रायपुर। छत्‍तीसगढ़ में कोरोना महामारी को देखते हुए प्रशासन ने निर्देश दिए हैं कि आनलाइन प्रशिक्षण करवाएं जाएं। इसके विपरीतजिला स्वास्थ्य विभाग में आफलाइन प्रशिक्षण जोर दिया जा रहा है, ताकि बजट खत्म करने का खेल किया जा सके। प्रशिक्षण के नाम सैकड़ों चिकित्सकों, नर्सिंग और स्वास्थ्यकर्मियों को इससे बुलाया जा रहा कि इसकेनाम से मोटी रकम खर्च में दिखाया जा सके।

विभाग में बात को लेकर खासी चर्चा है कि साल का सरकारी बजट खत्म कर भारी-भरकम रुपये वारे-न्यारे करने के लिएसारे नोडल अधिकारी एक हो गए हैं। मगर कई चिकित्सक और स्वास्थ्य कर्मी प्रशिक्षण को लेकर नाराज हो गए, क्योंकि बजट खाने में लगे अधिकारियों उनके लिए खाने-पीने तक का प्रबंध नहीं किया।

एक चिकित्सक ने तो स्वास्थ्य विभाग के इंटरनेट मीडिया ग्रुप पर संदेश डालकर अपनी भड़ास भी निकाल दी। वहीं एक कर्मचारी का दावा है कि प्रशिक्षण केनाम पर विभाग में फर्जी बिल बनाकर बड़े अधिकारी लाखों रुपये बना रहे हैं।

ड्यूटी को लेकर असंतुष्ट आरएमए

स्वास्थ्य विभाग और शासकीय अस्पतालों में ड्यूटी लगाने को लेकर असंतुष्ट होने की बातें लगातार सामने आती रहती है। हाल ही में हाट बाजार क्लीनिक में ग्रामीण चिकित्सा सहायकों (आरएमए) की ड्यूटी को लेकर विरोध का मुद्दा गरमाया हुआ है। कुछ आरएमए इसका विरोध इसलिए कर रहे हैं।

उनका तर्क है कि मेडिकल अफसर होते हुए भी उन्हें ड्यूटी न देकर उनके बदले ग्रामीण चिकित्सा सहायकों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है। इस पर कुछ आरएमए मुख्य जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी केपास पहुंचकर मेडिकल आफिसरों की ड्यूटी भी लगाने की मांग की।

मगर अधिकारियों ने डाक्टरों की कमी बताकर व्यवस्था के तहत ही ड्यूटी लगाए जाने की बात कही दी। कई तो आरएमए कलेक्टर तक पहुंचे और इस स्थिति की शिकायत करते हुए न्याय की मांग करने लगे, लेकिन अभी तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो पाई है। इनमें अब विभाग के अधिकारी के लिए नाराजगी भी देखी जा रही।

मेडिकल पीजी सीटों पर टेढ़ी नजर

मेडिकल स्नातकोत्तर में दाखिले केलिए काउंसिलिंग की प्रकिया चल रही है। मगर चिकित्सा शिक्षा से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी की नजर मेडिकल के उन पीजी सीटों पर हैं, जिनकी मांग अधिक है। आल इंडिया कोटे की सीटों में बदलाव नहीं किए जा सकते हैं।

लिहाजा राज्य कोटे की पीजी सीटों को आरक्षण के आधार पर हेर-फेर करने की जुगत में हैं, ताकि संबंधित अधिकारी के करीबियों को अच्छी क्लीनिकल सीट मिल सके। इस बात की सुगबुगाहट मिली तो कुछ अधिकारी इसे लेकर विरोध की मुद्रा में आ गए।

मगर समस्या यह है कि सीधे विरोध कर व्यवस्था के आड़े नहीं आना चाहते हैं। हालांकि कई अधिकारियों और छात्रों के सामने चिट निकालकर आरक्षण के आधार पर सीटों के आवंटन की प्रक्रिया पारदर्शी बनाने का पूरा प्रदर्शन किया गया। यह प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है। फिर अपनों को बेहतर स्थान दिलाने की लालसा के कारण मेडिकल पीजी सीटों पर टेढ़ी नजर गड़ाकर बैठे हुए हैं।

ड्यूटी छोड़ धरना, अब चाहिए वेतन

कुछ दिन पहले राजधानी के एक शासकीय मेडिकल कालेज के जूनियर डाक्टर मांगों के समर्थन में धरने पर बैठे थे। इस दौरान उन्होंने प्रदर्शन में शामिल रहने के लिए अस्पताल में अपनी ड्यूटी तक पहीं निभाई। अब धरना खत्म हो गया तो उन्हीं डाक्टरों को वेतन कटौती से जूझना पड़ रहा है।

हुआ यूं कि कालेज केकई विभागों ने डाक्टरों की अनुपस्थिति केदिनों केवेतन काट लिए। कुछ विभागों केविभागाध्यक्षों ने तो उन दिनों की फर्जी उपस्थिति दिखाकर उनको पूरा वेतन दिलवा दिया। अब जिनके वेतन कट गए हैं, वह लगातार अपने विभागाध्यक्षों पर दबाव बना रहे हैं कि उनकी अनुपस्थिति को उपस्थिति दिखाकर पूरा वेतन दिलवाने की व्यवस्था करें।

मांग लेकर पहुंचे ऐसे डाक्टर को एक विभागाध्यक्ष ने गलत काम कर अपनी कलम ना फंसाने की बात कहते हुए उन्हें फटकार तक लगा दी। इसको लेकर उक्त कालेज में चर्चा है कि यह तो अच्छा है कि ड्यूटी से गायब रहो और वेतन पूरा मिले।

Posted By: Kadir Khan

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