रायपुर। 'गाड़ीवाला आया तू कचरा निकाल।" यह गाना सुबह रायपुर के सभी मुहल्लों में गूंजता है। नगर निगम की गाड़ियां कचरा लेने के लिए दौड़ती रहती हैं। हर घर के सामने गाड़ी रुकती है और सफाईकर्मी कचरा मांगता है। लेकिन गंदगी-पसंद कुछ लोग गाड़ीवाले को कचरा न देकर सार्वजनिक स्थल पर गंदगी फेंक देते हैं। तेलीबांधा का भी यही हाल है। जहां यह कचरा बिखरा है और नंदी महाराज बैठे हैं, इसके पास ही शाम को सब्जी की दुकानें लगती हैं।

लोगों में इतनी तो जागरूकता होनी ही चाहिए कि जब गाड़ी आती है तो कचरा उसी को दें। निगम यहां से भी कचरा उठवाता है। कचरा उठाने वाले ने कहा, 'गाड़ी द्वार पर आती है, लेकिन लोग उसे कचरा नहीं देते। पढ़े-लिखे लोग भी यह गलती करते हैं। ऐसे में शहर कैसे साफ-स्वछ रहेगा? सफाई के लिए सबका सहयोग चाहिए।" ठीक बात है। लोगों को गंभीरता से विचार करना चाहिए।

पियक्कड़ों की दुनिया

सभी की अपनी दुनिया है। पियक्कड़ों की दुनिया तो निराली है। दो पियक्कड़ रायपुर की एक सड़क के फुटपाथ पर मस्त पड़े थे। तीन लोग उधर से गुजर रहे थे। पियक्कड़ों की हालत देखकर वे हंस पड़े। एक ने कहा, 'इन्हें देखो, नशे में चैन की नींद सो रहे हैं। अच्छा है कि गालियों का सस्वर पाठ नहीं कर रहे हैं, किसी को चाकू नहीं दिखा रहे हैं। नशा कुछ कम होगा तो लड़खड़ाते हुए घर की राह पकड़ लेंगे।" दूसरा बोला, 'ये यहीं झाड़ियों में बैठकर अमृत-पान किए होंगे।

मैंने कई बार शराबियों को सड़क पर शराब पीते देखा है। नशा ही अपराध की जड़ है। नशे की सामग्री पर रोक लगनी चाहिए।" तीसरे ने कहा, 'लेकिन रोक लगाए कौन? यही पियक्कड़ ही कई राजनीतिक पार्टियों के पक्के वोटर हैं। मतदान के पहले शराब बांटना अनिवार्य होता है, तभी सत्ता मिलती है। जिसने इन्हें खुश कर दिया, उसकी जय-जय।"

पुलिस सहायता केंद्र की एक झलक

बुजुर्ग रामलालजी शाम को रायपुर के एक सार्वजनिक स्थल पर बैठे हुए थे। कुछ देर में उनका अकेलापन दूर हुआ। वह भीड़ में सुपरिचित केशवजी को देखकर खुशी से उछले। आवाज देकर उन्हें बुलाया और फिर गपियाने लगे। पास में ही पुलिस सहायता केंद्र था। दो स्कूटी रांग साइड से गुजर रही थीं। एक पुलिस जवान ने अपने कर्तव्य का मुस्तैदी से निर्वहन करते हुए स्कूटी सवार चार युवकों को रोका।

रामलालजी और केशवजी आगे की कार्रवाई देखने के लिए उत्सुक हो गए। पकड़ में आए युवक संकट से उबरने के लिए आपस में गंभीर मंत्रणा करने लगे। इसके बाद पुलिस सहायता केंद्र की ओर बढ़े और एक पुलिस जवान से मिन्न्त करने लगे। पुलिस जवान ने पहले डांटा-फटकारा और फिर चुपचाप पत्रम-पुष्पम लेकर जेब में रखा और उन्हें संकट-मुक्त कर दिया। यह नजारा देखकर रामलालजी व केशवजी दिल खोलकर हंसे और फिर इस झलक पर गहन चिंतन-मनन करने लगे।

भृत्य की परीक्षा पीएससी के माध्यम से

एक सज्जन ने कुछ लोगों से योग्य और कमाऊ लड़का देखने के लिए कह रखा है। वह जल्दी से जल्दी बेटी की शादी कर देना चाहते हैं। कल रायपुर के गांधी उद्यान में उनसे एक बुजुर्ग मिले और बोले, 'एक लड़का है। वह है तो भृत्य, लेकिन उसमें कोई ऐब नहीं है।" भृत्य सुनकर सज्जन खासे नाराज हो गए। कहने लगे, 'मैंने आपसे ऐसा मजाक करने के लिए नहीं कहा था।

मैं अपनी उच्च शिक्षा प्राप्त लड़की का विवाह भृत्य से कैसे कर दूं?" इस पर बुजुर्ग बोले, 'लड़का भी उच्च शिक्षा प्राप्त है। आजकल भृत्य की नौकरी भी मुश्किल से मिलती है। इस बार भृत्य की परीक्षा पीएससी के माध्यम से हो रही है। भृत्य बनने के लिए इंजीनियरिंग किए हुए और एमए-एमएससी पास युवाओं ने भी आवेदन कर रखा है। मैं जिस लड़के की बात कर रहा हूं, उसके लिए लड़की वालों की लाइन लगी हुई है, समझे?"

Posted By: Pramod Sahu

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