रायपुर। मानसूनी बौछारों की खबर से किसानों के मन में खेती लहलहाने लगी है और कंधे पर हल लेकर निकलने लगे हैं। अभी तक कमजोर मानसून की आशंका से वे मायूस थे। लेकिन मानसून की दस्तक के साथ सबकुछ भूलकर फिर उसी उत्साह से किसानी की तैयारी में चल पड़े हैं।

मानसून की सुस्ती को देखते हुए मौसम विभाग को उम्मीद नहीं थी कि मानसून की पहली दस्तक 13 जून को छत्तीसग़ढ़ में हो सकती है। लेकिन अचानक मानसून के तेवर बदलने से एक ही दिन में यह महाराष्ट्र को पार करते हुए छत्तीसग़ढ़ की सीमा में प्रवेश किया। बस्तर संभाग के तीन जिलों दंतेवाड़ा, सुकमा और बस्तर में अभी मानसून सक्रिय है और बारिश होने लगी है। सर्वाधिक वर्षा गीदम में 7 सेमी रिकॉर्ड की गई। छत्तीसगढ़ में मानसून ज्यादातर 15 जून के आसपास ही दस्तक देता है। केवल 2008 और 2013 में मानसून 10 जून को सक्रिय हुआ था। तब बारिश भी अच्छी हुई। इस बार मौसम विभाग ने औसत से 10 फीसदी कम बारिश होने का पूर्वानुमान दिया है। लेकिन जानकारों का कहना है कि यहां 900 मिमी पानी भी फसल को पकाने के लिए पर्याप्त है। इस लिहाज से छत्तीसगढ़ में औसत बारिश होगी।

देर रात बरसे बादल

शनिवार को जहां मानसून ने बस्तर में दस्तक दी। वहीं राजधानी में देर रात गर्जना के साथ बौछारें पड़ी। प्रदेश का मौसम दो दिन से बदला हुआ है। ज्यादातर शहरों का तापमान 36 डिग्री से नीचे आ गया है। बंगाल की खाड़ी से नमी आने के कारण यहां का पारा गिरा है और प्री मानसून गतिविधि जारी है। मानसून बस्तर संभाग में सक्रिय हो चुका है और धीरे-धीरे मध्य छत्तीसगढ़ की ओर ब़ढ़ रहा है। मौसम विभाग के मुताबिक आगामी एक दो दिनों तक बारिश होगी।

प्रदेश में औसत वर्षा -1152.1 मिमी

मानसून की दस्तक वर्षवार मानसूनी वर्षा

2014 - 19 जून 986.4 मिमी

2013 - 10 जून 1381.2 मिमी

2012 - 19 जून 1627.8 मिमी

2011 - 17 जून 1373.6 मिमी

2010 - 17 जून 1028.1 मिमी

2009 - 29 जून 1002.5 मिमी

2008- 10 जून 871.9 मिमी

2007 - 24 जून

2006 - 24 जून

यहां 900 मिमी बारिश फसल के लिए काफी है। किसानों को जल प्रबंध करना पड़ेगा।

-डॉ.एएसआर एएस शास्त्री, मौसम विज्ञानी

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