रायपुर (Interview of the week)। राज्य की शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के लिए समग्र शिक्षा विभाग की तरफ से नित नए प्रयोग किए जा रहे है। विभाग की तरफ से स्कूलों में नवीन भवन, छात्रों को गणवेश, पाठ्यपुस्तकें, बालिकाओं के लिए छात्रावास, छात्रों को गुणवत्ता परक शिक्षा सुविधा, छात्रों को अन्य तरह की सुविधाएं देना प्रमुख लक्ष्य है। छात्रों के अलावा शिक्षकों के क्षमता विकास में भी का किया जाता है। स्कूल शिक्षा विभाग की तरफ से भी कई तरह की योजनाएं संचालित हो रही है। समग्र शिक्षा और स्कूल शिक्षा विभाग मिलकर छात्रों को बेहतर शिक्षा देने के लिए प्रयासरत है। समग्र शिक्षा विभाग की तरफ से शिक्षा सुधार के लिए किए जा रहे प्रयासों को लेकर समग्र शिक्षा विभाग के प्रबंध संचालक आईएएस नरेंद्र कुमार दुग्गा से मनीष मिश्रा ने खास बातचीत की। पढ़िए साक्षात्कार के कुछ प्रमुख संपादित अंश....

1. छात्रों को गुणवत्ता परक शिक्षा देने के लिए क्या कदम उठाये जा रहे हैं?

छात्रों को गुणवत्ता परक शिक्षा देने और उनके शिक्षा के अधिकार को पूरा करने के मकसद से समग्र शिक्षा कार्यक्रम शुरू किया गया है। पहले इसके तहत सिर्फ प्राथमिक स्कूलों में ध्यान दिया गया।फिर योजना का विस्तार करते हुए स्कूली शिक्षा को शामिल किया गया है। छात्रों के अलावा शिक्षकों को भी पढ़ाने की तकनीक पर विकास करने के लिए उन्हें भी प्रशिक्षण दिया जाता है।सबसे पहले जिला प्राथमिक शिक्षा कार्यक्रम डीपीईपी के माध्यम से कक्षा पांचवीं तक, फिर कुछ वर्षों बाद इसका विस्तार करते हुए सर्व शिक्षा अभियान एसएसए के माध्यम से कक्षा आठवीं तक, उसके बाद इस कार्यक्रम का विस्तार कर राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान आरएमएसए के माध्यम से हायर सेकेंडरी स्तर तक कार्यक्रम का विस्तार हुआ।

2. स्कूलों में विस्तार के लिए किस प्रकार के कार्य किए जा रहे हैं?

छात्रों की पढ़ाई के लिए बेहतर और सर्वसुविधायुक्त नये स्कूल खोलते है,उनमें अच्छी तकनीकी शिक्षा सुविधा के साथ अच्छे भवन की सुविधा दी जाती है।छात्रों को गणवेश, पाठ्य पुस्तकें, बालिका छात्रावास, गुणवत्ता-परक शिक्षा सुविधा, आवश्यकता वाले छात्रों को विशेष सुविधाएं प्रदान करना, शिक्षकों के पढ़ाने के लिए नई तकनीकी के प्रशिक्षण देना शामिल है। स्कूलों का नियमित निरीक्षण , व्यावसायिक शिक्षा सुविधा, शिक्षा में तकनीकी का उपयोग करने के लिए स्कूलों को प्रेरित किया जाता है।

3. नक्सली क्षेत्रों में लगातार स्कूल बंद होते जा रहे हैं, इनके लिए क्या योजना है?

नक्सल समस्या की वजह से प्रदेश में बंद हुए स्कूलों को दोबारा शुरू करने का प्रयास किया जाता है। इस साल हमने सत्र के शुरुआत में ही नक्सल समस्या से बंद हो चुके 260 स्कूलों को दोबारा शुरू किया है, अब इसका आंकड़ा 315 हो गया है। इनमें से प्रत्येक स्कूल की स्थिति का आकलन कर उनमें सुधार हेतु आवश्यक व्यवस्था कर रहे हैं। बहुत से स्कूलों के यू-डाईस कोड के न होने से इन्हें कई तरह की शासन की सुविधाएं नहीं मिल पा रही थी। इन स्कूलों के यू-डाईस कोड पुन: लेते हुए इन्हें मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयास जारी हैं नए स्कूल खोलने का प्रस्ताव भी हम देते हैं। स्कूल को अच्छे से चलाने के लिए हमने शाला प्रबंधन समिति का गठन किया है। समिति में छात्रों के पालकों को शामिल किया है। उन्हें स्कूल संचालित करने के लिए कुछ जिम्मेदारियां भी दी गई है।

4. छोटे बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के लिए बालवाड़ी योजना शुरू की गई थी, इसका संचालन कैसे करते हैं?

छोटे बच्चों को खेल-खेल में बेहतर शिक्षा देने के लिए बालवाड़ी योजना शुरू की गई थी, शुरू में ही हमने लगभग पांच हजार से अधिक बालवाड़ी खोले हैं।शुरुआत में जहां प्राथमिक स्कूल और आंगनबाड़ी एक ही परिसर में चल रहे है, उन्हें शामिल किया गया है। प्राथमिक स्कूलों में कार्यरत इच्छुक शिक्षकों को हम बालवाडी के अध्यापन में सहयोग देने हेतु जिम्मेदारी दे रहे हैं।उन्हें स्थानीय भाषा सीखने के लिए प्रशिक्षण भी दिया जाता है।बालवाड़ी का अच्छे से संचालनक करने के लिए अंगना में शिक्षा जैसी कई तरह की योजनाएं भी चला रहे है।बच्चों को खेल-खेल में शिक्षा के लिए उपयोगी उपकरण खरीदें गए।

5. पीएमश्री योजना के तहत खुलने वाले स्कूलों से राज्य के बच्चों को क्या फायदा होगा?

छात्रों का बेहतर भविष्य बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार की तरफ से देशभर में पीएमश्री योजना के तहत स्कूल खोले जा रहे है। पीएमश्री स्कूल नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति की प्रयोगशाला के रूप में काम करेंगे।इसके तहत प्रदेशभर में लगभग तीन सौ स्कूल खोले जाने की योजना है।2024 तक प्रदेश के हर ब्लाक में कम से कम एक पीएमश्री योजना तहत स्कूल खोलने का लक्ष्य है।

6.नई शिक्षा नीति में स्थानीय भाषा को बढ़ावा देना शामिल है, इसे पूरा करने के लिए क्या कर रहे हैं?

राष्ट्रीय नई शिक्षा नीति में स्थानीय भाषाओं को बढ़ावा देने का लक्ष्य है। इसी लक्ष्य को पूरा करने के उद्देश्य से हमने बालवाड़ी कार्यक्रम चला रहे है, इसमें बच्चों को खेल-खेल में शिक्षा के साथ स्थानीय भाषा में पढ़ाई करवाई जा रही है। शिक्षकों के लिए बहु-भाषा शिक्षण से संबंधित आनलाइन कोर्स भी करवाए जाने की व्यवस्था की गयी है।शिक्षकों को बच्चों की भाषा सीखने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। शिक्षकों को बच्चों को कक्षा अध्यापन में बहु-भाषा शिक्षण पद्धति के उपयोग के लिए विभिन्ना प्रकार की सामग्री भी बनाए जाने हेतु प्रयास किए जा रहे हैं।बिग बुक, स्माल बुक. वर्णमाला चार्ट, वर्णमाल पुस्तिका, वार्तालाप पुस्तिका, शिक्षकों के लिए भाषा सेतु सहायिका, स्थानीय कहानियाँ, गीत-कविताओं का संग्रह कर जिलेवार ई-सामग्री भी निर्मित कर कक्षाओं में उपयोग में लाई जा रही है।

7. स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए क्या प्रयास कर रहे है?

स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए एससीईआरटी के साथ मिलकर अलग-अलग प्रोग्राम चलाए जाते है। अभी सुघ्घर पढ़वईया योजना लागू किए है। इसमें स्कूलों को गोल्ड, प्लेटिनम और ब्रांज तीन तरह के मेडल दिए जाएंगे। कक्षावार के हिसाब से शिक्षा की गुणवत्ता तय किए गए है। इन्हीं गुणवत्ता के पूरा करने वाले स्कूलों को अलग-अलग मेडल दिए जाएंगे। अभी तक प्रदेशभर के 90 प्रतिशत स्कूल सुघ्घर पढ़वईया योजना में चुनौती स्वीकार कर चुके है।

Posted By: Vinita Sinha

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