रायपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। उच्च शिक्षा विभाग ने निजी कालेजों की नैक (राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद) ग्रेडिंग कराने के लिए निर्देश जारी कर महत्वपूर्ण कदम उठाया है। शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार की दृष्टि से यह आवश्यक है। प्रदेश में संचालित 279 कालेजों में सिर्फ 20 के पास ही नैक ग्रेडिंग का होना इस बात को स्पष्ट करने के लिए पर्याप्त है कि निजी कालेजों में अभी तक गुणवत्ता को स्थान नहीं मिल पाया है।

सिर्फ नामांकन और डिग्री वितरण पर ही जोर है। सरकारी कालेजों में विभिन्न विषयों में पढ़ाई के लिए अवसरों की कमी के कारण निजी कालेजों की भूमिका दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है तो दूसरा पक्ष यह भी है कि विभिन्न विश्वविद्यालयों से संबद्धता प्राप्त निजी कालेजों में गुणवत्तापूर्ण मानव संसाधन हैं न कार्यबल। यद्यपि इनमें काफी कालेजों को शासकीय अनुदान राशि भी मिलती है। विभाग ने धमकी दी है कि दिसंबर, 2022 तक नैक ग्रेडिंग सुनिश्चित नहीं हो पाने की स्थिति में अनुदान राशि रोक दी जाएगी।

उच्च शिक्षा की गुणवत्ता का राष्ट्रीय स्तर पर मूल्यांकन करने के लिए 1994 में गठित इस सरकारी संस्था नैक के प्रतिनिधि के तौर पर देशभर के शिक्षाविद् अलग-अलग कालेजों का तय मानदंडों के आधार पर मूल्यांकन करते हैं। शिक्षा की गुणवत्ता से लेकर अध्ययन की सुविधाओं का निरीक्षण करने के बाद अंक और ग्रेड तय किए जाते हैं। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग और विभिन्न् संस्थाओं द्वारा उक्त संस्थाओं को ग्रेडिंग के आधार पर ही अनुदान उपलब्ध कराया जाता है।

इस आलोक में देखा जाए तो प्रदेश के सरकारी कालेजों की भी स्थिति ठीक नहीं मानी जा सकती, क्योंकि प्रदेश के 211 शासकीय कालेजों में सिर्फ 109 की ही नैक ग्रेडिंग हुई है। बाकी 102 की नैक ग्रेडिंग नहीं होने का अर्थ उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों की कोताही भी है। सबसे बड़ी चुनौती प्रदेश के विश्वविद्यालयों की नैक ग्रेडिंग है। यह दुखद पक्ष है कि प्रदेश के सबसे प्रतिष्ठित पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर का ए ग्रेड दर्जा छिन चुका है और विश्वविद्यालय ने अपने मूल्यांकन के कार्यक्रम को भी स्थगित कर दिया है।

बिलासपुर स्थित अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय की नैक ग्रेडिंग होनी है, जबकि शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय बस्तर और संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय सरगुजा सी ग्रेड वाले विश्वविद्यालय हैं। बाकी बचे दुर्ग के हेमचंद यादव विश्वविद्यालय और रायगढ़ के शहीद नंद कुमार पटेल विश्वविद्यालय अभी नैक ग्रेडिंग के पात्र ही नहीं हैं। इस तरह सरकारी शिक्षण संस्थानों की गुणवत्ता भी सवालों में है। प्रदेश के सरकारी कालेजों और विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए ढांचागत सुविधाओं के विकास की स्थिति भी अच्छी नहीं है। यही कारण है कि ए (प्लस-प्लस) वर्ग में प्रदेश का एक भी शिक्षण संस्थान नहीं है। स्थिति में सुधार के लिए नेतृत्व को गंभीरता से काम करना होगा। शिक्षण संस्थाओं को मानव और आर्थिक संसाधन उपलब्ध कराने में संकोच त्यागना होगा। प्रदेश से प्रतिभावान विद्यार्थियों का पलायन रोकने के लिए गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा व्यवस्था जरूरी है। उम्मीद की जानी चाहिए कि विभागीय पहल से निजी और सरकारी क्षेत्र की उच्च शिक्षा में सकारात्मक परिणाम आएंगे।

Posted By: Pramod Sahu

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