कृष्ण कुमार सिकंदर, रायपुर। ​Raipur News: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के सभी प्रमुख बाजारों में सड़कों के किनारे लगी वाहनों की कतार एकबारगी शोरूम होने का भ्रम पैदा करती है। प्रशासन की उदासीनता के रेगिस्तान में यह मृगतृष्णा है। यहां नजदीक जाने पर पता चलता है कि स्थानीय दुकानदार से लेकर खरीदारों तक ने अपने वाहनों को खड़ा कर रखा है। उस पर से कोढ़ में खाज तब पैदा हो जाता है, जब वाहनों की अवैध पार्किंग से तंग हो चुकी सड़कों पर मालवाहक वाहनों को खड़ा कर लोडिंग-अनलोडिंग की जाती है।

राजधानी के प्रमुख बाजार चाहे गोल बाजार हो या मालवीय मार्केट, बंजारी बाजार हो या बैजनाथ पारा, पंडेरी हो या शास्त्री मार्केट, दवा बाजार हो या स्टेशन रोड, गुढ़यारी हो या रायपुरा। सभी सड़कें बाजार की दुकानें खुलने से जितनी चौड़ी नजर आती हैं, वह वाहनों की अवैध पार्किंग से इतनी संकरी हो जाती है कि पैदल गुजरना भी मुश्किल होता है। हालांकि यह स्थिति सरकार, प्रशासन और ट्रैफिक पुलिस की नाक के नीचे हो रहा है। राजधानी के लोग प्रशासनिक उदासीनता का दंश झेलने को मजबूर हैं।

शहर के बाजारों में पार्किंग के लिए नहीं है जगह

राजधानी में पार्किंग एक बड़ी समस्या है। कुछ बाजारों में पार्किंग की व्यवस्था तो है, लेकिन उनकी क्षमता आवश्यकता से कम है। इसके अलावा शहर के लोग हैं कि मानते नहीं। वे बाजार में सड़क के किनारे कौन कहे, बीच में वाहन खड़े करने में अपनी शान समझते हैं।

उधर, प्रशासन अपनी नाक के नीचे शहर की मुख्य बाजारों में वाहनों का अतिक्रमण देखकर भी अनजान बना हुआ है। ट्रैफिक पुलिस की भूमिका ट्रैफिक थाना के आसपास तक ही सीमित है। उससे आगे बढ़कर कार्रवाई के बारे में सपने में भी ख्याल नहीं आता है।

Posted By: Himanshu Sharma

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