रायपुर। कोरोना संक्रमण काल में एक बार फिर कांटेक्ट ट्रेसिंग के लिए अधिकारियों-कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। इनमें से कुछ साहबान ऐसे हैं, जो ड्यूटी नहीं करना चाहते। जब उनकी ड्यूटी लगाई जाती है तो वे किसी-न-किसी बहाने खुद को किनारे कर लेते हैं। कलेक्टर ने ऐसे लोगों पर सख्ती दिखाई है। ड्यूटी पर नहीं आने के कारण कुछ कर्मचारियों को नोटिस थमाया गया है। अब तरह-तरह के बहाने सामने आ रहे हैं।

चर्चा है कि कलेक्टर ने इस मामले को बहुत गंभीरता से लिया है और लापरवाही करने वालों को जल्द ही कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। कुछ लोगों ने बचने के लिए एप्रोच लगानी शुरू की है, लेकिन इन सिफारिश्ाों को भी प्रशासनिक अधिकारियों ने सुनना बंद कर दिया है। अब देखना यह है कि ये लोग कब तक ऐसे ही अपने कर्तव्य से मुंह छुपाते हुए बचते फिरते रहेंगे और इन पर क्या कार्रवाई की जाती है?

हमें अपना आदमी चाहिए

खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की जिला स्तर पर कुछ ऐसी जगहें हैं, जहां पर एक अधिकारी अपने लोगों को बैठाने के लिए काम कर रहे हैं। इनमें तिल्दा, मंदिर हसौद, धरसींवा और टाटीबंध क्षेत्र में जल्द ही निचले स्तर के अधिकारियों का बदलाव संभव है। इन चारों क्षेत्रों में पिछले कई सालों से ऐसे लोगों को बैठाया जा रहा है, जो यहां के अधिकारियों के सबसे करीबी होते हैं।

बता दें कि कुछ इलाकों में राशन दुकान न खोलने की भी शिकायतें हैं। कुछ दुकानदार मनमर्जी से ही दुकान खोलते हैं और जब चाहे बंद कर देते हैं। इससे आम आदमी को परेशानी उठानी पड़ रही है। हालांकि इस मामले की शिकायतें कई बार की जा चुकी हैं। अब देखना यह है कि अधिकारी इन शिकायतों को कितनी गंभीरता से लेते हैं और कितनी कार्रवाई करते हैं। फिलहाल इंतजार है प्रशासन की ओर से जारी होने वाली तबादला सूची का।

नए कुलपति का इंतजार

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के लिए नया कुलपति बनाने की एक बार फिर प्रक्रिया शुरू हो गई है। चर्चा है कि कुलाधिपति ने एक बार फिर कुलपति चयन के लिए कमेटी गठित कर दी है। विश्वविद्यालय से ही कई वरिष्ठ प्रोफेसर कुलपति बनने की कतार में शामिल हैं। कई वरिष्ठ प्रोफेसर कुलपति बनने के लिए योग्य और प्रबल दावेदार हैं। चर्चा है कि कहीं एक बार फिर राज्य के बाहर के किसी व्यक्ति को कुलपति न बना दिया जाए।

हालांकि कुलपति बनाने की संपूर्ण शक्ति राज्यपाल में निहित है। फिलहाल तमाम लोगों को नए कुलपति के चेहरे का इंतजार है और ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि जल्द से जल्द लोगों के सामने विश्वविद्यालय के नए कुलपति होंगे। बता दें कि वर्तमान में यहां पर कार्यवाहक कुलपति पूरा कार्यभार संभाल रहे हैं। पूर्णकालिक कुलपति की नियुक्ति की प्रक्रिया में देरी होने के कारण ऐसी परिस्थितियां निर्मित हो गई हैं।

नवा जतन ने दिलाई पहचान

यह बात छत्तीसगढ़ के लिए बहुत ही बेहतर है कि यहां सरकार कोरोनावायरस से प्रभावित बच्चों की पढ़ाई में हुए नुकसान के लिए उपचार में जुटी हुई है। पिछले दिनों राज्य शैक्षणिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) की तारीफ केंद्र में बैठे राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) के अधिकारियों ने भी की। इसमें छत्तीसगढ़ समेत गुजरात और मध्य प्रदेश जैसे प्रमुख राज्यों के प्रतिनिधि भी जुड़े थे।

बता दें कि उपचारात्मक शिक्षण के लिए छत्तीसगढ़ में नवा जतन कार्यक्रम के तहत ऐसे बच्चे,जो कोरोनाकाल में कक्षा स्तर से पीछे रह गए है, उन्हें अगली कक्षा के स्तर तक लाने का प्रयास किया जा रहा है। सेतु पाठ्यक्रम एक के लागू होने के पूर्व जो बच्चे अपने ग्रेड से नीचे थे,अब हमारा लक्ष्य है कि मार्च तक उन्हें कक्षा के स्तर तक लाया जाए। ऐसे में अधिकारियों में उत्साह है कि अच्छा काम हमेशा सराहनीय होता है।

Posted By: Kadir Khan

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