रायपुर(ब्यूरो)। रायगढ़ जिले के पुसौर ब्लॉक में लगने वाले एनटीपीसी प्लांट के लिए भूमि अधिग्रहण के मुआवजा वितरण में अनियमितता का मामला शुक्रवार को विधानसभा में गूंजा। नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव ने प्रश्नकाल में यह मामला उठाया। उन्होंने कहा कि धारा-4 के प्रकाशन के बाद पृथक व्यक्तियों के नाम पर बटांकन कर दिया गया है। एक एकड़ से न्यून भूमि पर प्रत्येक खातेदार को पांच लाख रुपए का मुआवजा देने का प्रावधान है, इसलिए नौ गांवों में छह हजार 306 नए बटांकन व खतौनियां की गई हैं। यह 300 करोड़ रुपए का मामला बनता है। राजस्व मंत्री प्रेमप्रकाश पांडेय ने बताया कि रायगढ़ जिले के पुसौर ब्लॉक में लगने वाले एनटीपीसी पावर प्लांट के लिए नौ गांवों की कुल 780.723 हेक्टेयर भूमि महाप्रबंधक जिला व्यापार केन्द्र रायगढ़ के लिए अधिगृहीत की गई है। भूमि अधिग्रहण का मुआवजा राज्य के आदर्श पुनर्वास नीति 2007की अधिकतम दर पर निर्धारण किया गया है। भूमि अधिग्रहण के मुआवजा वितरण में की गई गड़बड़ी के संबंध में प्राप्त शिकायत पर प्रारंभिक जांच के बाद दोषी पाए गए अधिकारियों व कर्मचारियों के नाम से पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई गई है तथा उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी की जा रही है। मुआवजे के रूप में एक करोड़ 35 लाख रुपए की राशि दी गई थी, जिसे वापस लिया जा चुका है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि जिला कलेक्टर ने क्षति का आकलन कर राज्य शासन को पत्र भेजा है। भू-अर्जन में अपात्र लोगों को मुआवजा देने के कारण करोड़ों रुपए की हानि की संभावना है। फर्जीवाड़ा स्पष्ट दिख रहा है। उन्होंने इस प्रकरण की सीबीआई से जांच कराने की मांग की। विधायक भूपेश बघेल ने कहा कि मामले की सीबीआई जांच कर रही है, क्या राज्य सरकार द्वारा इसकी अनुशंसा की गई है? राजस्व मंत्री ने कहा कि राज्य शासन ने कोई अनुशंसा नहीं की है। केंद्रीय निधि के दुरुपयोग होता है केंद्र सरकार केंद्रीय एजेंसी को जांच के लिए सौंप सकती है। जांच के लिए राज्य सरकार सक्षम है। जांच में जो भी दोषी होगा, कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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