रायपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। प्रदेश में पदयात्राओं की राजनीति को दिन-प्रतिदिन नई दिशा मिल रही है। कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी की पदयात्रा से प्रेरणा लेकर कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता उत्साहित तो हैं ही, अन्य दलों के नेता भी इस मार्ग को अपनाने के लिए उत्प्रेरित हो रहे हैं।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में प्रदेश में आयोजित भेंट-मुलाकात कार्यक्रम में जनता के साथ हुए सीधे संपर्क ने इसे आधार दिया है। इसके माध्यम से मुख्यमंत्री को सरकार से अपेक्षाओं की जानकारी प्राप्त करने में काफी सहायता मिली है। गांवों के लोगों की समस्याओं और मौलिक आवश्यकताओं के साथ विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति को समझने में काफी सहायता मिली है।

उनके कार्यक्रमों के दौरान हुईं कार्रवाइयों का भी प्रशासनिक व्यवस्था पर प्रभाव पड़ा है। कार्यपालिका से जुड़ी संस्थाएं सक्रिय हुई हैं। अधिकारियों में भी समय से काम करने के प्रति सजगता आई है। मुख्यमंत्री की इन यात्राओं के बीच ही पदयात्राओं का क्रम शुरू हुआ है। मुख्यमंत्री खुद राहुल गांधी के साथ पदयात्रा में शामिल हो चुके हैं और दक्षिण भारत के राज्यों में उसे मिल रहीं सफलताओं को काफी प्रभावी मान रहे हैं।

इधर प्रदेश के नेताओं ने गांधी जयंती से पदयात्राओं की शुरुआत कर हर गांव तक पहुंचने का संकल्प लिया है। उम्मीद की जानी चाहिए कि सत्तारूढ़ पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं की इन यात्राओं के दौरान जनता की सरकार से उम्मीदें और उन्हें पूरा कर पाने में मिली सफलताओं की जानकारी भी मिलेगी। पदयात्रा में मिली जानकारियों का अगर सही तरीके से उपयोग होगा तो पार्टी और सरकार के लिए हर स्तर पर लाभकारी होगी।

चुनावी वर्ष शुरू होने के पहले ही कांग्रेस के नेताओं ने जो सक्रियता दिखाई है, उससे समझा जा सकता है कि पार्टी के रणनीतिकार वर्ष 2023 में होने वाले चुनाव के लिए अभी से सक्रिय हो चुके हैं। अगर अभी से सुधारों की प्रक्रिया को अपेक्षित गति मिल गई तो पार्टी की स्थिति आने वाले समय में और मजबूत हो जाएगी। दूसरी तरफ भाजपा के नेताओं ने भी जनसंपर्क के कार्यक्रम शुरू कर दिए हैं।

पार्टी के सभी महत्वपूर्ण नेताओं का दौरा यह बता रहा है कि अगले वर्ष प्रस्तावित चुनाव में कांटे की टक्कर होगी। आवश्यकता इस बात की है कि एक-दूसरे के खिलाफ आरोप-प्रत्यारोप की जगह प्रदेश के विकास को सही दिशा और गति देने के लिए काम किया जाए। पदयात्राओं को जनसंपर्क का सबसे अच्छा माध्यम माना जा सकता है परंतु इस दौरान एक-दूसरे का विरोध करने की जगह जनता की भावनाओं को समझने और प्रदेश के हित में काम करने के लिए संकल्पबद्ध होने की दिशा में काम करना होगा।

राष्ट्रीय स्तर के घटनाक्रमों के बीच प्रदेश के समक्ष गंभीर चुनौतियां हैं। आदिवासी बहुल क्षेत्रों की समस्याओं का समाधान इनमें सबसे बड़ी चुनौती है। अभी भी संपर्क के माध्यम अपेक्षानुसार सुदृढ़ नहीं हो पाए हैं। इनकी वजह से स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाओं का विस्तार भी बड़ी चुनौती है। उम्मीद की जानी चाहिए कि पदयात्राओं से प्रदेश की राजनीति को सुदृढ़ आधार मिलेगा और नेता भी जनता की भावनाओं का सम्मान करते हुए समाधान के लिए ठोस उपाय करेंगे।

Posted By: Pramod Sahu

NaiDunia Local
NaiDunia Local
  • Font Size
  • Close