़ से दूर रहें तो कल्याण हो जाए। उसने यह भी कहा कि कितनी भी मुश्किल आए, मनुष्य को बिलकुल घबराना नहीं चाहिए।

मुंहफटजी में सुधार

अपने मुंहफटजी हंसी-ठिठोली में कुछ भी बक देते थे, लेकिन बाबा कालीचरण के अंदर होने के बाद से उनकी वाणी में सरस्वती का वास हो गया है। वह नपे-तुले शब्दों में बात करने लगे हैं। लोगों की निंदा करने में उन्हें बड़ा सुख मिलता था, लेकिन अब बुरे आदमी की भी दिल खोलकर तारीफ करते हैं और लोगों से कहते हैं, 'मीठा बोलो, सुख से रहो। किसी का दिल मत दुखाओ।" उनमें यह बदलाव देखकर उनकी जान-पहचान के लोगों को सुखद आश्चर्य होता है।

कुछ लोगों को आशंका है कि मुंहफटजी कहीं चाटुकार न हो जाएं। यह ठीक है कि किसी महापुरुष को अपशब्द न कहा जाए, लेकिन चारण बनना भी ठीक नहीं। देखिए कि आगे क्या होता है! मुंहफटजी को कुछ लोग यह सुझाव भी देने से नहीं चूक रहे हैं कि वह भाट बन जाएं, क्योंकि इसके अनेक फायदे हैं।

मक्खन लगाने वालों के काम सध जाते हैं।

ऐसे लोगों को कौन सुधारे?

कई लोग ऐसे हैं, जिन्हें कोरोना आज तक नहीं डरा सका। कोरोना की अति खतरनाक दूसरी लहर भी उन्हें भयभीत नहीं कर सकी और वे मनमानी करते रहे। शासन-प्रशासन की यह कोशिश है कि कोरोना के फैलाव को किसी तरह नियंत्रित किया जाए। इसके लिए लोगों को लगातार सतर्क किया जा रहा है। रायपुर में नगर निगम की टीम बिना मास्क लगाए लोगों से जुर्माना भी वसूल रही है, उन्हें मास्क लगाने, शारीरिक दूरी बनाए रखने के लिए समझा भी रही है, लेकिन कुछ लोगों में कोई सुधार नहीं हो रहा है।

वे बिना मास्क लगाए दोपहिया वाहन दौड़ाते रहते हैं। टीम पकड़ती है तो वे उससे उलझने से भी बाज नहीं आते हैं। कुछ तो ऐसे हैं कि भले ही जुर्माना दे देते हैं, लेकिन आदत से बाज नहीं आ रहे हैं। उनमें से कई कोरोना पीड़ित होंगे, लोगों को संक्रमित कर रहे होंगे। ऐसे लोगों को कौन सुधारे?

Posted By: Kadir Khan

NaiDunia Local
NaiDunia Local