रायपुर। विधानसभा चुनाव में अभी लगभग डेढ़ साल का समय है परंतु प्रशाासनिक वातावरण में चुनावी महक की बात उठ रही है। मंगलवार को जब राज्य सरकार ने 19 जिलों के कलेक्टरों सहित महत्वपूणर््ा पदों पर बैठे 41 अधिकारियों की नवीन पदस्थापना की सूची जारी की तो विश्लेषकों ने संभावना जताई कि सरकार चुनावी दृष्टिकोण से प्रशाासनिक बिसात बिछाने में जुट गई है। राजनीतिक उद्देश्य चाहे जो भी हों अधिकारियों को जनहित में काम करने का बढ़िया अवसर भी मिला है।

कुछ लोग इसे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की दूरदृष्टि भी मान रहे हैं कि उन्होंने चुनाव से काफी पहले प्रशाासन में संतुलित बदलाव किया है। ऐसे जिले जहां विकास की तेज गति की आवश्यकता है वहां ऐसे कलेक्टर भेजे हैं जिन्होंने अभूतपूर्व काम किया है। माना जा रहा है कि भेंट मुलाकात कार्यक्रम के दौरान ओडिशा से सटे कोंडागांव जैसे छोटे जिले में पुष्पेंद्र कुमार मीणा की सक्रियता और उपलब्धियों ने मुख्यमंत्री को प्रभावित किया और उन्हें अपने गृह जिला दुर्ग ले आए हैं।

ऐसा ही उदाहरण कोरोना काल में विशेष स्वास्थ्य सचिव के रूप में सक्रियता के कारण राष्ट्रीय स्तर पर उदाहरण बनीं डा. प्रियंका शुक्ला को कांकेर का कलेक्टर बनाया जाना है। इसी तरह रजत बंसल ने बस्तर के विकास को नई दिशा दी है। पर्यटन के साथ कला, संस्कृति और बोली के उन्ययन के लिए संस्थान की स्थापना से लेकर खेलों के लिए संसाधन जुटाए। मात्र दस वर्ष पूर्व सृजित बालौदाबाजार में उनका अनुभव काम आएगा। हाल ही में बच्चे के बोरवेल में फंसने से चर्चा में रहे जांजगीर के कलेक्टर जितेंद्र शुक्ला की मुख्यमंत्री की विश्ोष दृष्टि वाले बेमेतरा में नियुक्ति को भी पुरस्कार के रूप में देखा जा रहा है।

लोगों से संपर्क, संवाद और सहयोग में कुशल भूरे सर्वेश्वर नरेंद्र को कमियों को दूर करने के लिए दुर्ग से राजधानी लाया गया है। लगभग हर जिले में किए गए बदलाव में इसी तरह के समीकरण साफ दिख रहे हैं। चुनाव से पहले नए जिलों में उनका काम सरकार को कितना लाभ देगा यह तो परिणाम आने के बाद ही तय होगा परंतु इतना जरूर है कि ऐसे अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाएगी। चुनाव से डेढ़ साल पहले हो रहे इन बदलावों के बाद तीन साल से अधिक समय से एक स्थान पर रहने के कारण चुनाव के दौरान स्थानांतरण जैसी चुनौती भी नहीं रहेगी।

हालांकि जिन अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां मिली हैं उनके लिए चुनौती भी काफी हैं। उन्हें सरकार और जनता की उम्मीदों पर खरा उतरना है। कलेक्टरों से पूर्ववर्ती जिलों की तरह ही प्रदर्शन की अपेक्षा की जा रही है। जिन क्षेत्रोंं में सत्तारूढ़ दल कांग्रेस की पकड़ कमजोर है वहां ऐसा काम करना होगा कि जनता का जुड़ाव सरकार के प्रति दिखने लगे। इसमें विकास की तेज गति और लोगों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने में सफलता की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। आवश्यक है कि विकास जनहित में होने के साथ ही बहुआयामी हो ताकि इसका लाभ जनता को मिले।

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