रायपुर। पहले लगा कि साहब ने राजधानी में पहली बार कमान संभाली है, इसलिए कुछ ज्यादा ही गर्म हैं। समय के साथ तेवर ठंडे पड़ जाएंगे। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। मौसम दिन-ब-दिन ठंडा होता जा रहा है, लेकिन साहब का तेवर तो जैसे ठंडा होने का नाम ही नहीं ले रहा है। यहां हम बात कर रहे हैं राजधानी के एसएसपी साहब की।

कुछ माह पहले ही वे रायपुर में एसपी बनकर आए। इसके बाद यहां एसएसपी का तमगा लग गया। उन्होंने आते ही नशा, सट्टा सहित अन्य अवैध कामों में लिप्त लोगों पर नकेल कसने के सख्त निर्देश दे दिए। बस फिर क्या था, ताबड़तोड़ कार्रवाइयां हुईं।

इतना ही नहीं, ऐसे थाना प्रभारियों का भी उन्होंने तुरंत तबादला कर दिया, जिनके इलाके में काले कारोबार फल-फूल रहे थे। वैसे अब ठंड का मौसम ज्यादा दिन नहीं बचा है, यह सोचकर बचे थाना प्रभारी फिलहाल थोड़ी राहत महसूस कर सकते हैं।

एक सवाल से भतीजे के तेवर उड़न छू

एसपी साहब भले ही इस दुनिया में अब नहीं हैं, लेकिन उनके भतीजे के तेवर कम नहीं हो रहे हैं। वह अपनी कार में सायरन और पुलिस का बोर्ड लगाकर दबंगई दिखा रहा है। दरअसल, शहर के कटोरा तालाब स्थित एक चाय दुकान में वह चाय की चुस्की ले रहा था। गाड़ी सड़क पर खड़ी थी।

इसी दौरान एक पुलिस वाले भाई साहब बिना वर्दी के अपनी बाइक से वहां चाय पीने को पहुंच गए। चाय पीकर निकलते समय गाड़ी हटाने को लेकर भतीजे की उस पुलिस जवान से बहस हो गई। बस फिर क्या था। भतीजा तेवर में आ गया और बोला, जानते नहीं हो। मैं एसपी का भतीजा हूं।

जवान ने साहब का नाम पूछा। भतीजे ने जैसे ही बताया, जवान चौंक गया। तुरंत पूछा, कहां हैं साहब। मैं उनसे मिलकर तुम्हारी शिकायत करूंगा। बस फिर क्या था, भतीजा कार में बैठा और सायरन चालू कर निकल गया।

बागियों को रास्ते से हटाने का खेल

जिला पुलिस में एक बार फिर से भीतर की राजनीति शुरू हो गई है। वरिष्ठ अधिकारियों की कार्यप्रणाली से नाराज होकर अधीनस्थ कर्मचारियों ने आला अधिकारियों को शिकायत की। कुछ नहीं हुआ तो जुगाड़ लगाकर उन्हें रास्ते से हटाने का खेल शुरू हो गया।

हुआ यूं कि पिछले कुछ महीने से जिले के चार से पांच थानों में निरीक्षक और सब इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी की जम नहीं रही थी। हिसाब-किताब से लेकर हर मामले में विवाद की स्थिति पैदा हो रही थी। वरिष्ठ अधिकारियों को भी खबरी जानकारी तो दे देते थे, लेकिन अफसर हैं कि शिकायत का इंतजार करते रहते हैं।

अधिकारियों ने जब मामले को संज्ञान नहीं लिया, तो निरीक्षक ने पहुंच का सहारा लेकर बागी सब इंस्पेक्टरों को थाने से बाहर का रास्ता दिखा दिया। अब देखना यह है कि बागी सब इंस्पेक्टर जहां पहुंचे हैं, वहां उन्हें किस तरह की स्थिति से दो-चार होना पड़ेगा।

कुबेर खिसक रहा, खजाना कैसे भरेगा

चौराहे के पास स्थित थाने का अघोषित कुबेर इन दिनों खिसकने की फिराक में घूम रहा है। उसके जाने की चिंता जितनी साहब को है, उतनी ही वहां के स्टाफ को भी। खबरनवीस की मानें तो पश्चिम इलाके में अवैध कारोबार करके थानेदारों का चहेता बना यह कुबेर अब ग्रामीण इलाकों की तरफ रुख कर रहा है।

उसके ऐसा करने का प्रमुख कारण पुराने साहब का प्रेम बताया जा रहा है। पुराने साहब जब तक पश्चिम में पदस्थ थे, तब तक इस अवैध कारोबारी की थाना परिसर के अंदर और बाहर खूब तूती बोलती थी। नए साहब ने संरक्षण दिया है, लेकिन लगाम टाइट रखी है।

इसकी वजह से यह कुबेर साहब का इलाका छोड़कर नया आशियाना बनाने की ओर है। वैसे कहा जाता है कि यह अकेले ही शहर से पलायन नहीं करेगा। इसके कई गुर्गे भी साथ जाएंगे, क्योंकि आखिर वहां भी तो उसे अंधेरा कायम रखना है।

Posted By: Kadir Khan

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