रायपुर। रायपुर के एक थाने में पदस्थ महिला अधिकारी को अपनी वर्दी का रौब इस कदर था कि खुद को थानेदार से कम नहीं समझती थी। थानेदार जब भी बाहर जाते तो उक्त महिला अधिकारी को प्रभार मिल जाता है। वह अपने प्रभार के दिनों में इलाके में सिंघम बनकर घूमती और थाना प्रभारी के करीबियों पर भी कार्रवाई करने से नहीं चूकती। पिछले दिनों महिला अधिकारी को वर्दी का रौब दिखाना भारी पड़ गया।

वर्दी की गर्मी में वह एक साथी कर्मचारियों के स्वजन के पास पहुंची और कार्रवाई करने की धमकी देने लगी। एक स्वजन का तो सड़क पर हाथ पकड़ लिया और जबरन गाड़ी में बिठाने लगी। वह महिला अधिकारी इस बदतमीजी पर नाराज हो गए और बीच सड़क पर गिराकर हाथ साफ किए। इस दौरान महिला अधिकारी के साथ मौजूद कर्मचारी और भीड़ भी नहीं बचा सकी। महिला अधिकारी द्वारा काफी हाथ-पांव मारने के बावजूद दर्जनों स्वजन ने हाथ साफ कर लिया।

अपना समय आएगा

राज्य में सब इंस्पेक्टर से इंस्पेक्टर बनने की राह देख रहे कई पुलिसकर्मी इन दिनों अपनी पदोन्न्ति की घड़ियां गिन रहे हैं। राजधानी में पदस्थ सब इंस्पेक्टरों की तो भरमार है। 2013 बैच केकई सब इंस्पेक्टर पदोन्न्ति की प्रतिक्षा में है। उनका कहना है कि एक दिन जब अपना समय भी आएगा, तब बताएंगे कि थानेदारी किस तरह चलाई जाती है। दरअसल, विभागीय हिसाब को लेकर पिछले दिनों एक सब इंस्पेक्टर और थाना प्रभारी आमने-सामने आ गए।

उस समय सब इंस्पेक्टर की मांग गलत नहीं थी, लेकिन थाना प्रभारी की ओहदा देखकर वह अपना पक्ष नहीं रख पाया। थाना प्रभारी ने अन्य कर्मचारियों केसामने ही सब इंस्पेक्टर को जमकर खरी-खोटी सुना दी। साथ ही अपने हिसाब में रहने केलिए कहा। थानेदार केइस बर्ताव से दुखी होकर सब इंस्पेक्टर अपने करीबियों को बोलता फिर रहा है कि समय बडा बलवान है। एक दिन अपना समय आएगा, तब हिसाब-किताब बराबर हो जाएगा।

तीन बजे के बाद सुनेंगे फरियाद

राजधानी केकुछ थानों में पीड़ितों को पुलिसकर्मियों से अक्सर यह सुनने को मिलता है कि साहब नहीं है। तीन बजे के बाद आओ तबइंसाफ मिलेगा। साहब कहां रहते हैं,यह पड़ताल कि गई तो पता चला कि थानेदार साहब तीन बजे के बाद ही पहुंचते हैं। थाना की फाइल में सील तो उनकी लगती है, लेकिन ड्यूटी में मौजूद कोई भी कर्मचारी उनका हस्ताक्षर करकेखानापूर्ति कर देता है। थानेदार की करतूत वरिष्ठ अधिकारियों को पता चल गई। दो दिन पहले उक्त थाने केइलाके मेंएक बड़ी घटना घट गई। थानेदार ने उसे हल्के में लिया और अपने मातहत को बोल दिया अपने स्तर पर देख लो। जब पूछा गया तो जवाब मिला कि साहब तीन के बाद मिलते हैं। तभी वरिष्ठ अधिकारी काल आया तो थानेदार साहब 10 मिनट में अपनी कुर्सी पर दिखे। अब देखना यह है कि पुलिस महकमे केअधिकारी थाना प्रभारी की इस लापरवाही को आगे किस तरह नियंत्रित करेंगे।

पांडेय जी निकाल रहे भड़ास

पुलिस अधिकारियों केसाथ बैठकर अधीनस्थ कर्मियों पर रंगदारी दिखाने वाले पांडेय जी इन दिनों लूपलाइन में हैं। इसके कारण्ा कल तकजो पुलिस अधिकारी पांडेय जी को सम्मान दिया करते थे, अब उनको आता देख व्यस्त होने का उपक्रम करने लगते हैं। अगर वह सामने आ ही जाएं तो काम से जाने की बात कहकर बाहर निकल जाते हैं। पांडेय जी भी अधिकारियों केइस पैतरे को अच्छे से जानते हैं। अब वह हर जगह भड़ास निकालते नजर आते हैं। अधीनस्थ पुलिसकर्मियों केसाथ खड़े होकर चुगली करते हैं। कभी पांडेय जी का दौर था।

लंबे समय तक उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करकेशौक पूरा किया। दूसरे जिले से ट्रांसफर लेकर आए युवाओं ने अच्छा प्रदर्शन किया और पांडेय जी की कुर्सी पर कब्जा कर लिया। युवाओं को देखकर पांडेय जी अब हर जगह बुराई कर रहे हैं। अपनी थानेदारी की खुद ही बड़ाई करकेयुवा थानेदार को नीचा दिखाने में लगे रहते हैं।

Posted By: Sanjay Srivastava

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