रायपुर। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान और फेडरेशन ऑफ ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनोकोलॉजिकल सोसाइटीज ऑफ इंडिया (फोग्सी) के संयुक्त तत्वावधान में वेबीनार आयोजित कर महिलाओं विशेषकर गर्भवती महिलाओं के उत्पीड़न और इससे उनके और शिशु के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले विपरीत प्रभावों पर चर्चा की गई। चिकित्सकों ने बढ़ती घरेलू हिंसा से महिलाओं को मानसिक, शारीरिक और यौन उत्पीड़न के दुष्प्रभावों से बचाने का आह्वान किया।

'वायलेंस अगेंस्ट वीमेन' विषयक वेबीमार में फोग्सी की अध्यक्ष डा. शांथा कुमारी ने कहा कि उत्पीड़न की शिकार महिलाओं को डिप्रेशन से लेकर अपंगता, गर्भपात, आत्महत्या और ऑनर किलिंग का शिकार बनाया जा रहा है। कई मामलों में महिलाएं अपनी जान तक गंवा देती हैं। उन्होंने फोग्सी के माध्यम से महिला चिकित्सकों का आह्वान किया कि वे इस संबंध में नियमित जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करें।

फोग्सी की सचिव और एम्स की डीन (रिसर्च) प्रो. सरिता अग्रवाल ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए महिलाओं के प्रति बढ़ती हिंसा पर चिंता जताई और चिकित्सकों को उपचार के साथ काउंसलिंग भी प्रदान करने पर जोर दिया। वेबीनार में वक्ताओं ने केस स्टडी और शोध पत्रों के माध्यम से बताया कि गर्भवती महिलाओं के उत्पीड़न से गर्भस्थ शिशु को भी खतरा हो सकता है। इस संबंध में परिजनों को तुरंत काउंसलिंग प्रदान करने की आवश्यकता होती है।

डा. प्रेमा प्रिया (तमिलनाडु) ने हिंसा का शिकार महिलाओं के प्रति सहानुभूति प्रदर्शित करने, डा. पदमजा वी. ने हिंसा का शिकार महिलाओं की मानसिक स्थिति, डा. लक्ष्मी श्रीखंडे महिलाओं के प्रति बढ़ती हिंसा की चुनौतियों पर और डा. अर्चना कुमारी ने हिंसा की शिकार महिलाओं के विषय में मेडिकोलीगल पहलू के बारे में जानकारी दी। विभिन्न सत्रों का संचालन डा. पुष्पावती, डा. चंद्रशेखर श्रीवास्तव और डा. बीनू मैथ्यूज ने किया।

रायपुर की मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डा. मीरा बघेल और धीरा संयोजक डा. अजय भारद्वाज ने भी वेबीनार को संबोधित किया। इस अवसर पर विषय के फैक्ट्स एंड मिथ्स पर क्विज भी आयोजित किया गया और विजेताओं को पुरस्कृत किया गया। कार्यक्रम में नर्सिंग कालेज की छात्रों ने भी भाग लिया।

Posted By: Pramod Sahu

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