रायपुर (संदीप तिवारी)। Raipur column खारिज हुई डीईओ की दावेदारी

महासमुंद में जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) पद पर बैठी महिला शिक्षा अफसर की इस पद पर बने रहने की दावेदारी खारिज हो गई है। आइएएस मनोज कुमार पिंगुआ कमेटी में सचिव अलरमेल मंगई डी. और डीडी सिंह ने रिपोर्ट दी है कि किसी भी पद पर बने रहने के लिए पांच महीने ही नौकरी बचे रहने का आधार बताना उचित नहीं है। महिला अधिकारी के अभ्यावेदन को निरस्त कर दिया गया है। अब काइदे से यहां स्थानांतरण के बाद पदस्थ हुए दूसरे अफसर को मौका मिलना चाहिए। बताया जाता है कि इस कुर्सी पर पिछले डेढ़ साल से कई डीईओ पहुंचे मगर वह न्यायालयीन विवाद के कारण टिक नही पाए। यहां की कुर्सी का मोह किसी को छोड़ने का नाम ही नहीं ले रहा है। अब देखना यह है कि कमेटी के रिपोर्ट के आधार पर कौन-कौन अधिकारी हटाए जाएंगे और कौन अधिकारी अब अपने मूल स्थान को ग्रहण कर पाते हैं।

अफसर के इशारे पर खिसकी कुर्सी

किसी आइएएस अफसर की कुर्सी किस तरह खिसकती है यह यदि जानना हो तो छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड के पूर्व आयुक्त को नजीर के रूप में देखा जा सकता है। आयुक्त ने एक मध्यम स्तर के अधिकारी पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप के कारण उसकी अपील को निरस्त करने करके पूर्व में दी गई सजा को बरकरार रखने की कोशिश की मगर सभी एकजुट हो गए। एक अधिकारी ने उन्हें आनन-फानन में हटवा दिए। अब नए अधिकारी आए है और मध्यम स्तर के उक्त अफसर की कारगुजारियों पर पर्दा डालना शुरू कर दिए हैं। उनको डर है कि अगर वह सही तरीके से काम नहीं किए तो उन्हें भी बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा। करोड़ों के भ्रष्टाचार में फंसे मध्यम स्तर के अधिकारी की पूर्व आयुक्त तीन वेतनवृद्धि रोकी थी और नए अधिकारियों व बोर्ड के सदस्यों ने उन्हें बहाल करने के लिए एड़ी-चोटी का बल लगा दिया है।

किसके इशारे पर दबाई फाइल

महिला एवं बाल विकास विभाग और स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से प्रदेश में चल रहे बालवाड़ी केंद्रों के नौनिहालों को पोषक आहार नहीं मिल रहा है। मिड डे मील योजना के तहत 33 हजार नौनिहालों के लिए पोषक आहार देने को केंद्र ने स्वीकृति दी है। लोक शिक्षण संचालनालय ने अपनी ओर से इसके लिए फाइल सचिव को बढ़ा दी है और अब सभी हाथ पर हाथ धरे बैठे हुए हैं। इस योजना का लाभ नौनिहालों को कब मिलेगा इस प्रश्न का उत्तर भविष्य के गर्त में जा चुका है। अब देखना यह है कि कब तक महिला एवं बाल विकास के खर्च पर ये बालवाड़ी चलता रहेगा। नौनिहालों के नाम पर छह हजार से अधिक बालवाड़ी खोलने के बाद अधिकारियों का इन नौनिहालों के पोषण आहार को लेकर दिख रही उदासीनता से कई प्रश्न उत्पन्न हो रहे हैं कि आखिर किसके इशारे पर अधिकारियों ने फाइल दबा रखी है।

चर्चा में कलेक्टर की नामसमझी

अपना परफार्मेंस दिखाने के लिए कुछ कलेक्टर मनमानी आदेश निकाल देते हैं। प्रदेश के एक जिले के कलेक्टर की मनमानी इन दिनों चर्चा में है। कलेक्टर ने छोटे स्तर के अधिकारियों को उधा स्तर के पदों पर बैठे जिम्मेदारों की निगरानी करने की ड्यूटी लगा दी। कलेक्टर को लगा कि साहब शाबाशी देंगे मगर उनकी चौतरफा आलोचना शुरू हो गई। कइयों ने आपत्ति की है कि कलेक्टर का आदेश ही गलत है। स्कूल स्तर के व्याख्याताओं व शिक्षकों को कालेज के प्राध्यापकों व सहायक प्राध्यापकों के कार्यप्रणाली की जांच कराने का यह आदेश खूब प्रसारित हो रहा है और लोग इसे और प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर चिंता भी प्रकट कर रहे हैं। अब देखना यह है कि साहब के इस मनमानी आदेश के परिपालन में कितने स्कूली शिक्षक अब कालेजों में निरीक्षण कर पाते हैं और कितनों पर कार्रवाई हो पाता है अभी तो यह खानापूर्ति ही लग रहा है।

Posted By: Vinita Sinha

NaiDunia Local
NaiDunia Local
  • Font Size
  • Close