रायपुर(निप्र)। रायपुर क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) समेत प्रदेश के दुर्ग, बिलासपुर, राजनांदगांव, अंबिकापुर और रायगढ़ आरटीओ कार्यालय में ई-चालान के जरिए वाहनों के रोड टैक्स के भुगतान में भारी गड़बड़ी का खुलासा हुआ है। करीब 20 हजार वाहनों के रोड टैक्स में हेराफेरी की गई है। यह खुलासा 'नईदुनिया' में मामला उजागर होने के बाद चल रही जांच में हुआ है। मामले की विभाग की तीन सदस्यी लेखा टीम जांच कर रही है। लेखा टीम की यह रिपोर्ट सभी आरटीओ को भेजी गई है, जिसमें केवल एजेंटों व दफ्तर के छोटे कर्मचारियों को घोटाले का दोषी माना गया है। टीम की इस जांच रिपोर्ट को लेकर यह सवाल भी उठने लगे है कि आखिर आरटीओ के आला अफसरों को सालों से दफ्तर में चल रहे इस घोटाले की भनक क्यों नहीं लगी? बहरहाल जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद आरटीओ को एक-एक मामलों की तस्दीक कर घोटाले के जिम्मेदार लोगों पर नामजद एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश परिवहन मुख्यालय ने दे दिए हैं। रायपुर आरटीओ में ई-चालान के जरिए हुए करोड़ों के रोड टैक्स घोटाले को चार महीने पहले 'नईदुनिया' ने उजागर कर लगातार इस मामले को प्रमुखता से उठाया है। इससे परिवहन विभाग में खलबली मच गई थी। जानकार सूत्रों ने बताया कि विभाग की तीन सदस्यीय लेखा टीम ने घोटाले की जांच शुरू की तो पता चला कि इसमें वाहन स्वामियों के साथ एजेंड और विभाग के कर्मचारी भी शामिल हैं।

इस तरह हुई गड़बड़ी

जिस वाहन का 9230 रुपए का टैक्स था, उसका चालान मात्र 230 रुपए का पटाया गया। बाकी 9 हजार रुपए हजम कर लिए गए। सूत्रों के अनुसार वाहन स्वामियों ने टैक्स की आधी रकम बाबुओं को दी और बाबुओं ने उसमें अपने हिस्से का बंटवारा कर लिया। जांच में यह भी खुलासा हुआ कि रोड टैक्स में भारी गड़बड़ी का खेल रायपुर ही नहीं दुर्ग, बिलासपुर, राजनांदगांव, रायगढ़, अंबिकापुर आदि आरटीओ दफ्तरों में वर्ष 2010 से चल रहा था। अकेले जहां रायपुर के दफ्तर से 10 हजार वाहनों के रोड टैक्स में घोटाला हुआ है, वहीं अन्य दफ्तरों में कुल 20 हजार वाहनों के टैक्स में गड़बड़ी सामने आ गई है।

10 एजेंटों ने मिलकर की गड़बड़ी

परिवहन मुख्यालय की जांच टीम ने आईटी विशेषज्ञों की मदद से सेंट्रल डाटा को चार माह तक खंगाला तब जाकर यह सच सामने आया कि पूरे घोटाले में दस एजेंटों की अहम भूमिका रही है। इनमें से चार एजेंट रायपुर के हैं। एजेंटों ने बाबुओं व विभागीय कर्मियों की मिलीभगत से घोटाले को अंजाम दिया। जांच टीम ने घोटाले के दोषी पाए गए दस एजेंटों समेत दफ्तर के आधा दर्जन छोटे कर्मचारियों के नाम चिन्हांकित कर लिया है।

अब तक क्या हुआ?

- जुलाई 2014 में तिमाही रोड टैक्स शाखा के बाबू निशांत खलखो निलंबित। घोटाले का दोषी पाने के बावजूद नामजद एफआईआर अब तक दर्ज नहीं कराया गया।

- जुलाई 2014 में आरटीओ एजेंट उल्लास नागपुरे, ई चालान का अधिकृत काम देखने वाले महानंद द्रवी, टाटीबंध निवासी ट्रांसपोर्टर अशोक ठाकुर, कुलदीप सिंह ठाकुर(सगे भाई) और बहन बसंती देवी के खिलाफ धोखाधड़ी का अपराध कायम।

-15 नवम्बर को खमतराई थाने में बीएमडब्ल्यू कार के मालिक गणेश खेतान,एजेंट अमित मसीह तथा कैशियर एसएन टेलर के खिलाफ धोखाधड़ी का जुर्म दर्ज।

रोड टैक्स घोटाले की जांच रिपोर्ट सभी आरटीओ को भेजी जा चुकी है। वे इसका अध्ययन व तस्दीक करने के बाद मामले में एक-एक करके एफआईआर दर्ज कराएंगे। फिलहाल जांच रिपोर्ट के बारे में केवल यहीं बता सकता हूं कि जो भी दोषी होगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा।

-डी.रविशंकर, उप परिवहन आयुक्त

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