रायपुर। छत्‍तीसगढ़ राज्य में चिटफंड कंपनियों के विरुद्ध अभियान के अब परिणाम दिखने लगे हैं। राजनांदगांव पुलिस ने हैदराबाद में छापा मारकर लंबे समय से फरार रहे अनमोल इंडिया एग्रो हर्बल फार्मिंग के चार डायरेक्टरों और बलौदाबाजार पुलिस ने दिल्ली में छापा मारकर सनशाइन इंफ्राबिल्ड कारपोरेशन के डायरेक्टर को गिरफ्तार किया है। बिलासपुर में जीएन गोल्ड का एक और संचालक पकड़ा गया है। राज्य सरकार चिटफंड कंपनियों पर न केवल शिकंजा कस रही है, बल्कि उनके द्वारा ठगे गए धन को लौटा भी रही है।

सरकार और प्रशासन को न्यायपालिका का भी खूब साथ मिल रहा है। राज्य सरकार एक कदम आगे बढ़ते हुए दूसरे राज्यों में मिली उनकी संपत्ति को कुर्क करने के लिए कानूनी संभावनाओं पर कार्य कर रही है। कुछ दिनों पूर्व मुख्यमंत्री ने राजनांदगांव के चिटफंड निवेशकों को 2 करोड़ 46 लाख की राशि आनलाइन उनके खाते में अंतरित की थी। चिटफंड पीड़ितों की संख्या लाखों में है और इनके द्वारा निवेश की गई राशि करोड़ों में। सरकार द्वारा प्राथमिकता देने से तथा पुलिस की सक्रियता से पीड़ितों लोगों में उम्मीद जागी है।

अब तक की गई कार्रवाई राहत देने वाली है, लेकिन जन सहयोग के अभाव में पुलिस अकेले चिटफंड कंपनियों को राज्य से बाहर नहीं खदेड़ पाएगी। कहीं-न-कहीं लोगों का लालच, जल्दी पैसा कमाने की मंशा, जन जागरूकता का अभाव ऐसे कई कारक हैं, जिनकी वजह से चिटफंड कंपनियां अपने पैर आसानी से पसार सकी हैं। ये चिटफंड कंपनियां स्थानीय बेरोजगार युवक-युवतियों को आकर्षक वेतन पर स्टाफ में रखती थीं। साथ ही स्थानीय लोगों को आकर्षक कमीशन पर एजेंट बनाती रहीं।

ये वेतनभोगी युवा और कमीशन पर काम करने वाले एजेंट अपने आसपास और जान-पहचान के लोगों को निवेश करने के लिए राजी करते रहे। शुरुआत में आकर्षक रिटर्न, आफर, उपहार दिए जाने के कारण निवेशक ही इनके प्रचारक बन गए थे। परिणामस्वरूप एक बड़ा वर्ग ठगी और धोखाधड़ी का शिकार हो गया। सरकार को चाहिए कि वह लोगों को जागरूक करे। टीवी, रेडियो, समाचार पत्र-पत्रिकाओं, मेला, सार्वजनिक कार्यक्रमों, सभाओं, स्कूल, होर्डिंग आदि माध्यम से अधिकाधिक जागरूकता फैलाए।

बैंक, ऋण प्रदान करने वाली संस्थाएं, शेयर मार्केट तथा निवेश स्वीकारने वाली संस्थाएं भी अपने निवेशकों और ग्राहकों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाएं। कुछ जिम्मेदारी जनता को भी लेनी होगी। जल्द से जल्द लाभ कमाने की अपनी मानसिकता पर अंकुश लगाना होगा। धैर्य, कड़ी मेहनत और ईमानदारी पर भरोसा करना होगा। सरकार, प्रशासन और संस्थाएं सीमित हैं।

सभी तक उनकी पहुंच संभव नहीं है, इसलिए अपने विवेक उपयोग करें और सही जानकारी लेकर ही इस प्रकार के निवेश में हाथ डालें। आशा की जानी चाहिए कि सरकार ठोस पहल कर लोगों को राहत देगी और लोग भी भविष्य में ऐसे झांसे में नहीं आएंगे।

Posted By: Kadir Khan

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