रायपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। 50 माइक्रॉन से कम के कैरीबैग के साथ ही डिस्पोजल, प्लास्टिक की 200 एमएल से छोटी बॉटल सहित प्लास्टिक की बहुत सी चीजों पर अगले महीने से प्रतिबंध लगने के संकेतों से बाजार में हलचल मच गई है। बताया जा रहा है कि अब बाहर से पतला कैरीबैग का स्टाक मंगाना बंद कर दिया गया है। इसकी रोज की आवक 100 से 150 टन तक थी। दूसरी ओर कारोबारी पुराना स्टाक को खत्म करने में लगे हैं। हालांकि 50 माइक्रॉन से अधिक के कैरीबैग चलेंगे।

कारोबारी सूत्रों का कहना है कि बिना विकल्प के प्लास्टिक पर बैन लगाने से बाजार को नुकसान होगा। प्लास्टिक कारोबार से जुड़े लोगा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित होंगे। रविवि के प्रोफेसर डॉ. शम्स परवेज ने बताया कि प्लास्टिक का उपयोग स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक है। प्लास्टिक उत्पादों का उपयोग करने पर इनके कैमिकल शरीर में पहुंचकर नुकसान पहुंचाते हैं। साथ ही पर्यावरण के लिए भी नुकसानदायक हैं।

सात हजार से अधिक का रोजगार होगा प्रभावित-

कारोबारी सूत्रों के अनुसार छत्तीसगढ़ में 30 से 35 प्लास्टिक फैक्ट्रियां हैं और 1500 रिटेलर हैं। इनमें सात हजार से अधिक कारोबारी काम कर रहे हैं। बिना विकल्प के प्लास्टिक पर बैन लगाने से इनका रोजगार प्रभावित होगा।

फूड पैकेजिंग सहित दूसरे कामों में लगे संस्थान-

प्लास्टिक पर बैन की संभावनाओं को देखते हुए प्लास्टिक का निर्माण करने वाले संस्थानों ने अपना कारोबार दूसरी ओर मोड़ना शुरू कर दिया है। ये संस्थान फूड पैकेजिंग, सीमेंट पैकेजिंग, इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की पैकेजिंग में जुटने लगे हैं। कारोबारियों का कहना है कि इनके लिए अभी कोई नियम नहीं बना है। छत्तीसगढ़ प्लास्टिक निर्माता व क्रेता संघ के अध्यक्ष जीवत बजाज ने बताया कि प्रदेश में तो पतले कैरीबैग का निर्माण ही नहीं किया जाता। इसे बाहर से ही मंगाया जाता है। अब इन्हें मंगाना भी कम कर दिया गया है।

विकल्प चाहता है बाजार-

प्लास्टिक कारोबारियों का कहना है कि प्लास्टिक पर बैन लगाना काफी अच्छी बात है, लेकिन पहले इसके विकल्प को तलाशना चाहिए। दूसरी बात यह है कि नियम सबके लिए एक समान होना चाहिए। यानी छोटे कारोबारियों के साथ ही बड़ी-बड़ी कंपनियों पर भी कार्रवाई समान रूप से होनी चाहिए। इस मामले में सरकार का दोतरफा रवैया नहीं होना चाहिए।

Hindi Diwas : रायपुर में ऐसा पत्थर, जो बताता है हिंदी का इतिहास

कार्यस्थल पर महिलाओं का उत्पीड़न रोकने बना नया कानून, जानिए क्या है इसमें

Posted By: Nai Dunia News Network

fantasy cricket
fantasy cricket