रायपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। केंद्र सरकार की नई शिक्षा नीति की सुगबुगाहट तेज हो गई है। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ के कुलपतियों ने अपने मसौदे तैयार कर लिए हैं। वनांचलों तक शिक्षा की नई क्रांति लाने का दावा कर रहे कुलपतियों का कहना है कि वे भौगोलिक आधार पर शिक्षा नीति बनाने की वकालत करने से नहीं चूकेंगे।

विवि और कॉलेजों की ग्रेडिंग के मापदंडों में बदलाव की मांग उठने लगी है। प्रदेश के तमाम कुलपतियों को नई शिक्षा नीति के लिए सुझाव रखने के लिए आमंत्रित किया जा रहा है। 27 जुलाई को दिल्ली में केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय के समक्ष कुलपति अपना सुझाव रखेंगे।

आज कुलसचिवों की होगी बैठक

दिल्ली में बैठक से पहले 22 जुलाई को सभी कुलसचिवों और 24 जुलाई को कुलपतियों की बैठक छत्तीसगढ़ उच्च शिक्षा विभाग ने बुलाई है। नईदुनिया ने जानना चाहा कि वे किस तरह की नीति चाहते हैं तो ज्यादातर प्रमुख विवि के कुलपतियों ने कहा कि छत्तीसगढ़ अभी भी उच्च शिक्षा के मामले में अविकसित क्षेत्र के तौर पर जाना जाता है। ऐसे में यहां के विश्वविद्यालयों की प्रतिस्पर्धा देश के दूसरे विवि के आधार पर कराना ठीक नहीं है।

यह है प्रदेश में शिक्षा का स्तर

छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा में 18 प्रतिशत ही नामांकन दर है। यहां हर युवा को उच्च शिक्षा में पढ़ाई में लाना चुनौती है। राजधानी रायपुर की बात करें तो यहां एनआइटी, ट्रिपल आइटी, आइआइएम, एम्स, हिदायतुल्ला नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी आदि में देशभर के विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, लेकिन रायपुर के कॉलेजों में गुणवत्ता की पोल खुल रही है। पिछले पांच साल के भीतर यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन के 12 बी प्लान में भी सिर्फ एक विवि और 25 कॉलेज ही शामिल हो पाए हैं।

क्षेत्रीयता के आधार पर जारी हो प्रदेश के विवि को फंड

बस्तर विवि के कुलपति डॉ. एसके सिंह ने कहा कि प्रदेश के विश्वविद्यालयों के लिए दिल्ली और मुंबई के जो विवि हैं उनके आधार पर ग्रेडिंग के मापदंड बने हैं। छत्तीसगढ़ जो कि अविकसित क्षेत्र के तौर पर है, यहां उच्च शिक्षा के क्षेत्र में युवाओं को कॉलेज तक लाना ही बड़ी चुनौती है। प्रदेश में 18 प्रतिशत दाखिला दर है, जो बेहद कम है। युवाओं को उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित करने के लिए संस्थानों के आकर्षण को बढ़ाने की जरूरत है।

इसके लिए विशेष राशि छत्तीसगढ़ को मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि देश के दूसरे विवि के बराबर लाने के लिए यहां के नियमों को शिथिल करके यहां अधिक बजट देने की जरूरत है। नई शिक्षा नीति क्षेत्रीय और भौगोलिक स्थिति को देखते हुए बनानी चाहिए। विकसित क्षेत्र के विवि के साथ प्रतिस्पर्धा न कराकर इन विवि को अलग श्रेणी में रखकर बेहतर आर्थिक मदद से उत्कृष्ट बनाने में सहयोग देने की जरूरत है।

भौगोलिक आवश्यकता के आधार पर बने नीति

संत गहिरागुरु विवि सरगुजा के कुलपति डॉ. रोहिणी प्रसाद के मुताबिक सरगुजा का क्षेत्र विकसित क्षेत्र से भिन्न है। ऐसी दशा में शिक्षा नीति शिक्षा की गुणवत्ता, शिक्षा का परिवेश एवं भौगोलिक आवश्यकताओं का आधार पर बनानी होगी। यहां की सुविधाओं के आधार पर शिक्षा की नीति पर फोकस होना चाहिए। दूसरा पक्ष यह भी है कि युवाओं को राष्ट्र की मुख्यधारा से जोड़ना है। इन इलाकों के विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ जोड़ने के लिए बेहतर नीति की दरकार है।

नैक की बैठक में रविवि के कुलपति उठा चुके हैं मुद्दा

हाल ही में दिल्ल में हुई नैक की बैठक में पंडित रविशंकर शुक्ल विवि के कुलपति डॉ. केशरीलाल वर्मा ने भी भौगोलिक और सामाजिक स्थिति को देखकर शिक्षा का विस्तार और नई व्यवस्था बनाने पर जोर दिया है। उन्होंने बताया कि सारे विश्वविद्यालयों को एक साथ एक ही गाइड लाइन में पिरोना ठीक नहीं है। छत्तीसगढ़ आदिवासी इलाका है, यहां सुदूर अंचलों तक शिक्षा का विस्तार करना बड़ी चुनौती है। नई शिक्षा नीति के लिए हमारा सुझाव ऐसा होगा कि गांव और सुदूर अंचलों के युवाओं को विशिष्टता की ओर लाया जाए।