रायपुर। गैर एनडीए शासित राज्यों के कई मुख्यमंत्रियों की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से हुई भेंट की जो तस्वीरें आ चुकी हैं, उनमें सामान्यत: मुख्यमंत्रियों के चेहरे भावहीन ही देखे गए थे। ऐसे अवसर पर एक राज्य की मुख्यमंत्री का तनाव भरा चेहरा भी सामने आया था। ये भी तस्वीर आई थी जिसमें एक तत्कालीन मुख्यमंत्री, पीएम के सामने पैर पर पैर चढ़ाकर बैठे हुए थे।

शनिवार को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की पीएम मोदी संग हुई भेंट की तस्वीर आई। ये तस्वीर इंटरनेट मीडिया पर बहुत तेजी से वायरल हुई। हालांकि प्रारंभ में दोनों की हंसती हुई तस्वीर को देखकर राज्य के कांग्रेसियों के साथ भाजपाई भी हड़बड़ा उठे थे।

परंतु बाद में सभी ने संतुलन साध लिया। कांग्रेसी कहने लगे- राज्य के विकास के लिए पीएम से संबंध आवश्यक है। वहीं भाजपाई कह रहे हैं कि मोदी की यही विशेषता है कि वे सबको साथ लेकर चलने में विश्वास करते हैं।

प्रशंसा सुनते ही बेसुरे हुए अधिकारी

कभी पुराने गीतों के प्रेमी रहे एक उच्चाधिकारी की सोच बदल गई है। अब वे तेज संगीत सुनने लगे हैं। गैलरी से निकलते समय यकायक अंगुलियों को घुमाकर कहते हैं-'यो यो हनी सिंग।" कार्यालय में बैठे-बैठे गाना भी गाने लग जाते हैं। उनका स्वर, डोरेमान कार्टून के जियान की तरह का है। कोई सहकर्मी काम को लेकर जाता है तो कहते हैं, रुक-रुक, पहले ये सुन...! फिर न जाने क्या-क्या जोड़कर रैप सांग सुनाने लग जाते हैं। सहकर्मी भी विवश हैं। सामने तो वाह-वाह होती है।

केबिन से बाहर निकलकर फिर उस 'वाह-वाह" की समीक्षा करते हैं। बीते महीने उन्होंने एक छोटी सी पार्टी दी। उस पार्टी में भाजपा के एक नेता ने उनके गीतों की प्रशंसा कर दी। प्रशंसा सुनते ही अधिकारी भी शुरू हो गए। फिर क्या था, पार्टी में उपस्थित दर्जनों लोग भाजपा नेता को घूरने लगे। नेता ने फिर किसी तरह अधिकारी को गाने से रोका।

बवाल होने के बाद सुधरेंगे रेलवे अधिकारी

लगता है कि रेलवे के अधिकारियों ने तय कर लिया है कि जब तक कोई बड़ा बवाल नहीं होगा, तब तक वे अपनी कार्यप्रणाली में सुधार नहीं करेंगे? इस वर्ष गर्मी आने से पहले टे्रनों को रद करने का जो क्रम इन्होंने शुरू किया था, वह क्रम अब भी जारी है। प्रथम दृष्ट्या ऐसा लगता है कि ऐसा निर्णय रेलवे बोर्ड ले रहा है। अधिकारियों की ओर से अनौपचारिक रूप से प्रचारित भी यही किया जाता है, लेकिन ये असत्य है।

पिछले महीने जब रेलवे बोर्ड के चेयरमैन विनय त्रिपाठी छत्तीसगढ़ प्रवास पर आए थे, तब रद टे्रनों को जोन अधिकारियों ने फिर से शुरू करवा दिया था। स्पष्ट है कि निर्णय लेना और उसे अस्वीकृत करना जोन अधिकारियों के हाथों में है। अधिकारी का सैलून विलंब न हो, इसके लिए यात्रियों की रेलगाड़ियों को आउटर पर खड़े कर देने वाले रेलवे अधिकारी लाखों यात्रियों को अभी रुला रहे हैं।

खोदा पहाड़, निकली चुहिया

रात के लगभग 10 बज रहे होंगे। थके-हारे पुलिस अधिकारी घर जाने की तैयारी कर रहे थे, तभी वायरलेस सेट बोला- बसंत विहार में गोली चली है! बस फिर क्या था, एसएसपी सहित अन्य अधिकारी घटनास्थल पहुंच गए। कार के भीतर गोली चलने और कार से ही घायल का अपहरण करने की जानकारी मिली। इसके बाद शहर में नाकेबंदी कर दी गई। घंटे भर तक पुलिस ने सक्रियता दिखाई। फिर कार मिला। घायल भी अस्पताल में मिल गया।

उसके दो साथी भी वही मिल गए। जब पूरी कहानी पता चली तब कई पुलिस अधिकारी इन पर भड़क गए। किस्सा कुछ ऐसा हुआ कि घायल ने कार रोककर कट्टा निकाला, लेकिन एक गड़बड़ी हो गई। उसने नशे में कट्टे को माउजर समझकर ट्रिगर खींच दिया। सीधे गोली चल गई। उसके साथी उसे चालक सीट से हटाकर पीछे की सीट पर ले गए थे। जिसने इन्हें देखा उसे लगा कि अपहरण है।

Posted By: Pramod Sahu

NaiDunia Local
NaiDunia Local
  • Font Size
  • Close