रायपुर (गिरीश वर्मा)। भीख मांगना कुछ लोगों के लिए मजबूरी होती है। लोग चाहकर भी इस दलदल से निकल नहीं पाते। राजधानी में भिक्षुकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए जिला प्रशासन ने सितंबर 2021 में मोवा में भिक्षुक पुनर्वास केंद्र बनाया गया। यह केंद्र लोगों को भिक्षावृत्ति से बाहर निकालनें में वरदान साबित हो रहा है। यहां न सिर्फ भिक्षुकों और भूले भटके लोगों को रखा जाता है बल्कि उन्हें रोजगारमूलक प्रशिक्षण भी दिया जाता है, ताकि दूसरों के आगे हाथ फैलाने के बजाय मेहनत की रोटी खा सकें।

भिक्षुक पुनर्वास केंद्र का संचालन समाज कल्याण विभाग की देखरेख में संगी मितान संस्थान द्वारा किया जा रहा है। संगी मितान संस्थान की निर्देशक ममता शर्मा ने बताया कि वर्तमान में 58 भिक्षु केंद्र हैं। इनमें 18 पुरुष, 25 महिलाएं और 5 बच्चे हैं। इन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए संस्थान द्वारा कपड़ा सिलाई, पेपर से लिफाफा बनाने, मिट्टी के बर्तन में पेटिंग और सूखे फूल से सुगंधित धूपबत्ती बनाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। पास के मंदिरों से भगवान पर चढ़ाए गए फूलों को लाकर सुखाने के बाद बारीक पीसकर हवन सामग्री मिलाकर धूपबत्ती बनाई जाती है।

यूपी से भटककर रायपुर आई महिला को सुरक्षित घर लौटाया -

ममता ने बताया कि एक बार एक वृद्धा भटकती हुई रायपुर आ गई थी। पुलिस ने रेस्क्यू कर इस केंद्र में लाया। मानसिक रूप से असक्षम होने के कारण वह अपना पता नहीं बता पा रही थी। महिला के पास एक कागज था जिससे घर का पता चल गया। वह प्रयागराज उत्तर प्रदेस की थी। उसके घरवालों से संपर्क कर सकुशल घर लौटाया गया।

300 से अधिक का रेस्क्यू

भिक्षुक पुनर्वास केंद्र द्वारा अब तक 300 से अधिक भिक्षुकों और भूले-भटके लोगों का रेस्क्यू किया जा चुका है। इनमें छत्तीसगढ़ ही नहीं, महाराष्ट्र, ओडिशा, मध्यप्रदेश, झारखंड, उत्तरप्रदेश के भी लोग शामिल रहे। कई लोगों को उनके स्वजन तक पहुंचाया गया। ज्यादा मानसिक रोगियों को मानसिक चिकित्सालय लेे जाया जाता है। बेसहारा बच्चों को बाल गृह में भर्ती कराया जाता है। जिनके परिवार तक संपर्क नहीं हो पाता, उन वृद्धों को वृद्धाश्रम में पनाह दी जाती है।

मनोरंजन के लिए इनडोर गेम्स, पढ़ने को मिलती हैं किताबें -

केंद्र में रह रहे लोगों के स्वाथ्य और मनोरंजन पर भी पूरा ध्यान दिया जाता है। बौद्धिक विकास के लिए किताबें दी जाती हैं, जिनमें रोचक कहानियां, व्यक्तित्व विकास से संबंधित लेख होते हैं। हाल की घटनाओं को जानने के लिए अखबार दिया जाता है। टीवी की भी व्यवस्था है। मनोरंजन के लिए इनडोर गेम्स की व्यवस्था है।

सुबह उठने से लेकर रात में सोने तक की दिनचर्या तय

केंद्र में जागने से लेकर रात में सोने तक की दिनचर्या तय है। सुबह सात बजे प्रार्थना कराई जाती है। व्यायाम, प्राणायाम के बाद चाय-नाश्ता दिया जाता है। स्नान के बाद दोपहर 12 बजे पेपर-पुस्तक आदि पढ़ाया जाता है। शाम को इनडोर गेम खेलाया जाता है। ध्यान एकाग्र करने और विश्वास बढ़ाने के लिए सात बजे पूजा-आरती कराई जाती है। पूरी दिनचर्या मानसिक विशेषज्ञ के द्वारा तैयार की गई है।

Posted By: Vinita Sinha

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