रायपुर। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती पर दो अक्टूबर से प्रदेश सरकार ने गांव-गांव पहुंचने की तैयारी की है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में गाय, गोबर, गोमूत्र को स्वावलंबन का सूत्र बनाते हुए गांधी के ग्राम स्वराज की परिकल्पना को साकार करने का प्रयास किया जाएगा। ग्राम सभाओं का आयोजन कर तय विषयों पर चर्चा होगी। इस कार्य में प्रशासनिक अधिकारियों के साथ ही स्थानीय प्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित करने की योजना है।

यद्यपि स्वावलंबन के मंत्र को महात्मा गांधी के नेतृत्व में देशवासियों ने स्वदेशी आंदोलन के माध्यम से स्वाधीनता संग्राम के समय ही अपना लिया गया था। हमारे नेताओं का लक्ष्य स्पष्ट था कि स्वतंत्र भारत इसी मार्ग पर विकास की उुंचाइयों को छुएगा। यही कारण रहा कि वैश्विक मंदी में भी भारतके आर्थिक स्वास्थ्य पर कोई विश्ोष प्रभाव नहीं पड़ा। केंद्र सरकार ने अगर आत्मनिर्भर भारत का सपना देखा है तो छत्तीसगढ़ सरकार गांधीजी केग्राम स्वराज के मंत्र को मजबूती दे रही है।

स्वावलंबन हमें मजबूत बनाता है तथा अपनी क्षमताओं और प्रयत्नों पर आश्रित रहकर कार्य करने के लिए प्रेरित करता है। यह गुण आने से व्यक्ति को दूसरों केसहारे की आवश्यकता नहीं रहती। स्वावलंबन केलिए दृढ़ इच्छा-शक्ति और कठोर परिश्रम की आवश्यकता होती है। यह सभी को अपने प्रयासों से प्राप्त सफलता का सुखद अनुभव कराता है तथा असफलताओं से शिक्षा लेकर पुन: सफलताओं के लिए नए-नए मार्ग खोजता है। यही कारण है कि एक स्वावलंबी ही भूमि पर रहकर आकाश में उड़ने की चेष्टा करता है, क्योंकि भाग्य केसहारे न बैठकर अपनी क्षमताओं का विकास करने के लिए उत्प्रेरक का काम करता है।

स्वावलंबन के इन्हीं गुणों को देखते हुए प्रदेश केमुख्यमंत्री ने गोठान की परिकल्पना की। वनोपज को समर्थनमूल्य पर खरीदने पर बल दिया। साथ ही प्रदेश वासियों को स्वावलंबी बनाने के लिए नरवा, गरुवा, घुरवा और बाड़ी को विकसित करने का मंत्र दिया। यह प्रयास गरीबों की आर्थिक स्थिति में सुधार लाने में काफी हद तक सफल भी रहा। गोठान और महिला स्वसहायता समूह ने आधी आबादी को संपन्न् बनाने का बीड़ा उठाया गया। गोठान ने जहां लावारिस गोवंशों को शरण दी तो गोबर खरीदी ने आमजन को आर्थिक सहयोग। प्रदेशभर में गोठान की सफलता का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि इन्हें बहुपयोगी बनाया जाने लगा है।

वनोपज की समर्थन मूल्य पर खरीदी वनवासियों को स्वावलंबी बनाने में मददगार रही। उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार आया। यह स्वावलंबन की दिशा में उठाए गए कदमों का ही प्रभाव है कि हाल में ही आए बेरोजगारी के आंकड़े में प्रदेश में बेरोजगारी दर अन्य प्रदेशों की तुलना में काफी कम है।मेक इन इंडिया और स्टार्टअप ने युवाओं को नई राह दिखाई। स्वदेशी, स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता की नीति के कारण अब युवा नौकरी के पीछे भागने की जगह स्वरोजगार अपनाने पर ध्यान केंद्रित करने लगे हैं। स्वदेशी की चेतना से भी रोजगार के अवसर बढ़े हैं। गांधीजी केस्वावलंबन का मार्ग वर्तमान में भी उतना ही प्रासंगिक है, जितना स्वाधीनता संग्राम के समय था। आशा की जानी चाहिए कि सरकार अपने राष्ट्रपिता के मूलमंत्र को मूर्त रूप देकर उन्हें ऐसे ही श्रद्धांजलि देती रहेगी।

Posted By: Pramod Sahu

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