रायपुर। एक समय था, जब सवारी-गाड़ियों को प्राथमिकता दी जाती थी। मालगाड़ियों को रोककर यात्री-गाड़ियों को निकाला जाता था, लेकिन अब स्थिति विपरीत है। कोयला ढुलाई के कारण मालगाड़ियों को पहले निकालने के चक्कर में यात्री-गाड़ियों को रोक दिया जाता है।

इससे यात्रियों को काफी परेशानी हो रही है। लंबी दूरी की गाड़ियां जैसे-तैसे निकल जाती हैं, लेकिन कम दूरी की गाड़ियां घंटों लेट हो जाती हैं। कई ट्रेनें इन दिनों रद हैं। इस कारण यात्रा दुर्गम हो गई है। इस भीषण गर्मी में जब ट्रेन बीच में रोक दी जाती है तो यात्रियों खासकर बच्चों को बड़ी दिक्कत होती है।

यात्रियों को भी सुविधा मुहैया कराई जाए। रेलवे इस पर गंभीरता से विचार करे। जो ट्रेनें रद की गई हैं, उन्हें अविलंब चालू किया जाए। कम दूरी की गाड़ियों को बिना किसी बाधा के चलाना चाहिए। इससे आसपास की यात्रा करने वाले यात्रियों की आने-जाने की परेशानी दूर हो जाएगी।

कितने पैसे दूं?

हेल्पलाइन नंबर पर सवाल पूछा गया- बच्चे का नंबर बढ़वाना है, कितने पैसे दूं? निश्चय ही यह स्थिति अति चिंतनीय और दुखद है। ऐसा सवाल अगर किसी अभिभावक ने किया है तो वह अपने बच्चे का हितैषी कतई नहीं है। उसे पैसा खर्च करना चाहिए बच्चे को अच्छी शिक्षा देने के लिए, पास कराने के लिए नहीं। बच्चा मेहनत करेगा तो अच्छे अंकों से पास होगा, उसकी नींव मजबूत होगी, वह कुछ बनकर दिखाएगा।

पैसा देकर पास होने वाला बच्चा अगली कक्षा में तो पहुंच जाएगा, लेकिन उसकी नींव कमजोर रहेगी, अत: अभिभावक ऐसी भूल न करें। कुछ लोग हेल्पलाइन नंबर पर फोन करके शरारत करते हैं। उन्हें दंडित किए जाने की जरूरत है। वे विशेषज्ञों का समय बर्बाद करते हैं। समझना चाहिए कि विशेषज्ञ, बच्चों को मार्गदर्शन देने के लिए बैठाए जाते हैं। उन्हें हल्के में लेना, उनका मजाक उड़ाना घोर निंदनीय है। लोगों को अपनी मानसिकता बदलनी चाहिए।

पंडित बाबा का पत्रा और आपकी यात्रा

पंडित बाबा पत्रा देखकर बताते हैं कि पंचक में यात्रा न करें, परेशानी हो सकती है। आजकल अधिकतर लोग इसे नहीं मानते, लेकिन कुछ लोग मानते हैं। यात्रा बहुत जरूरी हुई तो देवी-देवता का सुमिरन करके घर से निकलते हैं। दो लोगों ने अपना अनुभव बताया। उनका कहना था कि पंचक में उन्हें यात्रा करनी पड़ी। ट्रेन लेट होने के कारण काफी परेशानी हुई।

घंटों स्टेशन में बैठना पड़ा। पंचक के चक्कर में जरूरी यात्रा स्थगित न करें, परेशानियों से भी न डरें। जीवन में परेशानियां आती रहती हैं। सूझबूझ से उनसे छुटकारा पाया जा सकता है, लेकिन पत्रा की बातों का उपहास भी नहीं उड़ाना चाहिए। यह सच है कि आजकल कुछ लोग पोंगापंथी करके जनता का नुकसान कर रहे हैं, लेकिन ज्योतिष विद्या के ज्ञाता भी हैं। इस विद्या को बड़े-बड़े वैज्ञानिक, विज्ञानी भी मानते हैं। अत: इसे सिरे से खारिज नहीं किया जा सकता। बाकी आपकी इच्छा।

ऐसे निंदकों को न राखिए 'नियरे"

कुछ लोग सिर्फ निंदा ही करते रहते हैं। कोई आदमी अगर 10 फल दान कर रहा है, 10-20 गिलास छाछ राहगीरों को पिला रहा है तो क्या बुरा कर रहा है? समाज को एक संदेश तो दे ही रहा है कि जनसेवा करनी चाहिए। जो लोग इसे दिखावा मानकर निंदा करते हैं, वे खुद को देखें कि समाज में उनका कितना योगदान है? क्या वे किसी प्यासे को एक गिलास पानी भी पिला रहे हैं? किसी भूखे आदमी को एक रोटी भी खिला रहे हैं? सकारात्मक और स्वस्थ सोच के साथ जनसहयोग करना चाहिए। विसंगतियों का विरोध भी करना चाहिए, लेकिन बेबुनियाद आलोचना ठीक नहीं है।

जो आदमी जनहित का काम कर रहा है, उसकी सराहना करनी चाहिए, उसका मनोबल बढ़ाना चाहिए। ऐसा करने से अच्छा काम करने वालों की संख्या बढ़ेगी। आलोचना सुधार के भाव से करें, किसी को नीचा दिखाने के लिए नहीं। इससे समाज को नुकसान है।

Posted By: Pramod Sahu

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