रायपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। व्यवस्था ठीक रखने के लिए पुलिस और प्रशासन के बीच तालमेल हमेशा आवश्यक रहा है। इसके लिए जरूरी है कि सभी एक दूसरे के कार्यक्षेत्र का सम्मान करें और सीमा का अतिक्रमण करने से बचें। उपलब्ध सूचना के अनुसार कहा जा सकता है कि सरकारी वाहन में घूमते हुए अंबिकापुर की अपर कलेक्टर तनूजा सलाम के भाई ने जो किया वह ठीक नहीं था परंतु गलती छुपाने के लिए जिस आक्रामकता का परिचय दिया गया वह और भी अनुचित प्रतीत होता है।

बुधवार की आधी रात अगर अमलेश्वर थाने के पुलिसकर्मियों ने बिना नंबर प्लेट वाली गाड़ी की जांच की तो वह उनका कर्तव्य था। इसके लिए उनकी प्रशंसा की जानी चाहिए थी कि अपर कलेक्टर की पट्टी देखकर गाड़ी जाने नहीं दी।

इस तरह की चूक से कई बार बड़े हादसे होते हैं। घटनाओं को अंजाम देने के लिए आतंकवादी से लेकर अपराधी तक नंबर प्लेट गायब कर नाम की पट्टी लगा देते हैं। ऐसे में तनूजा सलाम के भाई प्रणय की जांच को किसी भी तरह गलत नहीं ठहराया जा सकता। उसके बाद अपर कलेक्टर का थाने में पहुंचकर हंगामा करना और पुलिसकर्मियों पर नशे में होने का आरोप लगाना गंभीर सवाल खड़ा करता है। पुलिस अधीक्षक डा. अभिषेक पल्लव ने दावा किया है कि मेडिकल जांच में एक भी पुलिसकर्मी नशे में नहीं पाया गया। इसके बाद प्रश्न और गंभीर हो जाता है कि पुलिसवालों को इस तरह बदनाम करना कितना उचित है।

एक जिम्मेदार अधिकारी का इस तरह आक्रामक हो जाना बता रहा है कि व्यवस्था में सबकुछ ठीक नहीं है। जब कोई व्यक्ति अपने को व्यवस्था से ऊपर समझने लगे तो वह समस्या का कारण बन जाता है। तनूजा सलाम से जुड़ा मामला इसलिए भी संवेदनशील है कि वह पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता अरविंद नेताम की बहू हैं। इस तरह वह प्रशासनिक के साथ-साथ राजनीतिक पृष्ठभूमि के कारण भी अति महत्वपूर्ण लोगों की श्रेणी में शामिल हो जाती हैं।

ऐसे में उनके व्यवहार के बारे में सामने आई बातें प्रशासनिक व्यवस्था को सचेत कर रही हैं कि वह अपने अधिकारियों की मनोदशा का विश्लेषण कराए। प्रशासनिक अधिकारियों से उम्मीद की जाती है कि वह धैर्य का प्रदर्शन करते हुए व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में योगदान करें। पूरे मामले की जांच कराई जानी चाहिए। डा. अभिषेक ने भी कहा है कि मामला सामने आया है तो जांच तो होगी ही।

जनता उम्मीद करेगी कि जांच में सामने आई बातें भी सार्वजनिक हों क्योंकि रात के डेढ़ बजे किन कारणों से पाटन के तहसीलदार, नायब तहसीलदार से लेकर एसडीओपी तक तो अमलेश्वर थाने पहुंचना पड़ा। जनता यह भी जानना चाहेगी कि अंबिकापुर की बिना नंबर की सरकारी गाड़ी किसकी अनुमति से एक अधिकारी का भाई लेकर घूम रहा था।

पुलिस और प्रशासन को बताना चाहिए कि एक आम आदमी ने अगर यह काम किया होता तो उस पर क्या कार्रवाई हुई होती? किसी को कांग्रेस नेता और प्रशासनिक अधिकारी का रिश्तेदार होने की छूट नहीं दी जा सकती। यह तकरार ठीक नहीं है। आशा की जानी चाहिए कि गृह मंत्री खुद भी मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई सुनिश्चित कराएंगे।

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