रायपुर। कुछ सालों से एक ही शहर में जगह-जगह रावण के पुतले जलने लगे हैं और उनका कद ऊंचा करने की होड़ लगी रहती है। पुतले को लेकर लंबी नाक वाले कुछ आयोजकों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी होती है। उनका पूरा फोकस राम पर नहीं, बल्कि रावण पर ही होता है और वे पुतला-निर्माण व उसकी साज-सज्जा में मोटी रकम खर्च करते हैं। इसके लिए चंदे की रकम बढ़ाई जाती है।

गोपनीय तरीके से पता लगाया जाता है कि अमुक-अमुक जगह का रावण-पुतला कितने फीट ऊंचा बनाया जा रहा है। ऐसे लोगों की पूरी कोशिश होती है कि एक अंगुल ही सही, उनका पुतला सबसे ऊंचा रहे। राजधानी रायपुर के मुख्य आयोजन स्थल डब्ल्यूआरएस कालोनी के मैदान में सबसे अधिक ऊंचे रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले तैयार किए जाते हैं। लोगों में यह जानने की खास उत्सुकता होती है कि इस साल कितना ऊंचा दुष्टराज लंकेश का पुतला होगा।

सांड़ की खुजली

एक सांड़ रायपुर की आनंद विहार कालोनी में मस्तियाया हुआ घूम रहा था। अचानक उसके शरीर में खुजली उठी। कोई दीवार और मजबूत पेड़ न पाकर वह सड़क के किनारे लगे और तेजी से बढ़ रहे एक पौधे पर ही पिल पड़ा तथा अपना शरीर रगड़-रगड़कर खुजली मिटाने लगा। जब तक एक आदमी लट्ठ लेकर दौड़ा, तब तक सांड़ की मस्ती से वह पौधा बुरी तरह झुक चुका था। उसकी लोहे की जाली भी क्षतिग्रस्त हो गई थी।

रायपुर शहर के कुछ बेसहारा मवेशी तो गोठानों में पहुंचा दिए गए, लेकिन बड़ी संख्या में गाय-बैल अब भी सड़कों, चौक-चौराहों, गली-मुहल्लों और बाजार में घूमते हुए और नुकसान पहुंचाते रहते हैं। उनके कारण जाम लगता है, वे राहगीरों पर हमला करते हैं तथा खुद भी वाहनों से अक्सर दुर्घटनाग्रस्त हो जाते हैं, लेकिन समझाने और जुर्माना लगाने के बावजूद उनके मालिक नहीं सुधरे। नगर निगम का रोका-छेका अभियान भी फेल है।

'क्रिएटिव' लोगों पर राजू का कटाक्ष

देश के लोकप्रिय हास्य कलाकार राजू श्रीवास्तव के निधन से छत्तीसगढ़ के लोग भी काफी दुखी हैं। राजू श्रीवास्तव का हास्य लोगों का स्वस्थ मनोरंजन तो करता ही है, बाद में सोचने के लिए प्रेरित भी करता है। इंटरनेट मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो चल रहा है, जिसमें राजू ने 'छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया' कहा था। साथ ही उन लोगों पर गहरा कटाक्ष भी किया है, जो दीवारों पर लिखे संदेशों के आगे-पीछे, नीचे-ऊपर कुछ और भी लिख देते हैं।

कई बातें बड़ी भद्दी लिखी होती हैं। शरारती तत्वों द्वारा कुछ अक्षर मिटा भी दिए जाते हैं तो अच्छे संदेश का पूरा भाव ही बदल जाता है। पढ़िए राजू ने क्या कहा, 'दीवार पर लिखा था- यहां लघुशंका करना मना है। हमने कहा- ठीक है, भाई। ध्यान से देखा तो वहां यह भी लिखा था- बहुत जोर से लगी हो तो बात अलग है। हमने कहा- बड़े क्रिएटिव लोग हैं।"

अब मैया मोबाइल दिलवाओ--!

पिछले नवरात्र में हुई कमाई से एक भिखारी अत्यंत खुश था। उसने बताया, 'मैया की कृपा से इतने पैसे मिल गए कि यह स्कूटी आ गई।" वह रायपुर की सड़कों पर कभी-कभी अकेले तो कभी पत्नी के साथ स्कूटी पर दिखता है। पेट्रोल महंगा है, इसलिए ज्यादा समय उसकी स्कूटी मंदिर के बाहर विश्राम करती रहती है। वैसे भी वह काफी सफर कर चुकी हुई लगती है।

किसी ने कबाड़ी को न देकर उसे भिखारी को पकड़ाकर अपना पिंड छुड़ा लिया। भिखारी को बुढ़ापे में स्कूटी का सुख मिल गया। इस नवरात्र के दौरान भी वह कमाई करने के लिए सक्रिय रहता है। हर बड़े भक्त के आगे हाथ पसार देता है। एक दिन उसके एक सुपरिचित ने परिहास में पूछा, 'इस बार क्या खरीदोगे, काका?' इस पर उसने कहा, 'इस बार मैया की अच्छी कृपा हो गई तो बढ़िया और महंगा मोबाइल लूंगा। बिना मोबाइल जीवन में आनंद नहीं।"

Posted By: Pramod Sahu

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