रायपुर। भारतीय बाल कल्याण परिषद (आइसीसीडब्ल्यू) द्वारा राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार के लिए चयनित देश के 56 बच्चों में पांच बच्चों का छत्तीसगढ़ से होना राज्य के लिए गौरव की बात है। यह भी एक महत्वपूर्ण पक्ष है कि इन पांच बच्चों में चार बच्चे ग्रामीण परिवेश के हैं। दरअसल, जीवन का संघर्ष ही बच्चों को विपरीत परिस्थितियों का सामना करने के लिए मानसिक रूप से तैयार करता है। माता-पिता द्वारा दिए गए संस्कार, उनकी जीवटता, उनके जीवन के उतार-चढ़ाव, उनके आदर्श, उनके द्वारा दी गई सीखें आदि बच्चों को इस तरह तैयार करते हैं कि वे कठिन समय में भी विवेक न खोकर त्वरित निर्णय लेने की क्षमता लेने के लिए तैयार होते जाते हैं। निश्चित रूप से इन बच्चों की बहादुरी अन्य बच्चों के लिए प्रेरणादायी है।

अभिभावकों को बच्चों को ऐसे संस्कार देने चाहिए कि जब कोई संकट में हो तो उसकी मदद करने से पीछे न हटें। विपरीत परिस्थितियों में न तो घबराएं, न ही हड़बड़ाएं, बल्कि हिम्मत और धैर्य का परिचय देते हुए विवेकपूर्ण निर्णय लें। राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार के लिए चयनित बच्चों में रायपुर की उन्नति शर्मा ने धुएं से भरे कमरे से अपने भाई को बाहर निकालकर उसकी जान बचाई थी। गरियाबंद के राहुल पटेल ने बच्चेे को तालाब में डूबने से बचाया था। धमतरी की जानवी राजपूत ने छोटे भाई को करंट से बचाया था। बेमेतरा के सीताराम यादव ने बाढ़ से एक बच्ची और कोरबा केअमन ज्योति जाहिरे ने जलप्रपात में बहते अपने दोस्त को बचाया था। इन बच्चों की निर्णय क्षमता के पीछे कहीं न कहीं उनके स्वजन की प्रेरणा ही है। एक समय था कि जब दादा-दादी, नाना-नानी बच्चों को ज्ञानवर्धक और बहादुरी के किस्से सुनाते थे। महापुरुषों की कहानियां सुनाते थे। यह दिनचर्या में शामिल था।

परिवार का वातावरण जैसा होगा, बच्चा उसी में ढलता जाता है। हालांकि समय के साथ सब बदलता गया। आज का बच्चा मोबाइल-टीवी तक सीमित होकर रह गया है। ऐसा नहीं कि मोबाइल में प्रेरक कहानियां-किस्से नहीं हैं, लेकिन बच्चा मनोरंजन की चीजों की ओर ज्यादा आकर्षित है। माता-पिता के पास भी इतना समय नहीं है कि वह बच्चों पर ध्यान दे सकें। इसे बदलना होगा। यह जिम्मेदारी बड़ों की ही है। बच्चों और बुजुर्गों के लिए समय निकालना होगा। बच्चों को डाक्टर, इंजीनियर, विज्ञानी, वकील आदि बनाने के लिए जितनी चिंता और मेहनत करते हैं, उतनी ही चिंता उन्हें अच्छा इंसान बनाने के लिए भी करनी होगी। उन्हें अच्छे संस्कार देना होगा। यह बात हमेशा ध्यान में रखना होगा कि बच्चा घर के बड़ों से ही सीखता है। ऐसे में खुद को भी बदलना होगा। बहादुरी का मतलब केवल जंग जीतना नहीं है, अहिंसा, दया, सेवा, धैर्य आदि भी बहादुरी का ही रूप है। बच्चों को यह बताएंगे, तभी वे बहादुर बनेंगे।

Posted By: Vinita Sinha

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