रायपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। Raipur News सावन माह के चौथे और अंतिम सोमवार को एकादशी के संयोग में सुबह से शिवालयों में जलाभिषेक का सिलसिला शुरू हुआ, जो दोपहर तक चलता रहा। सबसे खास आकर्षण बूढ़ातालाब के सामने स्थित बूढ़ेश्वर मंदिर का श्रृंगार रहा। शिवलिंग को अर्धनारीश्वर का रूप दिया गया और असली नागों से शिवलिंग का श्रृंगार किया गया।

शिवलिंग और उसके चारों ओर असली नागों को छोड़ा गया। इसे देखने भक्तों की कतार लगी रही। ब्रह्ममुहूर्त में महादेव का भस्म से अभिषेक करके पूजा, अर्चना, आरती के बाद सहस्त्राभिषेक किया गया। इसके पश्चात श्रृंगार के लिए मंदिर का पट बंद किया गया। शाम को जब पट खुले तो विविध मंदिरों में अलग-अलग रूपों में महादेव का श्रृंगार दर्शन करने श्रद्धालु उमड़ पड़े।

इसके अलावा महादेवघाट के हटकेश्वर मंदिर, नर्मदापारा के नीलकंठेश्वर मंदिर समेत विविध शिवालयों में कहीं बर्फ से हिमालय पर्वत बनाया गया तो कहीं महाकालेश्वर, हनुमान, भैरवनाथ, श्रीकृष्ण के रूप में श्रृंगार किया गया। भांग, धतूरों, बेल पत्तों से शिवलिंग और फूलों, केले के पेड़ से मंदिर परिसर को सजाया गया। बूढ़ेश्वर मंदिर में प्रसाद के रूप में रुद्राक्ष का वितरण किया गया।

कांवरियों के लिए विशेष व्यवस्था

महादेव घाट में शाम चार बजे तक जलाभिषेक की व्यवस्था की गई थी। गर्भगृह में किसी को प्रवेश नहीं करने दिया गया लेकिन गर्भगृह के बाहर बड़े पात्र में जल डालने की व्यवस्था की गई थी। कांवरियों और श्रद्धालुओं ने इस पात्र में जल डाला। यह जल पाइपनुमा पात्र से होते हुए शिवलिंग पर अर्पित होता रहा। शाम को खारुन नदी की महाआरती की गई।

सुरेश्वर महादेवपीठ में सहस्त्रधारा

कचना रोड स्थित सुरेश्वर महादेवपीठ में स्वामी राजेश्वरानंद के नेतृत्व में 108 प्रकार की औषधि एवं गन्नाा रस, बेलपत्र रस, अनार के रस से सहस्त्रधारा, महाआरती करके प्रसाद वितरण किया गया।

Posted By: Pramod Sahu

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