रायपुर। नाग से लोग इसलिए डरते हैं, क्योंकि वह जहरीला होता है, डस ले तो बचना मुश्किल होता है। एक मंदिर में शिवलिंग का श्रृंगार किया गया तो असली नाग गर्भगृह में छोड़कर शीशे लगा दिए गए, ताकि नाग बाहर न निकलें। नाग कभी शिवजी के सिर पर चढ़ते तो कभी फुफकार मारते हुए बाहर आने की कोशिश करते। असली नागों को देखने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी।

एक महिला डर रही थी कि कहीं नाग बाहर निकल आया और भगदड़ मच गई तो क्या होगा? इस पर दूसरी महिला ने कहा- असली नागों से अब भय नहीं लगता। भय तो उन नकली नागों से लगता है, जो हमेशा डसने को तैयार रहते हैं। कभी किसी को छुरा घोंप देते हैं तो कभी किसी के गले से चेन लूट लेते हैं। मंदिर में भी ऐसे नकली नाग घूम रहे हैं, जिन्हें जेल रूपी पिटारे में बंद करना जरूरी है।

कांवर की राजनीति

पिछले दिनों भोलेनाथ को जल चढ़ाने के लिए हजारों कांवरिये निकले। महादेवघाट जाने वालों का रेला लगा रहा। ऐसे में भला नेतागण कहां पीछे रहते, इतनी भीड़ कब मिलती। सो, उन्होंने भी कांवर यात्रा निकालने की सोची। पहले एक विधायक ने निकाली, जिसमें श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। राजधानी शिवमय हो गई। जिसे देखो वही तारीफ करने लगा। इसके दो दिन बाद एक पूर्व मंत्री ने कांवर यात्रा निकाली। इसमें भी हजारों लोग उमड़े। यह सिलसिला यहीं नहीं थमा, कई अन्य नेताओं और पार्षदों ने अपने-अपने क्षेत्र में कांवर यात्रा आयोजित की।

कुछ युवाओं ने भोलेनाथ की भक्ति कम और राजनीति ज्यादा की। यह देखकर कुछ बुजुर्गों से रहा नहीं गया और वे नसीहत देने आगे आ गए। कहा-बेटा बाबा के जयकारे लगाते चलो। सेल्फी, फोटो बाद में खिंचवा लेना। बुजुर्गों की बातें सुनकर युवक-युवतियां झेंप गए। फिर कांवरियों का हुजूम बम-बम भोले, हर-हर महादेव के जयकारे लगाते आगे बढ़ा।

कृष्ण कुंज से छाएगी हरियाली

हरियाली को बचाने के लिए आम लोगों को लगातार प्रेरित किया जा रहा है। शासन ही नहीं, कई संगठन भी सक्रिय हैं। इसी क्रम में आम लोगों को जागरूक करने का बेहतर अभियान कृष्ण जन्माष्टमी से प्रदेशभर में प्रारंभ हो रहा है। जिस क्षेत्र को हरा भरा रखना है, उसका नाम कृष्ण कुंज रखा जाएगा। उम्मीद है कि इससे हरियाली छाएगी। कृष्ण कुंज में जहां पौधे लगेंगे वहां हरियाली बनाए रखना अधिकारियों की मजबूरी हो जाएगी। अभी तक तो यही होता रहा है कि पौधे लगाने के बाद उन्हें रामभरोसे छोड़ दिया जाता है। पौधे मरे या मुरझाए, किसी को लेना-देना नहीं होता है। नतीजतन रोपे गए अधिकतर पौधे मर जाते हैं। कृष्ण कुंज में लगाए जाने वाले पौधों का यह हाल नहीं होगा, क्योंकि यहां के पौधे नहीं फले-फूले तो अधिकारियों के सिर पर ठीकरा फूटेगा। उन्हें इस पर जवाब देना होगा, क्योंकि सुरक्षा की जवाबदारी उनकी ही होगी।

छूट पर पानी फेर रहे मीटर रीडर

राज्य सरकार 400 यूनिट तक खपत पर बिजली बिल हाफ योजना का लाभ दे रही है। बहुतेरे लोग खुश हैं कि 50 प्रतिशत की छूट मिल रही है। लेकिन कुछ लोग इस बात को लेकर दुखी हैं कि यदि खपत 400 यूनिट से थोड़ी भी ज्यादा हुई तो उपभोक्ता को छूट का लाभ नहीं मिलता। कई उपभोक्ताओं को तो मीटर रीडर की गलती के कारण छूट से वंचित होना पड़ता है। कई घरों में पांच-सात दिन देर से मीटर रीडर पहुंचता है, जो भारी पड़ जाता है। ऐसे ही एक बुजुर्ग बिजली दफ्तर पहुंचे थे।

उनका कहना था कि 31 तारीख तक उनका बिल नहीं आया। वे गणना करके बैठे थे कि पूरे माह 390 यूनिट खपत हुई थी। रीडिंग वाला पांच दिन बाद पहुंचा तब तक 420 यूनिट खपत हो गई थी। उसके चलते उन्हें छूट का लाभ नहीं मिला। हालांकि अधिकारियों ने गणना करके बिल कम कर दिया।

Posted By: Pramod Sahu

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