रायपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की ओर से आयोजित 10वीं और 12वीं की परीक्षा का परिणाम सुखद अहसास दिला रहा है। कोरोना महामारी के चलते दो वर्षों तक पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित रही। विद्यार्थी अपने भविष्य को लेकर काफी परेशान रहे। बच्चों के भविष्य को लेकर अभिभावक चिंतित रहे। इन सबके बीच परिणाम ने बड़ी राहत दी है। बमुश्किल सवा महीने की आफलाइन पढ़ाई के बावजूद परिणाम अच्छा रहा। हाई स्कूल में 74.23 प्रतिशत और हायर सेकेंडरी स्कूल में 79.30 प्रतिशत परीक्षार्थी सफल हुए।

प्रावीण्य सूची में छोटे शहरों के बच्चों ने जिस तरह से अपना दबदबा बनाया है, उससे एक बार फिर प्रमाणित हुआ है कि शिक्षा हालात की कभी मोहताज नहीं रही। होनहार बच्चे विपरीत परिस्थितियों और कम संसाधनों के बावजूद बेहतर परिणम लाने में सक्षम होते हैं। कोरोना ने शिक्षा का बहुत नुकसान किया है। इस दौर में बच्चे आनलाइन पढ़ाई तक ही सीमित होकर रह गए थे। परीक्षाएं भी ठीक से नहीं हो पाईं। बच्चे ही नहीं, अभिभावकों और शिक्षकों के सामने भी नए हालात थे। इससे आखिर किस तरह उबरा जाए, इसका समाधान सभी अपने-अपने स्तर पर तलाशते रहे, लेकिन कहते हैं न कि बहुत से सवालों के जवाब वक्त ही देता है।

दौर बदला और आज हम कोरोना से लगभग उबर चुके हैं। पढ़ाई एक बार फिर पटरी पर आई और सामने परिणाम है। परीक्षा को लेकर भी असमंजस की स्थिति बनी हुई थी कि आनलाइन होगी या आफलाइन? किस तरह की व्यवस्था रहेगी? कोरोना के नियम भी होंगे, लेकिन माध्यमिक शिक्षा मंडल ने व्यवस्था में कोई कमी नहीं रखी। अन्य वर्ष की अपेक्षा ज्यादा परीक्षा केंद्र बनाए गए, ताकि शारीरिक दूरी के नियम का पालन हो। परीक्षा केंद्रों में सैनिटाइजर की व्यवस्था रही। मास्क को अनिवार्य रखा। इस तरह पूरे नियम-कायदे के अनुसार परीक्षाएं हुर्ईं और विद्यार्थियोें ने अनुशासन का सम्मान किया।

इस वर्ष के परिणाम में एक बात और भी अच्छी है कि कोरोना के पहले इन परीक्षाओं के जो परिणाम आते थे, इस बार का परिणाम उससे भी बेहतर है यानी हमें इस बात को स्वीकार करने में जरा भी परहेज नहीं करना चाहिए कि शिक्षकों से लेकर विद्यार्थी तक और शिक्षा विभाग से लेकर अभिभावकों तक ने पूरे मन से अपना धर्म निभाया, ताकि कोरोना काल में हमने जो खोया है, उसे दोबारा हासिल कर सकें। निस्संदेह विद्यार्थियों की भूमिका इसमें सराहनीय रही, जिन्होंने एक बार फिर खुद को मानसिक रूप से तैयार किया। इसे हम यह भी कह सकते हैं कि उन्होंने परीक्षा के बीच में भी एक और परीक्षा दी, खुद को साबित किया।

यह स्थापित किया कि हालात चाहे जैसे भी हों, दृढ़ संकल्प से उबरा जा सकता है। दृढ़ निश्चय के साथ कठिन परिश्रम भी बहुत जरूरी है। वही लक्ष्य तक पहुंचाता है। इन परीक्षाओं का सफल संचालन करने वाले सारे तंत्र की जितनी सराहना की जाए, कम होगी। परीक्षा में सफलता के परचम लहराने वाले सभी होनहारों को शुभकामना!

Posted By: Sanjay Srivastava

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