रायपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। केंद्र सरकार द्वारा लाए गए कृषि आधारित अध्यादेश पूरी तरह से किसानों के हित में हैं, हालांकि इसमें कुछ संशोधन की भी दरकार है। यह कहना है छत्तीसगढ़ के किसान और उनके नेताओं का। किसानों के नेताओं का कहना है कि सरकार ने किसानों की स्थिति को, प्रोसेसर, एग्रीगेटर्स, थोक विक्रेताओं, बड़े खुदरा विक्रेताओं और निर्यातकों के सामने सशक्त बनाने के लिए मूल्य आश्वासन और कृषि सेवा अध्यादेश, 2020 पर 'किसान (सशक्तिकरण और संरक्षण) समझौते' को भी मंजूरी दी। कृषि व्यापार अध्यादेश 2020 केंद्र सरकार ने लाया है उसे अब कानून बनाया जा रहा है। किसानों की आमदनी बढ़ाने नए प्रयास तो करने ही होंगे।

कानून से फायदा

इस कानून से छोटे किसानों को अधिक लाभ होगा और प्रदेश में वे 86 प्रतिशत है, किसी भी नए कार्य की अच्छाई या बुराई तो सामने आने के बाद ही मालूम पड़ती है।फिर भी भारतीय किसान संघ किसानों के हित को ध्यान में रखते हुए इस कानून में मुख्यरूप से कुछ संशोधन चाहता है। पहला किसान के उपज की समर्थन मूल्य से कम में बिक्री ना हो। दूसरा व्यापारियों का पंजीयन हो उनकी सुरक्षा निधि जमा हो ताकि वे भाग ना सके। तीसरा कार्पोरेट कंपनियां किसान बनकर ना आ सके। चौथा प्रत्येक जिलों में कृषि न्यायालय की स्थापना हो अगर कोई विवाद हो तो निपटारा किसान के जिले में ही हो।

- नवीन शेष, प्रचार प्रमुख, भारतीय किसान संघ, छत्तीसगढ़ प्रदेश

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उत्पादन के लिए उपलब्ध होगा एक बड़ा बाजार

केंद्र सरकार द्वारा लाया गया अध्यादेश किसानों को अपने उत्पादन के लिए एक बड़ा बाजार उपलब्ध कराएगा, लेकिन ये अध्यादेश तभी सही होगा जब व्यापारी राज्य और केंद्र में पंजीकृत हो और उसकी बैंक सिक्योरिटी डिपोजिट हो। एक घटना पिछले वर्ष कवर्धा जिले में हुई, एक व्यापारी किसानों की फसल खरीद कर बिना पैसे दिए फरार हो गया उसकी पुनरावृत्ति कहीं पर भी न हो।

- संजय साहू, किसान नेता कवर्धा

Posted By: Nai Dunia News Network

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