रायपुर। यह चिंता का विषय है कि मानसून सिर पर है और तालाबों के संरक्षण एवं संवर्द्धन को लेकर केंद्र सरकार की ओर से अप्रैल में देश भर में शुरू की गई अमृत सरोवर योजना का काम मई के अंतिम सप्ताह में भी प्रदेश में जमीन पर नहीं उतर पाया है। जल संरक्षण के लिए इस योजना के तहत तालाबों को पुनर्जीवित किया जाना है। भूजल का स्तर बढ़ाने के लिए तालाबों के आसपास हुए अतिक्रमण को हटाते हुए उनका गहरीकरण और सुंदरीकरण किया जाना है।

वास्तविक स्थिति तो यही है कि अगले 10 दिनों में बारिश शुरू हो जाने के आसार हैं, लेकिन ज्यादातर जिलों में अभी योजना में शामिल करने के लिए तालाबों की सूची ही तैयार नहीं हो पाई है। मौसम विभाग ने इस साल छह जून तक मानसून के पहुंचने की संभावना जताई है। विभागीय मंत्री और शीर्ष अधिकारियों को विचार करना चाहिए कि इस स्थिति के लिए प्रशासनिक शिथिलता कारण है या नेतृत्व की उदासीनता? जिला स्तर पर योजना के क्रियान्वयन की तत्काल शुरुआत नहीं की गई तो पूरी योजना सिर्फ औपचारिक बनकर रह जाएगी।

शहरीकरण और औद्योगिकीकरण के चलते तालाबों के अस्तित्व पर संकट है। शहर में बहुमूल्य क्षेत्रों में स्थित तालाब अतिक्रमण के कारण अस्तित्व खोते जा रहे हैं। छोटे-बड़े शहरों में आधे से अधिक तालाब लुप्त हो चुके हैं। जो हैं, उन्हें बचाए रखना भी बड़ी चुनौती है। भू-माफिया की गिद्ध दृष्टि है। यद्यपि तालाबों की सामाजिक और धार्मिक महत्ता रही है, परंतु धन लोलुपता ने जल संकट पैदा कर दिया है।

तालाब स्वाभाविक रूप से भूजल संरक्षण का काम करते हैं। जहां भी तालाब सुरक्षित हैं, वहां भीषण गर्मी में भी आसपास के चापाकल (हैंडपंप) और कुएं नहीं सूखते। तालाबों के खत्म होने और उन पर बढ़ते अतिक्रमण के चलते आजकल गांवों में भी गर्मी शुरू होने से पहले ही पेयजल और निस्तारी का संकट गहराने लगता है। शहरों में तो टैंकरों के जरिए पेयजल समस्या से निपटने के प्रयास होते हैं, लेकिन भूजल स्तर तेजी से गिरने से नई चुनौती भी पैदा हो जाती है।

उम्मीद की जाती है कि तालाबों के जीर्णोद्धार पर केंद्रित यह योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में भी प्रभावी भूमिका निभाएगी। इसके क्रियान्वयन से बड़े पैमाने पर रोजगार का सृजन होगा। आधुनिक पीढ़ी को तालाबों के पर्यावरणीय और आर्थिक लाभ के बारे में समझाना होगा। तालाबों का जीर्णोद्धार निस्संदेह जल संरक्षण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 15 अगस्त, 2023 तक देश के सभी जिलों में न्यूनतम 75-75 तालाबों का विकास और कायाकल्प कर उन्हें अमृत सरोवर रूप में विकसित करने का आह्वान किया है। वर्तमान स्थिति में प्रदेश में योजना का कार्यान्वयन काफी पीछे चल रहा है। बारिश शुरू होने के बाद गहरीकरण और साफ-सफाई की प्रक्रिया अटक जाएगी। अपेक्षा है कि संबंधित मंत्री और अधिकारी इस महत्वपूर्ण योजना के प्रति सजगता दिखाते हुए अन्य योजनाओं के समान अमृत सरोवर योजना में भी प्रदेश का नाम शीर्ष प्रदेशों की सूची में शामिल कराने में सफल रहेंगे।

Posted By: Pramod Sahu

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