रायपुर। नईदुनिया, राज्य ब्यूरो

कृषि बिल पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केंद्र सरकार, भाजपा संगठन और पूर्व मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह से सात सवाल पूछे हैं। कांग्रेस भवन में आयोजित पत्रकारवार्ता में मुख्यमंत्री ने पूछा कि भाजपा और रमन किसानों को बोनस दिए जाने पर प्रतिबंध लगाने का समर्थन करते हैं या विरोध? वर्ष 2016-22 में किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य रखा गया था। चार साल में किसानों की आमदनी सिर्फ 15 से 20 फीसद बढ़ी। क्या वह पीएम से अनुरोध करेंगे कि वे आगामी दो वर्षों में किसानों की आय दोगुनी करने के लिए तत्काल आपातिक कदम उठाएं और यूपीए सरकार की तरह न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाएं?

क्या स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशों को सही मायने में लागू करेंगे। शांता कुमार कमेटी ने रियायती दर पर खाद्यान्न वितरण की जगह नकद राशि डीबीटी के माध्यम से देने की अनुशंसा की है। भाजपा उन अनुशांसाओं का समर्थन करेगी या विरोध? शांता कुमार की अनुशंसा है कि किसानों की उपज खरीदी में निजी क्षेत्र की भूमिका बढ़ाई जाए। शासन केवल क्षतिपूर्ति की राशि किसानों को दे। सीएम ने पूछा कि क्या भाजपा और रमन इससे सहमत हैं। किसानों को एमएसपी पर खाद्यान्न क्रय करने के स्थान पर प्रति हैक्टेयर पांच हजार से दस हजार नकद सब्सिडी देने की अनुशंसा की है। क्या इस तर्क से सहमत है या विरोध करेंगे? पत्रकारवार्ता में मंत्री रविन्द्र चौबे, मोहम्मद अकबर, डॉ. शिवकुमार डहरिया, कांग्रेस के कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल, उपाध्यक्ष गिरीश देवांगन और संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी मौजूद थे।

छत्तीसगढ़ सरकार संविधान के दायरे में करेगी विरोध

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत में कोई भी संस्था या व्यक्ति या पद संविधान से ऊपर नहीं है। हम सब संविधान के बनाए और बताए हुए दायरे में रहकर अपना-अपना काम करते हैं। अनुच्छेद 246 से लगी हुई सातवीं अनुसूची में तीन सूचियां दी गई हैं, जिन पर संसद और विधानमंडल कानून बना सकते हैं। संघ सूची के 97 विषयों पर केंद्र कानून बनाता है। 66 विषयों पर राज्य विधानमंडल कानून बना सकते हैं। समवर्ती सूची में 47 विषयों पर केंद्र और राज्य दोनों कानून बना सकते हैं, लेकिन विरोध होने पर केंद्र का कानून लागू होगा। संघ सूची में एक भी विषय ऐसा नहीं है, जिसमें कृषि से संबंधित मामलों पर केंद्र को कोई कानून बनाने का अधिकार है। छत्तीसगढ़ सरकार संविधान के दायरे में विरोध करेगी। सीएम ने सवाल किया कि जिस विषय पर कानून बनाने और लागू करने का अधिकार संसद को नहीं है, उस विषय पर भी प्रक्रिया नियमों को शिथिल करके कानून बनाना कहां तक तर्कसंगत और संविधान सम्मत है। तीनों विधायकों के संबंध में संसद के प्राधिकार और वैधानिक सक्षमता का परीक्षण कराकर राजनीतिक और विधिक कार्रवाई की जाएगी।

Posted By: Nai Dunia News Network

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