रायपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। राज्य सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पुण्यतिथि पर किसानों, कृषि भूमिहीन मजदूरों, पशुपालकों, गोबर विक्रेताओं, महिला समूहों और गोठान समितियों के खाते में 1804.50 करोड़ रुपये की राशि हस्तांतरित करके उनके चेहरे पर मुस्कान लाने का काम किया है। यह आर्थिक सशक्तीकरण की दिश में उठाया गया सराहनीय कदम है। न्याय योजनाएं पूरे देश में माडल के रूप में उभरी हैं। राजीव गांधी ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना के तहत राज्य सरकार ने पहली बार भूमिहीन खेतिहर मजदूरों को नकद के रूप में मदद की पहली किस्त जारी की है। देने वाले की संतुष्टि और पाने वाले की खुशी का साक्षी पूरा प्रदेश बना।

राज्य के भविष्य के लिए जरूरी था कि इसकी नींव मजबूत की जाए। इसी उद्देश्य को पूरा करने के लिए राज्य में न्याय योजनाएं लाई गईं। योजनाओं का प्रभाव यह हुआ कि राज्य के लोग गोबर विक्रय करके ही लाखों रुपये कमा रहे हैं। जो लखपति नहीं भी बन पा रहे हैं, वे कृषि लागत की भरपाई तो कर ही ले रहे हैं। किसान न्याय योजना से राज्य में उगाई जाने वाली फसलों में विविधता आई है, जिससे खाद्य पदार्थों में लोगों के पास विकल्प बढ़े हैं। साथ ही मृदा का स्वास्थ्य, द्विफसली रकबे में वृद्धि, पानी की कमी से उत्पन्न् प्रतिकूल प्रभाव से फसलों की सुरक्षा भी हुई है। गोबर को धन में बदलने से पशुओं के प्रति कृषकों का दृष्टिकोण और व्यवहार बदला है। बेहतर पशु प्रबंधन से जैविक खाद का उत्पादन बढ़ा है तथा अवैध और अनियंत्रित चराई पर लगाम लगी है।

आवारा पशुओं से होने वाली दुर्घटनाओं में भी कमी आई है। किस्त के रूप में मजदूरों को नकद सहायता मिलने से उनके खर्च में मदद मिलेगी। इसके चलते वे ऋण के जाल में नहीं फंसेंगे। साथ ही साथ आकस्मिक स्थितियों के लिए भी संबल मिलेगा।

कहना गलत नहीं होगा कि न्याय योजनाएं अपने उद्देश्यों में सफल रही हैं। इसका प्रमाण इसके लाभार्थी हैं। भेंट-मुलाकात कार्यक्रम के तहत ऐसे भी पल आए हैं, जब मुख्यमंत्री के समक्ष किसान और मजदूर भी भावुक हो गए हैं। यह योजनाओं की सकारात्मकता ही है कि जो किसान दबाव में जी रहा था, वह आज आत्मसम्मान के साथ अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहा है।

नीति निर्माण के साथ इसका क्रियान्वयन भी इसकी सफलता का एक महत्वपूर्ण कारक रहा है। सरकार ने जिस तरह लोगों के हाथों में धन उपलब्ध कराने का कार्य किया है, वह सराहनीय है। पैसा पास में होने के चलते किसान, मजदूर, पशुपालक अपनी आवश्यकता के अनुसार निवेश कर पा रहे हैं। यही वजह रही है कि जब कोरोना काल में देश भर की विकास-दर चिंता का विषय थी, तब राज्य में वह सुदृढ़ बनी रही। न्याय योजनाओं ने गढ़बो नवा छत्तीसगढ़ की उम्मीदों को मजबूत किया है। जिन वर्गों को राज्य की कमजोर कड़ी माना जा रहा था, वे ही आज राज्य के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका में हैं।

Posted By: Abhishek Rai

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