रायपुर। लोगों को कम दाम पर गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना अपने लक्ष्य की पूर्ति नहीं कर पा रही है। विशेष रूप से आंख, कैंसर, हृदय रोग समेत अन्य गंभीर बीमारियों की दवाओं की कमी है। दुकानों की संख्या से ज्यादा उनमें पर्याप्त दवाओं की जरूरत है, ताकि जरूरतमंदों का कम खर्च में इलाज हो सके।

केंद्र सरकार का कहना है कि सभी पीएमबीजेपी केंद्रों पर दवाओं का रियल टाइम वितरण सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी आइटी तकनीक से लैस लाजिस्टिक्स और आपूर्ति श्रृंखला शुरू की गई है, लेकिन दवाओं की कमी कुछ और ही तस्वीर प्रस्तुत कर रही है। दूसरी तरफ तरफ केंद्र बंद भी हो रहे हैं। इसके पीछे की वजह इसमें लाभ की कमी है। दवाओं की आपूर्ति इसलिए भी कम हो रही है, क्योंकि औषधि केंद्रों का बकाया ज्यादा हो गया है।

जेनेरिक दवाइयों की सतत आपूर्ति होने से लोगों के चिकित्सा व्यय में 70 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है। कुछ ब्रांडेड और जेनेरिक दवाओं की कीमतों में 90 प्रतिशत तक का फर्क होता है। कीमतों में कम, लेकिन असर में ब्रांडेड दवाओं के समकक्ष जेनेरिक दवाइयों को जनजागरूकता से लेकर आपूर्ति तक का साथ नहीं मिल रहा है। सरकार के बार-बार कहने पर भी चिकित्सक इन दवाओं को लिख नहीं रहे हैं। जो लिख भी रहे हैं, वे केंद्रों पर उपलब्ध नहीं होती हैं।

ब्रांडेड दवाइयों में ज्यादा लाभ होने के कारण जेनेरिक दवाओं का प्रयोग अपेक्षानुसार बढ़ नहीं पा रहा है। इसके साथ ही गुणवत्ता का भी सवाल है। मरीज को कुछ हो जाने पर उनके स्वजन डाक्टर को ही निशाना बनाते हैं, इस भय से भी वह जेनेरिक दवाएं नहीं लिखते हैं। सरकार का प्रयास है कि सभी रिटेल दुकानों पर जेनेरिक दवाइयां रखवाई जाएं, ऐसे में आपूर्ति की अनिश्चितता इस पर गंभीर खतरा है।

भारत सरकार की तरफ से 2008 से शुरू हुई इस योजना का सिर्फ नाम बदला है, लेकिन यह मरीजों के ऊपर पड़ने वाले दवाओं के भारी बोझ से छुटकारा नहीं दिला पाई है। देश-प्रदेश में नियमन अब भी सुस्त है और ऐसे में सिर्फ जेनेरिक नामों का उल्लेख करने से घटिया और निम्न स्तर की दवाएं बिकने का जोखिम बढ़ेगा। योजना के तहत प्रमाणित आपूर्तिकर्ताओं से दवाएं खरीदी जाती हैं, लेकिन इसके बाद भी कम गुणवत्ता वाली दवाओं की आपूर्ति कर दी जाती है।

छत्‍तीसगढ़ प्रदेश में संचालित जन औषधि केंद्रों को जेनेरिक दवाओं की जरूरत है और जेनेरिक दवाओं को डाक्टरों तथा जन सहयोग की। इसलिए दवाओं का उत्पादन बढ़ाने के साथ आपूर्ति श्रृंखला को भी दुरुस्त किया जाना अनिवार्य हो गया है। सभी के सम्मिलित प्रयासों से औषधि केंद्रों के हालात सुधरेंगे और वे अपने उद्देश्यों को हासिल कर पाएंगे, जिससे लोगों की जेब और स्वास्थ्य दोनों स्वस्थ होंगे।

Posted By: Kadir Khan

NaiDunia Local
NaiDunia Local
  • Font Size
  • Close