रायपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)।

आने वाले दिनों में नक्सल प्रभावित क्षेत्र अंतागढ़ से राजधानी रायपुर तक 110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से डीजल के बजाय बिजली से ट्रेन दौड़ेगी। इस ट्रेन के चलने से चार जिले बालोद, दुर्ग, रायपुर और कांकेर जिले के सैकड़ों लोगो को फायदा होगा। रेलवे ने 1.16 अरब रुपये खर्च करके विद्युतीकरण का तेज कर दिया है। कार्य पूरा होने के बाद दुर्ग से रायपुर का सफर महज 28 मिनट तक पूरा होने का अनुमान है। अभी इसे पूरा करने में 55 मिनट लगते हैं। बालोद से सफर करने वाले यात्री भी 15 से 20 मिनट पहले ही दुर्ग, भिलाई, रायपुर, दल्लीराजहरा पहुंचेंगे। दुर्ग, मरोदा, गुडंरदेही, लाटाबोड, बालोद, दल्लीराजहरा, भिलाई तीन, चरोदा, कुम्हारी से रायपुर तक लोकल ट्रेन से यात्री आते-जाते हैं।

रायपुर रेल मंडल से मिली जानकारी के मुताबिक अंतागढ़-बालोद-रायपुर रूट पर बिजली से ट्रेन चलाने के लिए विद्युतीकरण का काम पूरा होने में समय लगेगा। यही नहीं, लोकल ट्रेनों की स्पीड बढ़ाने की योजना पर भी काम चल रहा है। दरअसल लोकल ट्रेनों में रोज हजारों यात्री सफर करते हैं, इसलिए ट्रेनों की स्पीड बढ़ाने के लिए तेजी से विद्युतीकरण का काम किया जा रहा है। काम पूरा होते ही लोकल ट्रेनें 110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेगी। फिलहाल रायपुर से केंवटी तक डीजल इंजन वाली ट्रेनों का परिचालन किया जा रहा है, क्योंकि मरोदा से केंवटी तक विद्युतीकरण का काम नहीं हुआ है। बिजली इंजन नहीं चलने से रेलवे को राजस्व का नुकसान हो रहा है, इसलिए विद्युतीकरण का काम तेजी से जारी है। मरोदा से दल्ली तक पहले चरण में काम पूरा किया जाएगा, फिर आगे के स्टेशनों तक विद्युतीकरण किया जाएगा। वर्तमान में रायपुर से केंवटी तक 166 किलोमीटर तक ट्रेनों का परिचालन किया जा रहा है। अंतागढ़ तक ट्रैक बिछ चुका है, जिसका विस्तार भी किया जा रहा है।

बालोद-दुर्ग रूट से होगी शुरुआत

स्पीड बढ़ाने की शुरुआत बालोद-दुर्ग रूट पर पहले की जाएगी। हालांकि रेलवे अफसरों का कहना है कि कोरोना काल में कम यात्रियों के कारण ट्रेन नहीं चलाने का निर्णय लिया है, लेकिन जल्द ही हालात बेहतर होते ही ट्रेन चलाने की घोषणा की जाएगी। विभागीय रिकार्ड में ट्रेनों की रफ्तार अभी 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटा है। रेलवे बोर्ड ने स्पीड बढ़ाने के निर्देश जारी कर दिए हैं। इसी कारण विद्युतीकरण का कार्य तेजी से किया जा रहा है। मरोदा से बालोद-दल्लीराजहरा तक विद्युतीकरण के लिए पोल लगाने व तार जोड़ने का काम चल रहा है।

यहां डीजल से चल रही हैं ट्रेनें

कोरोना काल के पहले तक केंवटी से रायपुर तक एक ट्रेन रोजाना एक बार आना-जाना कर रही थी। इसके अलावा केंवटी से दुर्ग फिर दल्लीराजहरा तक रात तक छह फेरा लगा रही थी। फिलहाल विभागीय रिकार्ड में सभी ट्रेनें डीजल इंजन से चल रही हैं। विद्युतीकरण के बाद यात्रियों का समय भी बचेगा।

नहीं बदलना पड़ेगा इंजन

रेलवे अफसरों का कहना है कि डीजल इंजन के चलने से प्रदूषण होता है। वहीं गाड़ियों की गति भी कम होती है। दरअसल इस रूट पर जाने के लिए ट्रेनों का इंजन कई बार बदलना पड़ता है। विद्युतीकरण होने से इंजन नहीं बदलना पड़ेगा, बिजली इंजन लगने से ट्रेनों की गति बढ़ जाएगी।

वर्जन

110 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से डीजल के बजाय बिजली से ट्रेन चलाने के लिए फिलहाल बालोद तक विद्युतीकरण कार्य जारी है। काम पूरा होने पर ट्रायल किया जाएगा, फिर ट्रेन चलाने हरी झंडी मिलेगी।

- शिव प्रसाद, वरिष्ठ प्रचार निरीक्षक, रायपुर मंडल

Posted By: Nai Dunia News Network

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