रायपुर। मां तेरा शुक्रिया... तुमने मुझे जन्म तो दिया, वरना मेरी जैसी कई मासूमों को कोख में ही खत्म कर दिया जाता है। तुमने हिम्मत तो दिखाई। तुम मेरे पिता से लड़ी होगी, अपने सास-ससुर से लड़ी होगी। समाज से लड़ी होगी... मगर तुम जरूर हार गई होगी। तेरा कोई दोष नहीं है। तुम फिक्र मत करना, मैं जीवित हूं और अच्छे से हूं। दीनदयाल उपाध्याय नगर (डीडी नगर) में शनिवार की अल सुबह तुमने मुझे जहां छोड़ दिया था, कुछ लोगों ने मेरे रोने की आवाज सुन ली। वे आए, मुझे जिस झोले में तुमने छिपाकर लाकर छोड़ा था, उससे बाहर निकला और कपड़े से लपेट लिया। कुछ चींटियां, कीड़े थे आसपास।

खैर, जब तुमने मुझे खुद से अलग करने का दर्द सहा तो क्या मैं इतना भी दर्द नहीं सह सकती। उन्हीं लोगों ने तत्काल पुलिस को फोन किया। वर्दी पहने हुए एक अंकल (112 के आरक्षक चंद्रभूषण शर्मा) आए। जब वे मुझे हाथों में ले रहे थे तो लगा कि वे कांप गए हैं। उन्होंने ऐसा दृश्य कभी नहीं देखा होगा मां...।

मैं आंबेडकर अस्पताल की नर्सरी में हूं, डॉक्टर कह रहे हैं कि बस मुझे थोड़ी सांस लेने में तकलीफ है। मैं ठीक हूं...तुम बिल्कुल भी फिक्र मत करना। बताऊं मां, जब तुमने मुझे दो दिनों तक इस रूढ़ीवादी समाज से छिपाए रखा तो मैं बहुत खुश थी। तुमने सीने से लगाए रखा तो मानो जन्न्त में थी। यहां बहुत अच्छे लोग हैं, बुरे वे हैं जो रिश्तों को स्वीकारते नहीं हैं। डराते-धमकाते हैं। मगर मैं भविष्य में इन सभी परंपराओं को बदलूंगी, तुम्हारा नाम रोशन करूंगी। बस मुझे आशीर्वाद देना मां...।

Posted By: Sandeep Chourey