रायपुर। भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में कुछ रोचक घटना हुई। सबसे पहले प्रदेश प्रभारी डी पुरंदेश्वरी कार्यक्रम शुरू होने से पहले नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक और प्रदेश महामंत्री नारायण चंदेल के बगल में बैठीं। यह तस्वीर जब कार्यसमिति से बाहर आई, तो सियासी पंडित इसके मायने तलाशने लगे। एक नेता कि माने तो यह संदेश देने की कोशिश है कि भाजपा छत्तीसगढ़िया और ओबीसी राजनीति को प्रदेश में बढ़ावा देगी।

एक पूर्व मंत्री ने राज्य सरकार के कामकाज पर ऐसी टिप्पणी की कि हाल में मौजूद लोग अपनी हंसी नहीं रोक पाए। टि्वटर पर आक्रामक पूर्व मंत्री ने कहा, साहब की वसूली से अधिकारी नाराज हैं और आलाकमान की वसूली से साहब नाराज हैं। यही नहीं, लंबे समय बाद भाजपा नेताओं के सिर पर भगवा टोपी नजर आई, जो भविष्य की राजनीतिक दिशा को तय करने वाली बताई जा रही है। देखिए, इससे भाजपा कार्यकर्ता कितने रिचार्ज हो पाते हैं?

मोदी के बहाने नई भाजपा का ट्रायल

पीएम मोदी के आठ साल पूरे होने पर भाजपा ने 15 दिन का कार्यक्रम तय किया है। कार्यक्रम में जिन नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी गई है, उसकी गूंज दूर तक सुनाई दे रही है। लंबे समय से पार्टी संगठन में बदलाव और नए नेतृत्व को मौका देने की मांग के बीच जिन नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी गई है, वह पार्टी में सेकेंड लाइन के नेता हैं। यहां खास यह है कि नेता प्रतिपक्ष को छोड़कर किसी भी वरिष्ठ नेता को कार्यक्रम में बड़ी जिम्मेदारी नहीं दी गई है।

एक सांसद को पहले कोर ग्रुप में शामिल किया गया था, अब उन्हें कार्यक्रम का संयोजक बना दिया गया। इसे बदलती भाजपा की तस्वीर के रूप में रेखांकित किया जा रहा है। पार्टी ने पहले ही परिवारवाद को खत्म करने की सार्वजनिक घोषणा की है। अब उम्र सीमा तय होने के बाद कुछ नेताओं की चुनावी महत्वाकांक्षा भी खत्म हो गई है।

एक व्यक्ति, एक पद में नपेंगे कांग्रेसी

देश में एक व्यक्ति, एक पद के फार्मूले पर चलने की तैयारी कर रही कांग्रेस के लिए छत्तीसगढ़ बड़ी चुनौती के रूप में सामने आएगा। कांग्रेस संगठन और सत्ता में करीब आधा दर्जन नेता ऐसे हैं, जो दो-दो पदों पर हैं। यही नहीं, पांच साल संगठन में रहने के बाद नेताओं की छुट्टी की भी तैयारी की गई है। अगर यह फार्मूला लागू हो जाता है कि पांच से सात नेताओं का पद चला जाएगा।

चुनाव में 50-50 फार्मूला लागू हो जाता है, तो युवाओं को चुनावी राजनीति में उतरने की उम्मीद तो जगेगी, लेकिन वर्षों से विधायक और सांसद चुने जा रहे नेताओं के पर पार्टी कितना काट पाती है, यह सबसे बड़ी चुनौती होगी। प्रदेश के एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा, कमजोर प्रदर्शन के बाद किसी विधायक का जो पार्टी टिकट नहीं काट पाती, उसके लिए इतना बड़ा परिवर्तन करना आसमान में तीर मारने जैसा है।

नेताओं को गोपनीय ताकत देती भाजपा

प्रदेश में भाजपा की राजनीति में धीरे-धीरे ही सही, अंदरखाने में बड़ा बदलाव होने वाला है। पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने सभी जिलों की समीक्षा, आकांक्षी जिलों में दौरा करने आए मंत्रियों की रिपोर्ट और केंद्रीय संगठन से मिले कार्यक्रम के आधार पर कुछ नए नेताओं को जिम्मेदारी देने का काम शुरू किया है। हालांकि यह काम चुपके-चुपके किया जा रहा है।

प्रदेश स्तर के कुछ नेताओं को अचानक दिल्ली बुलाया जाता है और गोपनीय तरीके से काम सौंपा जा रहा है। इस बीच, एक सांसद को अचानक ताकतवर बना दिया गया है। सांसद पहले प्रदेश संगठन में महामंत्री थे और प्रदेश अध्यक्ष की दौड़ में शामिल थे। उनको पूर्व सीएम के खेमे से बाहर का नेता माना जाता है। इसके साथ ही केंद्रीय संगठन ने कुछ विधायकों और पूर्व मंत्रियों को दिल्ली बुलाया और अपने-अपने क्षेत्र में काम करने का निर्देश दिया। इसका असर आने वाले समय में दिखेगा।

Posted By: Pramod Sahu

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