रायपुर। पर्यटन की दृष्टि से समृद्ध छत्तीसगढ़ की धरती खूबसूरत वादियों से भरी है। धार्मिक स्थलों, कला-संस्कृति और पुरातत्व के मामले में भी यह किसी राज्य से पीछे नहीं है। यहां पर्यटन की भरपूर संभावनाएं हैं। राज्य सरकार इस मामले में काफी काम भी कर रही है। राम वनगमन परिपथ का विकास इसका उदाहरण है। कोरोना काल के बाद वर्ष 2021 में जिस तरह से राज्य में भारतीय और विदेशी मिलाकर एक करोड़ 15 लाख से अधिक पर्यटक आए, वह यह बताने के लिए काफी है कि सरकार पर्यटन को बढ़ावा देने को लेकर गंभीर है। किसी भी राज्य के आर्थिक विकास में पर्यटन की विशेष भूमिका होती है।

इसे ध्यान में रखते हुए ही प्रदेश की पर्यटन नीति- 2020 तैयार की गई है। इसके तहत मुख्य रूप से पर्यटन विकास के साथ-साथ स्थानीय लोगों को रोजगार देना, ग्रामीण पर्यटन का विकास करना, स्थानीय लोगों को गाइड ट्रेनिंग प्रोग्राम के तहत पर्यटन उद्योग से जोड़ना आदि काम शामिल हैं, ताकि पर्यटन विकास के सार्थक परिणाम मिल सकें। पर्यटकों के लिए होम स्टे की योजना पर भी काम किया जा रहा है, ताकि ग्रामीण अंचल और जनजाति समुदाय की जीवनशैली, परिवेश और स्थानीय खानपान का पर्यटकों को अनुभव मिल सके। केरल, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान जैसे राज्य इसके उदाहरण हैं, जिन्होंने इसी तरह की नीतियों पर काम कर पर्यटन के क्षेत्र में बहुत विकास किया है।

राज्य में भी पर्यटन क्षेत्रों को विकसित करने के लिए चरणबद्ध काम किए जा रहे हैं। राम वनगमन परिपथ का काम नौ चरणों में किया जा रहा है। इसमें भगवान राम के ननिहाल चंदखुरी के कौशल्या माता मंदिर से लेकर जांजगीर के शि‍वरीनारायण तक विकास कार्य किए जा रहे हैं। प्रदेश में इसी तरह के 138 पर्यटन स्थलों को चिह्नित कर सरकार काम रही है। इसके तहत चुनिंदा पर्यटन स्थलों पर खानपान और आवास की बेहतरीन सुविधायुक्त होटल, मोटल, रिसार्ट और रेस्टोरेंट का निर्माण कर पर्यटकों को सुविधाएं दी जा रही हैं। बस्तर में कुटुमसर गुफा और कांगेर घाटी, राष्ट्रीय उद्यान, चित्रकोट जलप्रपात महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल हैं, जो अपनी अद्भुत छटा की वजह से पर्यटकों का दिल जीत रहे हैं।

सिरपुर बौद्ध धर्म का प्रमुख केंद्र रहा है। इसे पूणर््ा रूप में विकसित कर प्रचार-प्रसार के जरिए बड़ी संख्या में पर्यटकों को आकर्षित किया जा सकता है। छत्तीसगढ़ प्राचीन स्मारकों, दुर्लभ वन्य प्राणियों, नक्काशीदार मंदिरों, बौद्ध स्थलों, राजमहलों, जलप्रपातों, गुफाओं और शैलचित्रों से भरा हुआ है। यहां ऐतिहासिक, पुरातात्विक, धार्मिक और प्राकृतिक पर्यटन स्थलों की भरमार है। राज्य के बांधों में मुरुमसिल्ली और गंगरेल धमतरी, हसदेव बांगो सतरेंगा कोरबा, संजय गांधी जलाशय खूंटाघाट रतनपुर, सरोधा बांध कबीरधाम, समोधा और कोडार बांध रायपुर, मलानिया बांध गौरेला और दुधावा बांध कांकेर में वाटर और एडवेंचर टूरिज्म की बहुत संभावनाएं हैं। धार्मिक स्थलों में प्रमुख डोंगरगढ़ की मां बंलेश्वरी मंदिर को प्रसाद योजना के तहत विकसित किया ही जा रहा है।

लेकिन यह तो एक शुरुआत है। अभी बहुत कुछ करना बाकी है। उम्मीद की जानी चाहिए कि सरकारें कोई भी हों, इस दिशा में सतत कार्य करती रहेंगी, ताकि देश के नक्श्ो पर राज्य जल्द से जल्द पर्यटक राज्य के रूप मेें शामिल हो सके। इससे मिलने वाले राजस्व से प्रदेश की अर्थव्यवस्था तो मजबूत होगी ही, पर्यटन उद्योग को बढ़ावा मिलने के साथ ही रोजगार के नए अवसरों का भी सृजन होगा।

Posted By: Pramod Sahu

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