रायपुर। कलाकारों को आगे बढ़ाने वाला संस्कृति विभाग अक्सर विवादों में रहता है। कलाकार हमेशा कोसते रहते हैं कि विभाग के अधिकारी अपनी मनमानी चलाते हैं। किसी की नहीं सुनते। शिकायत मंत्री तक पहुंची तो उन्होंने सोचा कि शिकायतें तो होती रहती हैं, सो किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की गई। एक वाक्या ऐसा हुआ कि अधिकारी ने एक आयोजन में मंत्री और बड़े अधिकारियों की भी नहीं सुनी और उन पर थोपे गए कार्य करने से मना कर दिया।

अब भला बड़े अधिकारी, मंत्री की बात को कनिष्ठ अधिकारी मना कर दे तो क्या होगा? अनुशासन तोड़ने की सजा के रूप मेें अधिकारी को निलंबित कर दिया गया। इससे पीड़ित लोग बहुत खुश हो गए। लेकिन उनकी यह खुशी ज्यादा दिन टिक नहीं पाई, क्योंकि अभी भी कई अधिकारी हैं जो उनकी नहीं सुनते। अब उन्हें लग रहा है कि दो-चार और पर गाज गिरे, तब कहीं जाकर राहत मिलेगी।

स्थानांतरण का गम

बच्चों के पालन-पोषण और महिलाओं को विविध योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग के एक अधिकारी हमेशा सजग रहते थे। महिला स्व सहायता समूह के माध्यम से जैसे ही पता चलता कि फलां महिला को योजनाओं से मदद दिलाने की जरूरत है, तुरंत आदेश कर देते थे। अधिकारी के इस व्यवहार से ज्यादातर लोग खुश थे, लेकिन कुछ को हमेशा नाराजगी रहती थी, क्योंकि उनकी ऊपरी कमाई पर असर पड़ रहा था। आये दिन शिकायत की जाती थी कि अधिकारी लंबे समय से एक ही जगह जमे हैं।

पिछले दिनों उनका तबादला हो गया। यह सुनकर महिला स्व सहायता समूह की महिलाएं जहां दुखी हो गईं, वहीं वे लोग बड़े खुश थे, जिनकी कमाई उनके रहते नहीं हो पा रही थी। ऐसे लोग विभाग से कुछ दूर चाय की दुकान पर खुशियां मनाते हुए कह रहे थे, अब जाकर उन्हें कमाने का मौका मिला है।

महिला आयोग अध्यक्ष के तेवर के चर्चे

आजकल ज्यादातर सरकारी विभाग में कार्यरत महिलाओं के बीच यह चर्चा आम है कि महिलाओं को अब डरने की जरूरत नहीं है। यदि कोई बड़ा अधिकारी या उनका सहकर्मी अभद्र व्यवहार करे तो सीधे महिला आयोग अध्यक्ष से शिकायत कर उसकी हेकड़ी खत्म कर दी जाए। पिछले महीनों में कई महिलाओं ने अपनी विपदा महिला आयोग अध्यक्ष को सुनाई और बाकायदा उन्हें न्याय मिला। वहीं अधिकारी, सहकर्मियों को फटकार मिली।

अध्यक्ष के तेवर के चर्चे हर विभाग में गूंज रहे हैं। अब किसी की हिम्मत नहीं होती कि वे महिला सहकर्मियों को तंग करें। शहर के एक बड़े डाक्टर और शिक्षा अधिकारी का उदाहरण देकर महिलाएं कहतीं हैं कि ऐसे लोगों की अक्ल ठिकाने लगाकर महिला आयोग ने महिलाओं को नई राह दिखाई है। इससे पहले भी महिला आयोग था, लेकिन महिलाएं शिकायत दर्ज कराने से हिचकती थीं। अब दोगुने उत्साह से महिलाएं अत्याचार के खिलाफ खड़ी हो रही हैं।

डर से आई जागरूकता

कोरोना महामारी ने दो साल में समाज को हिलाकर रख दिया है। कई नौजवानों को हमेशा के लिए खोने से लोग इतने डर गए हैं कि छींक भी आ जाए तो वे डाक्टर के पास दौड़ पड़ते हैं। एक समाज में तो इतनी जागरूकता आ गई है कि हर घर में बाहर से कौन आया या कौन बाहर गया, इसकी जानकारी रखने को कहा जा रहा है। इसका उद्देश्य यह है कि समय रहते संक्रमण का पता चल जाए।

शादी वाले परिवारों में कहा जा रहा है कि वे पूरे समाज को न्योता न दें। चंद रिश्तेदारों से ही आयोजन निपटा लें। कोरोनाकाल में न्योता नहीं देने से कोई बुरा भी नहीं मानेगा। जब समाज को ही कोई शिकायत नहीं रहेगी तो समझो चिंता ही खत्म हो जाएगी। यही वजह है कि लोग परिवार के लिए समारोह आयोजित कर रहे हैं, जिससे फिजूल खर्च रुके और खतरा भी न हो।

Posted By: Kadir Khan

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