रायपुर। शहरी सरकार पर विपक्ष हमला करने से पीछे नहीं हट रहा है। इस बार अवैध निर्माण, स्मार्ट पोल के नाम पर पैसे की बर्बादी और अमृत मिशन के काम में लेटलतीफी के विरोध में भाजपा पार्षदों ने मुख्यालय भवन के सामने विरोध प्रदर्शन कर महापौर पर गंभीर आरोप लगाए व नारेबाजी की। जब भाजपाई चले गए, तब महापौर मुख्यालय पहुंचे। मुख्य द्वार के सामने पानी पाउच बिखरे थे, जिन्हें उठाकर डस्टबिन में डाला।

स्वच्छता की अनदेखी करने पर महापौर ने आईना दिखाया। इस पर नेता प्रतिपक्ष मीनल चौबे ने फोटो जारी कर स्तरहीन राजनीति करने के आरोप लगाए और संदेह जताया कि कहीं महापौर ने ही खुद पाउच लाकर फोटो खिंचवाई हो। कूड़े पर निगम की सियासत इस तरह गरमाई कि पक्ष-विपक्ष को सफाई देनी पड़ी। एक वरिष्ठ नेता ने यहां तक कह दिया कि यह सब दिखावा मात्र है। देखना है कि सियासत आगे क्या रंग लाती है।

अगला डीआइजी कौन?

जेल मुख्यालय में लंबे समय तक एकतरफा डीआइजी और रायपुर सेंट्रल जेल का पदभार संभालते आ रहे डीआइजी केके गुप्ता की विदाई हो गई। अब यह पद खाली पड़ा हुआ है। अगला डीआइजी कौन होगा, तय नहीं है। सूत्र बताते है कि किसी सीनियर अधिकारी को इस पद पर बैठाने की कवायद चल रही है। बिलासपुर सेंट्रल जेल अधीक्षक शेखर सिंह तिग्गा और दुर्ग जेल के अधीक्षक योगेश छत्री की गिनती सीनियर अधिकारियों में की जाती है।

योगेश दुर्ग के साथ रायपुर जेल का भी अतिरिक्त प्रभार देख रहे हैं। दोनों में से किसी एक को मुख्यालय में बैठाया जाता है तो बिलासपुर, दुर्ग के साथ रायपुर जेल अधीक्षक का पद खाली हो जाएगा। या फिर केके गुप्ता का फार्मूला अपनाकर डीआइजी को ही रायपुर जेल का प्रभार दिया जा सकता है। 30 जून को अंबिकापुर जेल अधीक्षक राजेंद्र गायकवाड़ के सेवानिवृत्त होने से यहां भी नई पदस्थापना करनी होगी।

खाली कुर्सियां दे रहीं गुटबाजी का संकेत

सूबे में डेढ़ साल बाद विधानसभा चुनाव होने हैं, सो सत्तापक्ष के साथ विपक्ष भी पकड़ मजबूत करने की कवायद में जुटा है। एक पार्टी के कार्यकर्ता अब कार्यक्रमों से बोर होने लगे हंै। इसका उदाहरण कार्यक्रमों में भीड़ कम दिखाई देनी है। इनडोर स्टेडियम में हुए एक कार्यक्रम में खाली कुर्सियां इस बात की संकेत दे रही हंै कि पार्टी में गुटबाजी चरम पर है।

सब अपने-अपने नेताओं के आगे-पीछे चल रहे हैं। सत्तापक्ष के खिलाफ धरना, आंदोलनों से उन्हें कोई लेना-देना नहीं है। यह हाल रायपुर में ही नहीं, पूरे प्रदेश में है। कहीं भी जैसी भीड़ होनी चाहिए, वैसी नहीं जुटती है। गिर रही शाख से चिंतित एक पुराने नेता ने कहा कि गुटबाजी ने ही सब कुछ गड़बड़ किया है। दिल्ली से प्रदेश इकाई को कार्यक्रम मिलते है। प्रदेश इकाई नीचे की ओर कार्यक्रमों को सरका दे रही है और इस तरह खानापूर्ति चल रही है।

नेताजी की छत्र छाया में सब जायज

शहर के आउटर ही नहीं, भीतरी इलाके की सरकारी जमीन पर कब्जे की होड़-सी मची हुई है। जहां खाली बेशकीमती जमीन दिखी, वहीं कब्जा कर रातोरात निर्माण कार्य करने से रसूखदार पीछे नहीं हट रहे हैं। राजधानी के बोरियाखुर्द, डूंडा, गोकुलनगर, कोटा, फाफाडीह आदि जगहों में कब्जाधारियों के बुलंद हौसले ने सभी को चौंका दिया है। फाफाडीह, कोटा में तो एक रसूखदार ने नेताजी की छत्र-छाया में कई एकड़ जमीन कब्जाकर निर्माण कार्य तक शुरू करा दिया है।

प्रशासन से शिकायत हुई, लेकिन कार्रवाई की फाइल दब गई। चर्चा है कि इसके एवज में दो नेताजी के बीच एक-एक करोड़ की डील हुई है। पैसे मिलने के बाद ही रसूखदार को निर्माण करने की मौन स्वीकृति मिल गई। नगर निगम के अफसरों, जनप्रतिनिधियों तक इसकी शिकायत पहुंची है, लेकिन नेताजी के आगे सभी बेबस और लाचार हैं। यह मामला श्ाहर की चौपालों, गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

Posted By: Pramod Sahu

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