रायपुर। छत्तीसगढ़ के सरगुजा की सीमा पर बन रहे कनहर बांध पर कांग्रेस ने सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव ने कहा कि छत्तीसगढ़ के 29 गांव के डुबान क्षेत्र में आने से हजारों लोग प्रभावित हो रहे हैं। बांध के निर्माण और डुबान क्षेत्र के प्रभावितों को मुआवजा वितरण को लेकर भ्रांतियां हैं, जिससे ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। उन्होंने राज्य सरकार से मांग की है कि कनहर बांध के निर्माण के लिए मूल समझौता क्या था, समझौते में कब-कब और क्या-क्या बदलाव किए गए और किन शर्तों को जोड़ा गया, इसका खुलासा किया जाए। साथ ही रिंग बांध को औचित्य क्या है, इसकी लंबाई और व्यय कितना होगा, इसका खुलासा भी सरकार को करना चाहिए।

श्री सिंहदेव ने कहा कि अविभाजित मध्यप्रदेश के जलसंसाधन मंत्री रामचंद्र सिंहदेव से प्राप्त जानकारी के अनुसार 1980 में उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश सरकार के बीच समझौता हुआ। समझौते के अनुसार बांध निर्माण में 263 हेक्टेयर भूमि, जिसमें 50 हेक्टेयर भूमि ग्रामीणों की थी, उसके डुबान से सिर्फ 22 परिवार ही प्रभावित हो रहे थे। वर्ष 1999 और 2010-11 में समझौते की शर्तों में बदलाव किया गया है। श्री सिंहदेव ने कहा कि बांध के लिए 18 किलोमीटर का रिंग बांध भी बनाया जाना प्रस्तावित है, जबकि वास्तविक समझौते में ऐसी कोई शर्त नहीं रखी गई थी। उन्होंने कहा कि देश के किसानों के हितों को सर्वोपरी रखते हुए जहां भी बांध का निर्माण हो रहा है, वह किसानों की सहमति से होना चाहिए।

छत्तीसगढ़ का कितना क्षेत्र डूबेगा

छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन के संयोजक आलोक शुक्ला, सीपीएम के राज्य सचिव संजय पराते और एडवोकेट सुधा भारद्वाज ने कहा कि राज्य सरकार छत्तीसगढ़ के ग्रामीणों को भ्रम की स्थिति में रखे हुए हैं। अब तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि कितने गांव डुबान क्षेत्र में आएंगे। यही नहीं, परियोजना के प्रभावितों को 1983 के आधार पर मुआवजा दिया जा रहा है, जबकि नए भूमि अधिग्रहण कानून 2013 के आधार पर मुआवजा दिया जाना चाहिए। क्या बांध से छत्तीसगढ़ में होने वाले डूब क्षेत्र की समस्त जानकारी राज्य सरकार ने प्राप्त की थी ? क्या छत्तीसगढ़ के डूब प्रभावित ग्राम सभाओं से सहमति प्राप्त की गई ? क्या वनाधिकार मान्यता कानून 2006 के क्रियान्वयन की कार्रवाई पूर्ण हो चुकी है?

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