रायपुर। राजद्रोह और आय से अधिक संपत्ति के मामले में रायपुर सेंट्रल जेल में बंद निलंबित आइपीएस जीपी सिंह ने छह दिन के पुलिस रिमांड में भले ही आर्थिक अपराध शाखा की टीम के सामने मुंह न खोला हो, लेकिन जेल के विशेष सेल में एक बड़े अधिकारी के साथ उनकी गुफ्तगू चर्चा का विषय बनी हुई है। जेल के जानकार सूत्र बताते हैं कि आधे घंटे की यह मुलाकात काफी अहम थी।

अधिकारी ने विशेष सेल में जाने से पहले मातहतों को बाहर ही रहने का आदेश दिया था। बातचीत के बहाने जीपी से वह राज जानने की कोशिश की, जिसे न बताने की सजा उन्हें भुगतनी पड़ रही है। छनकर आई खबरों की मानें तो काफी कोशिशों के बाद भी जीपी ने इस अधिकारी के सामने राज नहीं खोला। निराश अधिकारी जब लौटने लगे तो जीपी ने कहा- ईश्वर के घर देर है, अंधेर नहीं। समय का इंतजार करिए।

अवैध कमाई की लालच में कूदे सभी

भाठागांव अंतरराज्यीय बस टर्मिनल इन दिनों अवैध कमाई का अड्डा बना हुआ है। शहर के पुराने हिस्ट्रीशीटर भी यहां अपना अवैध कारोबार फैलाने की कोशिश में लगे हुए हैं। हों भी क्यों न, आखिर बिना लागत के रोज 50 हजार से एक लाख रुपये की कमाई जो हो रही है। दरअसल, एक डीएसपी के भाई ने यहां अपना ठीहा जमा लिया है। इसे एक बस आपरेटर चला रहा है। उसी की दिमाग से कमाई करने का सारा खेल चल रहा है।

दूसरे राज्यों के बस आपरेटरों को फोन पर धमकाने के साथ ही उनके कर्मचारियों से मारपीट कर बस की बुकिंग कराई जा रही है। डीएसपी के भाई ने सैकड़ों बसों की बुकिंग का काम पांच से दस फीसद कमीशन पर हासिल भी कर लिया है। बस अड्डे की दुकानों पर भी काबिज होने की कोशिश चल रही है। वहीं, सब कुछ जानकर भी निगम-जिला प्रशासन के अधिकारी मौन हैं।

क्रेडिट कार्ड के नाम पर लूट

बैंकों में भी अब ठगी होने लगी है। दरअसल, बैंककर्मी ग्राहकों को सालाना न्यूनतम तीन से पांच सौ रुपये चार्ज का झांसा देकर क्रेडिट कार्ड थमा देते हैं। कार्ड से आप शापिंग करते हैं, तब तो ठीक। अगर नहीं करते हैं तो सावधान रहने की जरूरत है। कार्ड का इस्तेमाल नहीं करने पर भी मेंटेनेंस चार्ज के साथ बीमा, जीएसटी व अन्य फीस बताकर आपके खाते से पांच से दस हजार रुपये तक काट ले रहे हैं।

एक बड़े बैंक के शहर के हृदयस्थल में स्थित मुख्यालय में इस तरह की शिकायत लेकर रोजाना 20 से 25 ग्राहक पहुंच रहे हैं। इनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। अगर कोई क्रेडिट कार्ड सेवा बंद करने को कहता है तो इसके लिए भी दो से पांच हजार रुपये तक की मांग की जा रही है। इससे परेशान लोग अब उपभोक्ता फोरम और बैंकिंग लोकपाल में जाने की तैयारी कर रहे हैं।

हमारा काम करा दो साहब

राजधानी के रिंग रोड से लगे एक पुलिस थाने की रोजाना की कमाई पांच लाख रुपये से ऊपर पहुंच गई है। आप सोच रहे होंगे कि थाने में रोज की कमाई कैसे? लेकिन यह सच है। दरअसल, साहब ने हर काम का बकायदा रेट तय कर दिया है। यहां रेट के अनुसार कोई भी अपना अवैध कारोबार शुरू कर सकता है। इसके लिए सीधे साहब या फिर खास सलटारे को पैसों का लिफाफा थमाना पड़ता है।

पिछले दिनों एक नेताजी का रिश्तेदार साहब से मिला और कहने लगा, हमारा काम शुरू करा दो साहब। तय रेट से ज्यादा पैसा देंगे। इससे साहब मंझधार में फंस गए क्योंकि दूसरे नेताजी का आदमी वहां पहले से अपना अवैध कारोबार जमा चुका है। लिहाजा साहब ने बस इतना कहा, रुक जाओ। कुछ न कुछ जुगाड़ लगाते हैं। अभी लिफाफा छोड़ जाओ। अब नेताजी के रिश्तेदार को साहब की हरी झंडी का इंतजार है।

Posted By: Kadir Khan

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