रायपुर। फर्जी और झूठे प्रमाणपत्रों के सहारे नौकरी कर रहे लोगों के सिंहासन अभी तक नहीं डगमगा पाए हैं। राज्य सरकार ने सख्त निर्देश दिया था कि जो लोग फर्जी जाति, आय या अन्य प्रमाणपत्रों के जरिए नौकरी कर रहे हैं उन पर कार्रवाई करें। खासकर अनुसूचित जाति एवं जनजाति के नाम पर फर्जी प्रमाणपत्र बनाकर उनका हक छीनने वालों पर कार्रवाई की दरकार थी लेकिन यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया है।

चर्चा है कि पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में इस मामले में कुछ कर्मचारी और शिक्षक जांच के दायरे में हैं और उन्होंने अभी तक अपनी जाति को लेकर पुख्ता प्रमाणपत्र प्रस्तुत नहीं किए हैं। इन पर विश्वविद्यालय प्रशासन को कार्रवाई करनी है। इनमें कुछ ऐसे भी हैं जो कि विश्वविद्यालय में अहम कड़ी बनकर काम भी कर रहे हैं। ऐसे लोगों पर कार्रवाई किस तरह की जाती है यह देखने की बात होगी। फिलहाल फर्जी जाति का जिंद एक बार फिर निकल आया है।

हमारा भुगतान करो साहब

केंद्र सरकार ने प्रदेशभर में डीएलएड कोर्स उन शिक्षकों के लिए करवाया था जो कि अप्रशिक्षित हैं। इसके लिए शिक्षकों से फीस भी ली थी। डीएलएड कोर्स के संचालन व परीक्षा कराने की जिम्मेदारी प्रदेश के शिक्षकों को दी गई थी इसके बदले ड्यूटी करने वाले शिक्षकों को मेहनताना मिलना था लेकिन यह आज तक नहीं मिल पाया है। वैसे तो यह कार्यक्रम नेशनल इंस्टीट्यूट आफ ओपन स्कूलिंग की ओर से आयोजित था पर इसके लिए राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद को राज्य में नोडल बनाया गया था।

परिषद के अधिकारियों को डीएलएड का संचालन करने वाले कर्मियों को उनका मेहनताना देना है। 16 करोड़ रुपये से अधिक मेहनताना बाकी है पर यहां के साहब हिसाब ही नहीं करना चाहते हैं। इसलिए डीएलएड के लिए ड्यूटी करने वाले शिक्षकों को अपने मेहनताना के लिए परीक्षा केंद्रों के समन्वयकों के आगे-पीछे चक्कर लगाने की मजबूरी हो गई है।

संयुक्त संचालक से दूर वोकेशनल कोर्स

कहने के लिए प्रदेश के हर स्कूलों में रोजगान्मुखी कोर्स को संचालित करने के लिए अमला काम कर रहा है लेकिन विभाग में अंदरूनी रूप से सब कुछ ठीक-ठाक नहीं है। समग्र शिक्षा की ओर से छत्तीसगढ़ में वोकेशनल (व्यावसायिक पाठ्यक्रम) कोर्स संचालित है।

इस कोर्स से यहां के संयुक्त संचालक को दूर रखा गया है। उन्हें कोई प्रभार नहीं मिला है। समग्र शिक्षा की ओर से संचालित इन कोर्स के लिए छत्तीगसढ़ को केंद्र से 28 करोड़ रुपये मिलते हैं। प्रदेश में 546 स्कूलों में कक्षा नौवीं से 12वीं तक बच्चों को वोकेशनल पढ़ने के लिए विकल्प दिया जाता है, ताकि वे स्कूली शिक्षा के साथ-साथ ही स्वरोजगार या रोजगार के काबिल हो सकें। हर कक्षा में आठ ट्रेड में पढ़ाई हो रही है। विभाग में तालमेल का अभाव दिख रहा है।

साहब हुए सक्रिय

रायपुर शिक्षा संभाग के संयुक्त संचालक इन दिनों सक्रिय हो गए हैं। पिछले दिनों वह एक स्कूल में औचक निरीक्षण करने पहुंचे तो यहां की व्यवस्था देखकर दंग रह गए । प्राचार्य कोरोना पीड़ित होने के कारण घर पर मिले और यहां अन्य 19 शिक्षक-कर्मचारी नदारद रहे। ऐसे में साहब का गुस्सा सातवें आसमान तक पहुंचना स्वाभाविक था।

आमतौर पर कोरोना काल में इस तरह औचक निरीक्षण नहीं होने से कुछ स्कूलों के शिक्षक-कर्मचारी अपनी मनमर्जी से ही स्कूल पहुंचते हैं। बच्चों को अनुशासन का पाठ पढ़ाने वाले जब शिक्षक ही स्कूलों से इस तरह से नदारद मिलेंगे तो शिक्षा की दुर्गति होना लगभग तय है।

विद्यानों का मानना है कि यह पूरी तरह से स्व अनुशासन और नैतिकता का विषय है जिसका पालन करना चाहिए। शिक्षकों को अपने बच्चों की तरह स्कूल के बच्चों की भी जिम्मेदारी लेकर उनके पढ़ाने में उसी तरह की गंभीरता दिखानी चाहिए जिस तरह वह अपने बच्चों के लिए हमेशा सचेत व सजग दिखते हैं।

Posted By: Kadir Khan

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