रायपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। पिछले 10 सालों में राज्य सरकार ने प्रदेश में 500 से अधिक हाई स्कूल खोले, लेकिन इनमें आधे-अधूरे सेटअप की स्वीकृति मिली है। आलम यह है कि राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (आरएमएसए) के तहत खोले गए अधिकतर स्कूलों में सहायक ग्रेड दो और सहायक ग्रेड तीन समेत लैब सहायक, भृत्य ,चौकीदार और सफाई कर्मचारी के पद ही स्वीकृत नहीं किए गए।

बता दें कि राज्य में साल 2011 से लगभग 500 से अधिक हाई स्कूल खोले गए हैं। इन स्कूलों में सिर्फ शिक्षकों के पदों को स्वीकृति दी गई है। बाकी पदों को स्वीकृत नहीं करने से यहां शिक्षक ही बाबू बनकर बैठ गए हैं। कई स्कूलों में तो सिर्फ सेटअप बन पाए हैं और शिक्षकों की नियुक्ति आज तक नहीं हो पाई है। इससे बच्चों की पढ़ाई लगातार प्रभावित हो रही है।

राज्य में चल रहे दो तरह के मापदंड वाले स्कूल

राज्य में जब भी हाईस्कूल खुलता है तो उसके सभी पदों को मिलाकर 13 पदों का सेटअप बनता है। इसे शिक्षा विभाग में सालों से स्वीकृति भी मिलती आ रही है, लेकिन आरएमएसए के तहत जो भी स्कूल खोले गए हैं। उनमें प्राचार्य समेत छह शिक्षक के पद स्वीकृत हैं। जानकारों की मानें तो स्कूल संचालन में अति आवश्यक कर्मचारियों के पद नहीं होने प्रदेश के बेरोजगार युवाओं के लिए भी रोजगार के अवसर कम हो गए हैं। साथ ही एक ही राज्य में दो तरह के मापदंड वाले स्कूल संचालित हो रहे हैं।

गौरतलब है कि माध्यमिक शिक्षा कक्षा नौवीं और 10वीं के लोक व्यापीकरण के लिए भारत सरकार की ओर से यह योजना चल रही है। वर्तामान में इस योजना के तहत भारत सरकार का 60 प्रतिशत और राज्य सरकार का 40 प्रतिशत अंशदान दिया जा रहा है। इस योजना का मकसद माध्यमिक शिक्षा का बढ़ावा देना है।

आरएमएसए की ओर से संचालित स्कूलों में पदों के सेटअप का परीक्षण किया जाएगा। जो भी आवश्यक कार्रवाई होगी की जाएगी। - गौरव द्विवेदी, प्रमुख सचिव, स्कूल शिक्षा