रायपुर। चमचमाती सड़कें, इस पर फर्राटा भरते वाहन और दुर्घटनारहित खुशहाल जिंदगी। किसी प्रदेश की ऐसी कुछ चमकदार तस्वीर दिखाई दे तो यह सहज ही कल्पना की जा सकती है कि राज्य तरक्की की राह पर तेज गति से दौड़ रहा है। दरअसल, किसी भी राज्य की उन्न्ति के पीछे आधारभूत संरचनाओं का होना बेहद जरूरी है। इसमें सबसे प्रमुख सड़क परिवहन है। बिना परिवहन व्यवस्था के प्रदेश की उन्न्ति की बात सोची भी नहीं जा सकती। शहर से लेकर गांव और एक राज्य से लेकर दूसरे राज्य तक के लिए सड़क संपर्क बेहद जरूरी है।

आर्थिक उन्न्ति के साथ ही व्यावसायिक गतिविधियों के सफल संचालन के लिए भी अच्छी सड़कों का होना अति आवश्यक है। इन सबसे अलग मानवीय पहलुओं पर भी ध्यान देना होगा। प्रदेशवासियों को सभी प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध कराना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। सुगम और बाधारहित परिवहन सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल होती है। लेकिन सच्चाई यह है कि गांव से लेकर शहर तक, प्रदेश की जीवनरेखा मानी जाने वाली सड़कों की स्थिति बहुत ही खराब है।

यह स्थिति सरगुजा से लेकर बस्तर तक है। राजधानी की सड़कों को अपवाद स्वरूप छोड़ दें तो बाकी जिलों में ऐसी एक भी सड़क नहीं है जिसमें डामर का पैबंद न लगा हो। अब तो पैबंद भी लोक निर्माण विभाग और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अफसरों की पोल खोल रहा है। ऐसी कोई सड़क नहीं जिसमंे जानलेवा गड्ढे न बन गए हों। प्रदेशवासियों को उनके अपने हाल पर कहें या फिर भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है। जिम्मेदारों को उनकी सुविधाओं, उनकी जिंदगी का उतना ध्यान नहीं है, जितना की रखना चाहिए।

शहर की सड़कों ही नहीं, राष्ट्रीय और राजकीय राजमार्ग की हालत भी बद-से-बदतर है। न्यायधानी बिलासपुर से लेकर सुदूर वनांचल तक सभी जगह सड़कों की स्थिति कमोबेश एक जैसी ही है। सुगम सड़कें नहीं होने से जशपुर से लेकर बस्तर तक के वनांचल क्षेत्र के रहवासियों को जिन परेश्ाानियों से गुजरना पड़ता है, उसकी पीड़ा शायद ही कोई समझ पाएगा। कई क्षेत्र तो ऐसे हैं जहां आज भी सड़क के दर्शन नहीं होते। और अगर सड़कें हैं भी तो उनमें इतने गड्ढे हैं कि पैदल गुजरना भी मुश्किल होता है। जरा कल्पना कीजिये कि कोई बीमार पड़ जाए और उसे तत्काल उपचार की आवश्यकता हो तो क्या होगा? एंबुलेंस पहुंच नहीं सकती।

मार्ग है नहीं। पगडंडियां हैं भी तो पहाड़ों और जंगलों से गुजरती हैं। सच्चाई यह है कि सड़क बनाने व मरम्मत करने वाले विभाग के अधिकारी भी अब अक्षम साबित हो रहे हैं। स्थानीय निकाय भी अपनी जिम्मेदारियों का ठीक ढंग से निर्वहन नहीं कर पा रहे हैं। सरकारी तंत्र से निराश प्रदेशवासियों के लिए उच्च न्यायालय ने आशा की किरण दिखाई है। प्रदेश की बदहाल सड़कों को स्वत: संज्ञान में लेते हुए जनहित याचिका के रूप में सुनवाई प्रारंभ कर दी गई है। तीन वरिष्ठ अधिवक्ताओं को न्यायमित्र बनाकर रिपोर्ट मांगी गई है। इस रिपोर्ट के आधार पर जस्टिस विभागीय अफसरों को तलब कर रहे हैं। न्यायालय की सख्ती और गंभीरता से प्रदेशवासियों की उम्मीद जगी है। वे भरोसा कर सकते हैं कि आने वाले दिनों में अच्छी सड़कें मिल सकेंगीं।

Posted By: Pramod Sahu

NaiDunia Local
NaiDunia Local
  • Font Size
  • Close